Thursday, March 31, 2022

             जाने क्या हो
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विधा-कविता   
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जाने क्या हो जाये,जिंदगी इंसान की।
जरूरत सख्त मिले, जन पहचान की।।
योग्य भी अयोग्य हो,वक्त की मार पे।
नहीं पता कब लगे,बाजी इस जान की।।


जाने क्या होगी, भविष्य की संस्कृति।
आज के दिन आ गई, अनेक विकृति।।
संस्कार में नाम था, भारत के देश का।
बदल गई इंसान की, आज देख प्रकृति।।

जाने क्या होगा, धरा से जल घट गया।
दिनोंदिन बढ़ गया, जन पैतरा एक नया।।
बचा लो धरा जल,वरन मचे हा-हाकार।
देव,दानव, संत सब, कर रहे हैं ये बयां।।


जाने क्या होगा, इंसान की जग आदत।
हालात होते जा रहे, बद से भी ये बद।।
आदतों को सुधारना,होता जन का फर्ज।
लिख जाएगा जग में,अपनी वो इबादत।।

जाने क्या होगा, पेट्रोल भी जग घट रहा।
तेल स्रोत घटते जा रहे, पूरे ही इस जहां।।
बचत करने की आदत,नहीं डाले इंसान।
आज इंसान पहुंचा है, कहां से भी कहां।।


जाने क्या होता, जब इंसान घटे जिंदगी।
बोलते तक नहीं, कैसी मिलती है बंदगी।।
अपने हाथों पैरों पर, इंसां मरता कुल्हाड़ी।
चहुं ओर देख लेना, बढ़ा दी जन गंदगी।।

जाने क्या होगा, जब हो तृतीय विश्व युद्ध।
पाषाण युग लौट आये,जब जन होगा क्रुद्ध।।
परमाणु के ढेर पर, बैठा है सारा ही जहान।
आज के दिन चाहिए, गांधी और संत बुद्ध।।


जाने क्या होगा, जग आपसी भाईचारे का।
रंजिश में डूब रहा, साहस घटा बेचारे का।।
प्रेम,प्रीत,सद्भाव, बढ़ा देते जन का सम्मान।
रोटी, भीख नहीं मिले, साधु संत द्वारे का।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400



 हंगामा
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कविता
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हंगामा जो कर रहे, ज्ञान से कोसों दूर।
उल्टी बातें कर रहे, जिनके मन गरूर।।
सत्य के मार्ग पर चले, बढ़ जाती शान।
धैर्यवान जो लोग हैं,सह सकते अपमान।।

जहां देखो हो रहा, हंगामा इस संसार।
बेबात की बात करे, नहीं मिले आधार।।
संयम से जो काम ले, बुद्धिमान है जान।
बुजुर्ग समक्ष जो झुके, बढ़ जाता सम्मान।।


हंगामा नहीं उचित, गांव हो या हो शहर।
आपसी मनमुटाव बढ़े, बैर का फैले जहर।।
कभी कभी हंगामा, बरपा सकता है कहर।
पर हंगामा होता है, दिन के आठों ही पहर।।

हंगामा नहीं होता,समस्या का इक समाधान।
अच्छी प्रकार से जानता, पूरा ही यह जहान।।
शांत भाव से रहना, इंसानियत की पहचान।
सच का दामन थाम ले, वो जन हो महान।।

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स्वरचित/मौलिक
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* डा  होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा

Wednesday, March 30, 2022

                     जब कुछ ना मिले
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विधा-कविता   
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जब कुछ ना मिले परिणाम, हिम्मत से लो काम,
हिम्मत जिसके दिल में हो,मिले जरूर परिणाम।
हाथ पर हाथ बांधकर रखे, आलसी उसे मानते,
जानकर भी काम नहीं करे, वो होता है अज्ञान।।

जब कुछ नहीं मिले धन, नहीं बन जाता निर्धन,
एक दिन धन की आवक हो, तत्पर हो तन मन।
पतझड़ जब बीत जाता है,आता है बसंत उपवन,
जैसे विष्णु पूजा खातिर, माह आता है अगहन।।

जब कुछ नहीं मिले सम्मान,मानों नहीं अपमान,
काम सदा करते रहो तो, एक दिन मिले सम्मान।
निरंतर पथ पर चलना ही, सफलता का द्योतक,
नाम मिलेगा जरूर एक दिन, रहना नहीं अज्ञान।

जब कुछ नहीं मिले सार,नहीं कहे उसे निस्सार,
बहुत थका जब इंसान हो, छाया से होगा प्यार।
धूप में चलते जो जाते,कठिन डगर मंजिल पाते,
मन में शंका बस जाये,होती निस दिन जन हार।।

जब कुछ नहीं होती आश, जन मिलता निराश,
निराशा के चलते ही जन, हो जाता वो हताश।
अंतिम समय तक लड़ते रहो, करना है प्रयास,
काम बने या नहीं बने, पर रहो कभी न उदास।।

जब सब कुछ खो जाये,अंतिम मंजिल वो पाये,
चाहे शाम अंतिम हो, पर चेहरा सदा मुस्कराये।
हँसता चेहरा देखकर,जन भी चकित हो जाएंगे,
बस अपनी यादों को, अपने ही दिल में बसाये।।

जब दाव जन फेल हो जाये,निराशा हाथ आये,
निराशा आशा बन जाये, बस आगे बढ़ते जाये।
जग में हिम्मत नहीं हारते,वो ही पाते हैं मंजिल,
इंसानियत वहीं होती है, जो गिरते को उठाये।।

जब कुछ नहीं मिले हाथ, देता सदा प्रभु साथ,
मंजिल को पा लेगा, बढ़ाता कोई अपने हाथ।
भागीरथी प्रयास करो, गंगा धरा पर आ जाये,
समय बदले देर न लगे, बदल जायेंगे हालात।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400



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दोहा मुक्तक
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विषय- दया/करूणा
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दया धर्म का मूल है, कहते आये लोग।
पाप कर्म इंसान में, पैदा हो ज्यों रोग।।
धरती रोती आज यूूँ, कौन बचाये लाज,
कलियुग में बढ़ता बड़ा, दुष्कर्मों का भोग।।

नहीं दया दिल में रही, बुरे कर्म से प्रीत।
अहित करे जन खूब ही,गाते हरदम गीत।।
ओछे धंधे बढ़ रहे, नहीं किसी की खैर,
परहित में जो जी रहे, कहते उसको मीत।।


दिल में मिलती जब दया, करता सुंदर काम।
धर्म पुण्य के बल सदा, होता जग में नाम।।
पाप कर्म इंसान के, होते नरक समान,
जनहित में जो लीन हो, मन मंदिर सम धाम।।

जाना है संसार से, दया रहम दिल राख।
अच्छे कर्मों से बने, सुंदर जन की शाख।।
आपस में जो बांटते, प्रेम प्रीत जग प्यार,
भूल नहीं इस जगत में, बनती मरके राख।।
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*डा. होशियार सिंह यादव,
कनीना, जिला महेंद्रगढ़,
 हरियाणा
फोन 09416348400


Tuesday, March 29, 2022

 बलिदानी भगत सिंह
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विधा-छंदमुक्त कविता
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आजादी का दीवाना था,
पैदा हुआ पंजाब प्रदेश,
भगत सिंह नाम रखा था,
गीत गाता है पूरा ही देश।

असेंबली में बम पर्चे फेंक,
अंग्रेजों को जगाया पल में,
जल से कभी नहीं डरे वो,
विश्वास रखते वो कल में।


जेल में भूख हड़ताल कर,
दिया देश को संदेश अमर,
आजादी को मांगा उन्होंने,
अमर हो गये आज घर घर।

23 मार्च 1931 को दे दी,
अंग्रेजों ने समय पूर्व फांसी,
अंग्रेजी हुकूमत नीचता पर,
आती है जन जन को हाँसी।


बलिदानी भगत सिंह प्रणाम,
कर गये समस्त जग में नाम,
याद करते हैं उनके कार्यों को,
निज जिंदगी बनाई जिन्हें धाम।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400





रिश्ता
विधा-कविता   
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जन्म लिया इंसान ने, कहलाता है बच्चा,
पाक दामन मिलता है, मन से हो सच्चा।
रूप देखके बालक का,कहते हैं फरिश्ता,
प्रभु ने बांधा होता है,बन जाता है रिश्ता।।

सामाजिक बंधन बहुत, रिश्तों का ही रूप,
सदियों से बंधते आये, रंक कहो या भूप।
रिश्तों के ही सामने, मिलता बड़ा मिठास,
मनमुटाव सब दूर हो,बन जाता जब खास।।


अनोखा बंधन बध जाता,बढ़ती जाये सोच,
आपस में जब प्रीत बढ़े, बढ़ता जाए लोच।
तोड़ न पाती बंधन को, जग की कोई शक्ति,
मधुरता बढ़ती जाएगी,जब बातों में हो भक्ति।।

सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ, तब से चलते आये,
रिश्तों की क्या बात,मन मंदिर को ही लुभाये।
जग में सबसे कठोर हैं, रिश्ते जिनका है नाम,
आपस में ही बंध जाते हैं, कहलाते हैं बेदाम।।


त्रिदेवों की एक तिकड़ी, तीन देवियां संग में,
उनके बल पर शक्ति मिली,भीषण से जंग में।
स्वर्ग से ही रिश्ते बनते, पवित्र होता है नाता,
जब घड़ी समय आता है,बंधन में बंध जाता।।


कितने आये चले गये, बंधन को नहीं तोड़ा,
हर इंसां के पास मिले,ये ताकत वाला घोड़ा।
नमन करे उस दाता को, जिसने रिश्ता जोड़ा,
सदा रहेगा इस जग में,ज्यादा मिले या थोड़ा।।

पति पत्नी,भाई बहन,कहीं मात पिता से नाता,
बड़ी गजब की चीज है, तन मन को लुभाता।
देव और दानव, या फिर हो धरती का मानव,
यह पवित्र रिश्ता जन को, मन से ही सुहाता।।


रिश्ते चट्टान बने, या फिर बन जाये तूफान,
रिश्ते निभाते रहिये,आ जाएगी तन में जान।
रिश्तों को नहीं तोडऩा, चाहे जाए जन शान,
रिश्ते बखूबी निभाओ, बन जाएगी पहचान।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका


, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

 

Monday, March 28, 2022


 

                                         घड़ा
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विधा-कविता
घड़ा

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गर्मी दस्तक दे चुकी, मन होता बेचैन,
ठंडा जल घड़े का, देता मन को  चैन,
घड़ा घड़ते कुम्भकार, होगी बिक्री तेज,
आज भी बहुत से लोग,घड़े के हैं फैन

यूजीनोल पदार्थ से, ठंडा घड़े का जल,
रोगों से छुटकारा मिले, समस्या हो हल,
देशी फ्रिज का काम दे,कीमत होती कम,
देख घड़े का नीर तो, मन जाता है मचल।

गली गली में बेचते, सौ रुपये से न कम,
बुजुर्ग लोग ले चाव से, होता तन में दम,
फ्रिज जैसा ठंडा मिले, आता घड़ा काम,
ऐसे में जल पीजिये,सुबह हो या हो शाम।।


ले आओ एक घड़ा अब, क्यों बैठे नाराज,
पीकर जल घड़े का, उभरेगा मन एक राज,
सदियों से घड़े पर, जन जन को बड़ा नाज,
घड़ा घरों में रखना,घर की होता यह लाज।।
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स्वरचित/मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा






 
नूतन वर्ष
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विधा-कविता
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हिंदु नववर्ष की मुस्कान,
समस्त जग में है पहचान,
राजा विक्रमादित्य की देन,
राजा बने वो अति महान।

गुड़ी पाड़वा नाम इसी का,
नवरात्रों को लेकर आता है,
देशी महीनों के  नाम याद,
जन जन को यह दिलाता है।


बनाते हैं घर घर में पकवान,
नव वर्ष  भारतीयता पहचान,
हूणों को हराया था इस दिन,
हर इंसान के दिल की जान।


अक्सास नदी में पिला पानी,
विक्रमादित्य किया श्रीगणेश,
वर्तमान में उनको याद करते,
बस उनकी यादें हैं अभी शेष।

मना रहे जब नव वर्ष कभी,
रखना चैत्र प्रतिपदा को याद,
भूलते जा रहे नव वर्ष को तो,
अवशेष रहेगा वर्षों के बाद।।

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नितांत मौलिक एवं स्वरचित
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 * डा होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 11, मोहल्ला मोदीका
कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा
फोन 9416348400


Sunday, March 27, 2022

                          कविता
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एकता
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पौधे जीवन का आधार,
करते मानव से ये प्यार,
बारिश,हवा,फल देते हैं,
देते भोजन का आधार।

एकता में बंधे हुये मिले,
प्रकृति का रखते ख्याल,
पर इंसान को देख जरा,
करता प्रकृति बदहाल।


आक्सीजन देते पेड़ भी,
प्रदूषण को करते हैं कम,
काट रहा इंसां इन्हीं को,
देखकर आंखें होती नम।

बारिश का आधार होते,
इनको  काटो ये भी रोते,
दिनरात देते पेड़ भी सेवा,
जागते हैं कभी नहीं सोते।


पेड़ रखते हैं निज दोस्ती,
मानव को देते यह शिक्षा,
मत नहीं काटों इनको यूँ,
मांग रहे बसे यह भीक्षा।

आओ प्रकृति करे ख्याल,
पौधों की करेंगे देखभाल,
ये खुश होंगे धरा पर तो,
रखेंगे हमको खुश हरहाल।।

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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400



जरूरत
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विधा-कविता   
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जरूरत ही इंसान को, करवाती है काम,
बिना जरूरत इंसान,मिलता बड़ा बेजान,
जरूरत के मुताबिक ही,बटा हुआ काम,
जरूरत के कारण, व्यस्त हो सुबह शाम।

जरूरत धन की कभी, मारा मारा फिरता,
कभी खड़ा हो द्वारे,कभी नाले में गिरता,
मेहनत करने पर जन, धन दौलत मिलता,
पाकर दौलत जन,चेहरा फूल सा खिलता।

जरूरत पड़ी इंसान को, खोजे जंगल गांव,
कहीं जरूरत के कारण,चिल्लाये कांव कांव,
जरूरत ही इंसान को,मिलता सच्चा गुरुवर,
जरूरत के बल,पहलवान लगा रहा है दाव।

जरूरत पड़ी गंगा की,सगर किया बड़ा तप,
सगर गये अंशुमान गये,भागीरथ किया जप,
गंगा धरती पर आई, पितरों का कर उद्धार,
चहुं ओर प्रकाश हुआ, बज उठे फिर  ढप।


जरूरत होती मात पिता, रखे बच्चे की खैर,
अपनों के पास आए, दूजे को समझता गैर,
जरूरत के बल पर ही, होता जगत में नाम,
जरूरत के कारण ही,बढ़ता जा जन का पैर।

जरूरत गुरु की पड़ी, एकलव्य मिला द्रोण,
मिली नहीं शिक्षा तो, गुरु मान किया काम,
निपुण हुआ धनुर्विधा में, जमाया रंग कमान,
अंगूठा मांगा द्रोण ने,फिर भी हुआ जग नाम।


जरूरत होती फसल को, पानी देता किसान,
जरूरत होती शिक्षा की, बच्चा ले गुरू मान,
जरूरत हर इंसान की, देखें हैं प्राणी भी तंग,
जरूरत पड़ी जन को, कहलाया ज्ञान विज्ञान।

जरूरत ही अविष्कार है, करवाती नये काम,
इंसान जुटा रहता मिले, सुबह हो फिर शाम,
जरूरत बिना इंसान तो, नहीं रहेगा वो इंसान,
जरूरत होती वो जाये,वन,शिकार या हो धाम।।

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* डा. होशियार सिंह यादव



मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Saturday, March 26, 2022

                      परीक्षा
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 विधा- कविता
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परीक्षा देते देते हारी, जगत में कितनी सीता,
परीक्षा के बल पर ही, देव मन उन्हें जीता,
परीक्षा में पास हो जब, मन में उठती उमंग,
परीक्षा दिल से पास हो, मन उठते नये रंग।


परीक्षा होती धैर्य की, जब मन में हो तनाव,
बात बात पर झगड़ा करते,आये मन में ताव,
शांत होकर जो जी रहे, चाहे दुख हो हजार,
इंसान के क्रोध का, बता देता है हाव भाव।


क्रोध जहां में पाप है, धैर्य धर्म का समूल,
बात बात पर नहीं पकड़ो, कोई भी है तूल,
धैर्य की परीक्षा में, अगर सफल हो इंसान,
सफल हो जिंदगी, बरना बन जायेगी शूल।


बड़ी आशा थी मेहनत कर बेटा हो सफल,
नौकरी मिलेगी, समस्या का निकलेगा हल,
परीक्षा से एक दिन पहले पड़ गया बीमार,
परीक्षा छूट गई,रोया आज,हो गया विफल।

रो रही जग नारी, बन गये लोग व्यापारी,
अपनी परीक्षा देते देते वो तो बेचारी हारी,
कभी जन्म से पूर्व मार दिया है निशाचर,
कभी दहेज के लोभी जलाकर वो है मारी।


मेहनत रंग लायी, अब हुई परीक्षा पास,
दिनरात पढ़ाई की,नंबर आये फिर खास,
प्रसन्नता दिल में हुई,सभी को आई रास,
नौकरी रास्ता साफ हुआ,मन नहीं उदास।


इंतजार बहुत हुआ अब,परीक्षा घड़ी आई है,
धक धक दिल धड़के, दाता आश लगाई है,
परिणाम आएगा परीक्षा का, होंगे हम प्रसन्न,
होठों पर चाहे झूठ हो,दिल में सच बसाई है।


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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा



                    शब्द
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विधा-कविता   
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शब्द आया जब संसार में, मिटा ज्ञान अंधकार,
बोल चाल की भाषा में यूं,बढ़ा आपस में प्यार,
शब्दों में वो लोच हैं, दुश्मन हो जाये पानी पानी,
अनकहे जब शब्द कहे,दिल का दर्द बढ़े हजार।


शब्द नहीं थे संसार में, चहुं ओर था तब सन्नाटा,
युग बड़ा अजीब था वो, चहुं ओर पाषाण-भाटा,
शब्दों का फिर वार बढ़ा, शब्द ने शब्द को काटा,
जीवन अजब निराला था,बोल ना पाते थे आटा।

शब्द मिले इंसान को, लगा स्वर्ग में आया बासा,
शब्दों का जंजाल बढ़ा तो, पानी की बढ़ी आशा,
शब्दों के बल पर आज, इंसान बन जाये विद्वान,
पूरे जग में शब्दों के बल,जन की बनती पहचान


शब्दों के मधुर संबंध से, सुंदर गीत बन जाते हैं,
शब्दों के उल्टे बोल अब, गाली जगत कहाते हैं,
शब्दों की लय बन जाती, शब्दों से बने बकवास,
शब्द जहां में अमर सदा, ये सच्चे शब्द सुहाते हैं।


शब्द कटु जब बोलते,अपने भी सब बनते पराये,
अपशब्द जुबान से निकले, हर जन को वे डराये,
हँसी खुशी के शब्द बोल, मन को दे देते आराम,
शब्दों के बल पर ही, विद्वान मूर्ख को ही हराये।


शब्दों के बल पर ही,दोस्त दोस्ती को ही निभाये,
दिल को छूने वाले शब्द,प्रेमिका को सदा लुभाये,
गीत, गजल, कविता, शब्दों के बल नाम कमाये,
शब्दों के बल,राधा रानी, कृष्ण को दिल बसाये।

शब्द ही अमृत, शब्द मोती, शब्दों का है संसार,
शब्दों के बल पर ही, जीत भी बन जाती है हार,
शब्द जीता दे, शब्द हरा दे, शब्द हैं बोला बारूद,
शब्द बोल मां के समक्ष,अनहद देती उसको प्यार

शब्दों का न तोड़ मिले,शब्दों से ही निचोड़ मिले,
शब्द गोली से वार करे, शब्दों से मन बाछे खिले,
शब्द नष्ट नहीं होते जग से,घूमते रहते इस जहान,
शब्दों की महिमा अपरमपार, शब्दों से मन जले।

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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400





Friday, March 25, 2022

                                     महंगाई

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विधा-कविता   

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महंगाई की मार पड़ी है, रो रहे हैं कई लोग,
महंगाई घट नहीं रही, बन गई है नासूर रोग,
अब तो नहीं लगता घी, चूरमें का भी भोग,
वक्त बुरा आ गया है, मिलता नहीं है संजोग।

महंगाई महंगाई चिल्ला रहे, मिला नहीं ईलाज,
महंगाई बढ़ गई हैं, पता नहीं पीछे क्या राज,
महंगाई की मार झेलकर, चले जाएंगे ये लोग,
पर नेताओं को पसंद आ रहा, अपने सिर ताज।


पिछले कुछ समय से,फल सब्जी हुये महंगे,
चोली दामन अधिक पहने, घट गये हैं लहंगे,
विवाह शादियों का दौर एक माह को है बंद,
शिक्षा पा युवा वर्ग, आवाज करता है बुलंद।


पिछले कुछ समय से,किसान आंदोलन घटा,
विभिन्न कर्मचारियों में, असंतोष फिर से बढ़ा,
महंगाई का दौर भी आकाश छूने को जा रहा,
किसानों का कृषि की ओर, रुझान भी घटा है।

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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


दोस्ती
विधा-कविता   
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अमिट प्यार से भरी हुई है,यह धोखे का आधार क्यों,
हर हाल में निभानी होती,इस दोस्ती में व्यापार क्यों?
बुराई को मिटा देती सदा,निराली होती इसकी अदा,
कुछ को लगे बेकार क्यों,इस दोस्ती में व्यापार क्यों?

साथ निभाने का हो वादा,नेक दिलों में होता इरादा,
दिल से हो दो  चार क्यों,इस दोस्ती में व्यापार क्यों?
यहां दोस्ती में व्यापार क्यों,जन नफरत से है प्यार क्यों,
दिलों जान से होती जग में,प्रफुल्लित कर दे तन रग में।


दोस्ती जगत में हो महान,दोस्ती की हो बड़ा जहान,
इंसान कैसा होता जग में,बस दोस्ती से हो पहचान।
दोस्ती में नहीं हो भेदभाव,दोस्ती लगती है एक नाव,
दोस्ती में नहीं कांव कांव,नहीं सोचते कोई है दाव।


कृष्ण सुदामा की दोस्ती, जगत में सभी ही जानते,
दोस्ती में जाती पाती भी,सच्चे जन नहीं पहचानते।
दोस्ती थी राधा कृष्ण की,भक्ति में शक्ति  कहलाती,
गोपियों के संग कृष्ण की,ज्ञान का सागर भर जाती।

दोस्ती है ज्ञान दोस्ती मोती,दोस्ती जागेे कभी न सोती,
दोस्ती पर लुटे  हीरे मोती,बिन दोस्ती आंखें भिगोती।
दोस्ती भरा  प्यार ही प्यार,दोस्ती जग में नहीं व्यापार,
निष्पक्ष दोस्ती को जो तैयार,मिलेंगे मोती उसको हजार।।


राह मुश्किल हो आसान,दोस्ती की यही पहचान,
साया भांति संग में मिले,उसको बसके दोस्त जान।
दोस्त ऐसी बूटी होती है,कहलाती है रोग की दवा,
हर मुसीबत आसान होती,जोश उमंग भर देता नवा।

दोस्ती पर विश्वास करो, कहलाता है यह जगत सारा,
दोस्त अगर दगा दे देता,दोस्त फिर जाता हिम्मत हारा।
बहुत याद आ रही उनकी, दोस्ती की जो बने मिसाल,
दुख दर्द में सम्मुख खड़े थे,हर वक्त पूछते थे मेरा हाल।


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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नं


बर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Thursday, March 24, 2022

                  राजनीति
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विधा-कविता   
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राजनीति इस देश की, मानी जाये धुरी,
चहुं ओर इसके घूमते,लगती कभी बुरी,
हर इंसान की ख्वाहिश,बने वो राजनेता,
मार करे ऐसी तीखी, जैसे हो तेज छुरी।

राजनीति के दाव पेच, ज्ञाता जग में जो,
वोट पाता मतदाता का, निज नीति से वो,
नेताओं की बुद्धि,घूमती वोट पाने खातिर,
वोट दे देते जब कभी,चाहे जितना ले रो।


राजनीति वो गूढ़ ज्ञान, नेता रखते हैं पूरा,
नहीं सफल हो पाएं,अगर ज्ञान है अधूरा,
जहां भी देखे नेता के, पीछे मिलते लोग,
राजनीति को कह रहे, लोग बड़ा है रोग।

राजनीति की शिक्षा पा,कर दे माइंड वाश,
बिखर जाएंगे लोग मुद्दे पर, जैसे पत्ते ताश,
कहीं कहीं यह राजनीति,कर दे बड़ा काम,
पर अधिकांश वक्त, कर देती सारा विनाश।


राजनीति को सीखते, कहलाते जगत नेता,
वोट पाने की खातिर,मधुर वक्तव्य वो देता,
वादों से भरा मिले, करे पूरे मौखिक काम,
अपनी वाकपटुता के बल,जनता वोट लेता।

वोट की जरूरत होती, मिलता हाथ पसारे,
मिले वोट फिर गायब, हर जन को बिसारे,
अपने प्रतिद्वंद्वी को, हरदम देता रहता मात,
कभी कभी वो वक्त आये, धुरंधर नेता हारे।


राजनीति बड़ी कुशल हो,समय जाता भांप,
उल्टी सीधी बात करे,करता रहे नीति जाप,
चाहे कितने वोट मिले,नहीं आए उसे धाप,
गिरने की सीमा का,नहीं बना अबतक नाप।


राजनीति के सामने, दुनिया मिलती है फेल,
चुनाव लड़ते हैं नेता,चाहे होती उनकी जेल,
कभी कभी तो लगता, नेता, राजनीति बेमेल,
दिन रात बस नेता की चुनाव समय बने रेल।।

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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400



मीरा का कृष्ण प्रेम
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विधा-कविता

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प्रेम प्रतीक्षा, बड़ा दर्द दे जाती,
तब जाके मिलन घडिय़ा आती,
किस्मत का सेब खेल दिखाती,
खुशियां मिले फिर लौट जाती।

प्रेम प्रतीक्षा, कड़वा होता बाण,
घटती दृष्टि, घट जाती है घ्राण,
प्रेम मिलन में कभी बसे प्राण,
प्रेम बिना लगता जन निष्प्राण।


प्रेम प्रतीक्षा, सदियों से पुरानी,
कहीं हीर हुई कहीं राजा जानी,
प्रेम प्रतीक्षा नहीं, करे मनमानी,
मिलन होता कभी,नहीं हैरानी।

प्रेम मार्ग बहुत कठिन बताया,
चलकर गया उसने कुछ पाया,
मौत को जिसे गले से लगाया,
वो प्रेम में डुबकी लगा पाया।


प्रेम किया जब शीरी फरियाद,
उन्हें हसीं जमाना याद आया,
प्रेम प्रतीक्षा, मीरा ने किया था,
प्रभु श्रीकृष्ण का, प्यार पाया।

लैला मजनूं की जोड़ी जग आई,
दुनिया हँसी,छवि दिल में बसाई,
पर अपने जब बन जाते हैं कसाई,
नाम रह जाता है,कि प्रीत निभाई।


विष का प्याला, जब पी डाला,
मीर बन गई श्रीकृष्ण की प्यारी,
प्रतीक्षा करके जग में पाया नाम,
देखो फिर मिलन घड़ी की तैयारी।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव



मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Tuesday, March 22, 2022

                                      आशा
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विधा-कविता
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आशा और निराशा में,
बीत रही राह जिंदगी,
सपने मन में लिये हुये,
कैसी बनी है बंदगी?

हर मां बाप चाहता है,
पढ़ लिख बने महान,
पर किस्मत को देखिये,
कूड़ा बिनना है शान।


दो पैसे कूड़े से पाकर,
सब्र कर ले छोटी जान,
कहां कहां वो घूमती है,
कैसी बनी है पहचान।

आएगा वो एक दिन,
जब स्कूल मिले राह,
लिखे पढ़े शान बनेगी,
लोग करेंगे वाह वाह।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


यात्रा वर्णन
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छंदमुक्त कविता

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हरिद्वार की सैर पर
गये लोग हम चार,
खाना पीना संग था,
आपस में बड़ा प्यार।

गंगा में डुबकी लगी,
मिला शिवालय ज्ञान,
कहीं पैदल चल पड़े,
कहीं किया हमें दान।


हर हर गंगे सुना बड़ा,
मंदिरों में आरती शोर,
शाम बहुत सुहावनी,
पर्वत ऊपर कई मोर।

दो दिवसीय थी यात्रा,
मन में भर गई उमंग,
आस्था दिल में जगी,
उभरा मन में एक रंग।


प्रसन्न है मन आज भी,
याद करके यात्रा वृतांत,
घर आये देर शाम को,
हुआ सफर हमारा अंत।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक




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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Monday, March 21, 2022

 
                           सुनता जा
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विधा-कविता/सुनता जा
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देश की सीमा पर जाता,
एक बात मेरी सुनता जा,
सुरक्षा करना तन मन से,
बस यादें दिल बुनता जा।

दुश्मन को सदा मार गिरा,
रण में नहीं पीठ दिखाना,
सीना चौड़ा करके देश को,
मातृभूमि को शीश नवाना।


हार जाये तो क्या वीरता,
बेशक रण में मर जाना,
पर घर पर जब आये तो,
नाम कमाकर ही आना।

अगर शहीद हो जाएगा,
युगों युगों तक रहे याद,
पर दुश्मन से टकराकर,
करना नहीं है फरियाद।


कंधों पर है भार देश का,
मन में सदा इठलाता जा,
बहादुर सिपाही आगे बढ़े,
जग उनके गीत गाता जा।


कभी याद हमें भी करना,
हम तुमको याद करते अब,
जाकर सीमा पर पहरा देना,
बस इतनी ही दुआएं हैं रब।।


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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
09416348400




दिन गुजरता है
विधा-कविता   
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दिन गुजरता है, रात फिर आती है,
सूर्य उदय होता,उजाला मदमाती है,
दिनभर की यादें, रात को सताती हैं,
दिनोंदिन कर जिंदगी बीत जाती है।

दिन गुजरता है, लोग दौड़ पड़ते हैं,
पक्षी चहचहाते जब, पशु विचरते हैं,
रात के अंधेरे में,कितने पाप पलते हैं,
इंसान बुरे लोगों से, जमकर डरते हैं।


दिन गुजरता है, कोई आंसू बहाता है,
किसी को अंधेरा, जमकर सुहाता है,
किसी की जिंदगी, धीरे धीरे जाती है,
कुछ अनकहे गीत, जिंदगी सुनाती है।

झरने भी बहते हैं, नदियां  चलती हैं,
होले-होले अंगड़ाई दिल में पलती हैं,
खेल कूद में में हँसी,दिल में चलती है,
अनेक अजीब बातें,मन में मचलती हैं।


दिन गुजरता है, मन आराम पलता हैं,
दिनभर की थकान, मन में खलता है,
आते जाते कितने, कारवां निकलता है,
कोई बेचारा बैठकर,हाथ ही मलता है।


दिन रात की कड़ी,जैसे होते सुख दुख,
कोई कष्टों के समक्ष,जाता है तुरंत झुक,
आने वाला समय भी, किसका साथी है,
पता नहीं कौन कब मिलता है विमुख।

शाम आती हैं, एक पैगाम देके जाती हैं,
बीतें दिनों की यादें मन को तड़पाती हैं,
एक दिन वो शाम चलकर ही आती है,
भोर की किरणें चहुं ओर तरफ आती हैं।


दिन गुजरता है, एक एक दिन बढ़ता है,
रात फिर आती हैं, वो भी चली जाती है,
एक बार सोच जरा, जिंदगी मदमाती है,
कौन किस घड़ी में ,साथ ही छूट जाती हैं।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01




कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Sunday, March 20, 2022

 
                                ज्ञान का भंडार
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किताबें ज्ञान का भंडार हैं,
अमानत इनको लेना मान,
किताबों के ज्ञान से ही बने,
इंसान की जग में पहचान।

बहुत लिखा है किताबों में,
आतंकवाद ना  होना चाहिए,
बंदूकों के साये को छोड़कर,
हँसी खुशी ही जीना चाहिए।


बहुत लिखा है पुस्तकों में ये,
हिंसा सबसे बुरी हो बीमारी,
जिसने छोड़ दी हिंसा जगत,
उसकी किस्मत होती न्यारी।

लिखा हुआ है पुस्तकों में ये,
ज्ञान विज्ञान का पूरा ही हाल,
इसलिये वक्त पड़े तो ढूंढकर,
बना रहे जग में निज पहचान।


बहुत लिखा है पुस्तकों में ये,
भाईचारा सबसे बड़ी मिसाल,
जो बैर भाव को अपनाता है,
एक दिन हो जाता बुरा हाल।


पुस्तकों में नहीं लिखा हुआ,
जीवन पा बनो आतंकवादी,
खून खराबा कर दो पल में,
कर दो जग में बड़ी बर्बादी।

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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400



आओ जलाए नफरत की होली
विधा-कविता

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नफरत दिलों में भरी कूट-कूट,
मार काट करती दिखती टोली,
कब भूलेंगे ये नफरत की आंधी,
आओ जलाए नफरत की होली।

लड़ाई झगड़ा दंगा और फसाद,
कहीं बम चले कहीं चले गोली,
कब शांति से जीना सीखेगा जन,
आओ जलाए नफरत की होली।


सीमाओं पर बढ़ता जाए तनाव,
खून से भरी मिलती कई झोली,
शांति के दूत भी पच पचके हारे,
आओ जलाए नफरत की होली।

शाम सवेरे जहां भी जाएं मिलता,
मां बहने लगा रही खून की रोली,
कितने सुहाग उजड़ चुके जगत से,
आओ जलाए नफरत की होली।


बच्चा बच्ची रो रहे पिता खोकर,
बहनों की रो रो बंद हुई है बोली,
मिटा दो अब तो नफरत की आग,
आओ जलाए नफरत की होली।



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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Saturday, March 19, 2022

 आओ जलाए नफरत की होली
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विधा-कविता

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नफरत दिलों में भरी कूट-कूट,
मार काट करती दिखती टोली,
कब भूलेंगे ये नफरत की आंधी,
आओ जलाए नफरत की होली।

लड़ाई झगड़ा दंगा और फसाद,
कहीं बम चले कहीं चले गोली,
कब शांति से जीना सीखेगा जन,
आओ जलाए नफरत की होली।


सीमाओं पर बढ़ता जाए तनाव,
खून से भरी मिलती कई झोली,
शांति के दूत भी पच पचके हारे,
आओ जलाए नफरत की होली।

शाम सवेरे जहां भी जाएं मिलता,
मां बहने लगा रही खून की रोली,
कितने सुहाग उजड़ चुके जगत से,
आओ जलाए नफरत की होली।


बच्चा बच्ची रो रहे पिता खोकर,
बहनों की रो रो बंद हुई है बोली,
मिटा दो अब तो नफरत की आग,
आओ जलाए नफरत की होली।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
******************
* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


होली
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विधा-कविता   
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रंग गुलाल बहार लेके,घर आंगन आई होली,
रंग पिचकारी खेल रहे,भिगो रहे जमकर झोली।
रंग बिरंगे चेहरे बन गये,फाल्गुन का है त्योहार,
हर चेहरा मासूम लगता,लगता जैसे बिखरे प्यार।

बुरा ना मानों होली है,कहकर फेंक रहे गुलाल,
बच्चे,बूढ़े,नर और नारी,पिचकारी से करे कमाल।
दिल में होली जलती थी,अब झलकता है प्यार,
लाल,पीले,गुलाबी रंग,होली दुलेंडी का त्योहार।


बैर भाव अब भूल चुके,मन में उमंग उठे हजार,
नहीं कोई अब चिंता है, रंगों का होली त्योहार।
हर वर्ष आता यही है, रंग बहारों का होता पर्व,
आपस में करे दोस्ती, मन में उत्पन्न होता है गर्व।

रखना मन को खोल, वरना खुल जायेगी पोल,
हँसी खुशी गुजार लो, जिंदगी होती है अनमोल।
रंग बिखरे जाते कभी, छूट न जाये जिंदगी डोर,
सब कुछ  धरा रहता, आती है ऐसी वह भोर।।

फाल्गुन आया उमंग ले, भीगा तन मन सारा,
प्यार दिलों में ही पलता, लगता सबको प्यारा।
फाल्गुन में चहुं ओर है, नृत्य, ढफ,फाग बहार,
समय पर आकर पा लो,मिलती नहीं ये उधार।


फाल्गुन का ही शोर है,जहां भी जाये उस ओर,
कहीं फूलों में रंग चढ़ा,कहीं नाच रहे वन मोर।
देख देख हर्षा रहे है,फाल्गुन की अजब बहार,
सूने मन का न छोडऩा,हो जाएगा जनाब प्यार।।

राधा के संग श्याम, खेली थी जमकर होली,
आपस में रंग डालते, आती  थी जब टोली।
रंग पक्का था प्यार का,बेशक शरीर कहो दो,
पूरे जग में ही नाम है, कह गये जगत में वो।


नहीं कभी वो दूर थे,जगत सारा है जानता,
अमिट प्यार राधा का,जन जन यह मानता।
रंगों के त्योहार पर, बांटते थे वो सभी दर्द,
गर्मी आये या बसंत, या चलती हवा सर्द।

रंगों के त्योहार पर,राधा कृष्ण को सलाम,
सदियों तक यूं चले, जगत में हरदम नाम।।
आता है होली पर्व, भर देता है दिल उमंग,
गुलाल में सराबोर हैं, भीगे हैं तन मन रंग।


लाल, हरे, पीले हुये, चेहरे चमके आज,
खुशी दिल में भरी, छुपे हुये हैं कई राज।
तन मन सब भीगे, डाल रहे जमकर रंग,
नशे में जन झूमते, जैसे पीये हो कोई भंग।
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स्वरचित/मौलिक




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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Friday, March 18, 2022

 
                       फाल्गुनी बयार
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विधा-कविता
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फाल्गुन आया उमंग भरे,
भीग गया तन मन सारा,
प्यार दिलों में ही पलता,
लगता सबको ही प्यारा।

फाल्गुन में चहुं ओर है,
नृत्य, ढफ, फाग बहार,
समय पर आकर पा लो,

मिलती नहीं यह उधार।

फाल्गुन का ही शोर है,
जहां भी जाये उस ओर,
कहीं फूलों में रंग चढ़ा,
कहीं नाच रहे वन मोर।

देख देखकर हर्षा रहे है,
फाल्गुन की अजब बहार,
सूने मन का नहीं छोडऩा,
हो जाएगा जनाब प्यार।।
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धैर्य
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विधा-कविता   
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परीक्षा होती धैर्य की, जब मन में हो तनाव,
बात बात पर झगड़ा करते,आये मन में ताव,
शांत होकर जो जी रहे, चाहे दुख हो हजार,
इंसान के क्रोध का, बता देता है हाव भाव।


धैर्य से काम लेना, जब चलते हो बुरे दिन,
शांत भाव से बीता दो, दिनों को गिन गिन,
आपस में जब झगड़ रहे,खो जाए मन चैन,
युद्ध करते दौड़ दौड़,ज्यों बोतल का जिन।

पत्नी आये क्रोध में, धैर्य से लेना है काम,
अगर क्रोध नहीं त्यागा,अंतिम आये शाम,
क्रोध जगत में पाप है, करो कभी न भूल,
शांतभाव से जो रहेगा, घर बन जाता धाम।


पास पड़ोस के झगड़े से, रहना हरदम दूर,
धर्म कर्म पर जो चले, चेहरे पर आये नूर,
क्रोध समय में पी सदा,ठंडा सा कुछ जल,
थोड़े समय शांत रहे, होगा क्रोध चकनाचूर।

क्रोध जहां में पाप है, धैर्य धर्म का समूल,
बात बात पर नहीं पकड़ो, कोई भी है तूल,
धैर्य की परीक्षा में, अगर सफल हो इंसान,
सफल हो जिंदगी, बरना बन जायेगी शूल।

धैर्य से कोई बड़ा नहीं, कहते आये हैं संत,
बिन धैर्य के जन का,जग में जल्दी ही अंत,
धैर्य सज्जन जन को, बन सकता जग महान,
धैर्य को खोते देखे जन,तुले बात कभी तंत।


धैर्य जग में सदा रखते, सीधे सादे ही इंसान,
धीरज में रहकर सदा, देते जग जन को ज्ञान,
धैर्य आभूषण मान लो, कहाता यह आभूषण,
सहन करना पड़ता धैर्य से,मान और अपमान।

धैर्य तन में रखकर,करते रहना है शुभ काम,
तभी जहां भला कहेगा, होगा जगत में नाम,
आओ अब मन धारण करे, धैर्य रूपी शस्त्र,
अगर कभी धैर्य घट जाये, रगड़ो लेकर बाम।
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स्वरचित/मौलिक
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डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Thursday, March 17, 2022

 
                                       दोहे
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होली
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होली के दिन आ गये,खुशियां हैं चहुँ ओर।
बाग बगीचे महकते, वन में नाचे मोर।।

रंग बिरंगे चेहरे,होठों पर मुस्कान।
हँसते गाते जा रहे,होली की पहचान।।

खुशियां लेकर आ गया, होली का त्योहार।
बैर भाव सब मिट गया, बढ़ा आपसी प्यार।।

होली द्योतक जिंदगी, भर दे मन में रंग।
खुशियां पल में जब मिटे, दुख से छिड़ती जंग।।

होली के त्योहार पर, तन मन उभरे रंग।
सोच बढ़ाओ निज सदा, दुख से छेड़ो जंग।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




विषय-यकीन नहीं आता
विधा-कविता   
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यकीन की सीमाएं समाप्त हो जाये,
दिल चकित हो,जब नया कर जाये,
चहुं ओर जब ये ,खुशियां छा जाये
मन मुदित होकर, देने लगेगा दुवाएं।

कल तक जो तरसता देखा रोटी को,
आज लगा है घर में धन का अंबार,
यकीन नहीं आता ऐसा भी हो जाये,
लाइन लगाकर उसका करते दीदार।

एक बैल से करता मिला था खेती,
आज लगी है टै्रक्टरों की वो अंबार,
यकीन नहीं आता यह रामू किसान,
अब तो लोग भी उससे करते प्यार।


कभी वो कक्षा में नहीं पढ़ पाया था,
अच्छे अंकों से हो गया है आज पास,
यकीन ही नहीं होता, कैसे हुआ यह,
खुश नजर आता ,नहीं है आज उदास।

कभी होता था क्षेत्र का वो एक राजा,
आज तोड़ रहा है देख लो वो पत्थर,
यकीन ही नहीं होता, कैसे हो गया है,
माटी फांक रहा है वो, छिड़का न इत्र।


दूध दही की यहां, बहती थी नदिया,
आज पानी भी मिलता है बस मोल,
यकीन ही नहीं आता, कैसे है संभव,
कह दे अगर तो, बढ़ जाये जन बोल।

कभी भीख मांग खाता था कल तक,
आज उसके भरे हैं घर के सब भंडार,
यकीन ही नहीं होता कैसे ऐसा संभव,
दे रहे लोग उसे, जीता रहे वर्ष हजार।

भाग्य की रेखा कब करिश्मा दिखा दे,
कब भरे चौराहे पर बेइज्जति करवा दे
यकीन ही नहीं आता ऐसा भी संभव,
नहीं पता है कहां यह झोली भरवा दे।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Wednesday, March 16, 2022

                           होली
विधा-कविता
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रंग गुलाल बहार लेके,
घर आंगन आई होली,
रंग पिचकारी खेल रहे,
भिगो रहे जमकर झोली।

रंग बिरंगे चेहरे बन गये,
फाल्गुन का बड़ा त्योहार,
हर चेहरा  मासूम लगता,
हर चेहरे पर बिखरे प्यार।


बुरा ना मानों होली आई,
कहकर फेंक रहे गुलाल,
बच्चे, बूढ़े, नर और नारी,
पिचकारी से करे कमाल।

दिल में होली जलती थी,
अब झलक रहा है प्यार,
लाल,पीले,हरे,गुलाबी रंग,
होली दुलेंडी का त्योहार।


बैर भाव अब भूल चुके,
मन में उमंग उठे हजार,
नहीं कोई अब चिंता है,
रंगों का होली त्योहार।

हर वर्ष आता यही है,
रंग बहारों का हो पर्व,
आपस में करे दोस्ती,
मन में उत्पन्न हो गर्व।


रखना मन को खोल,
वरना खुल जाये पोल,
हँसी खुशी गुजार लो,
जिंदगी होती अनमोल।

रंग बिखरे जाते कभी,
छूटे जिंदगी  की डोर,
सब कुछ  धरा रहता,
आती है ऐसी भी भोर।।
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400






दिल का क्या
विधा-कविता   
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दिल का क्या,कब किस पर आ जाये,
सरे बाजार में, यह तो तमाशा दिखाये,
कभी भरी भीड़ में जन को ही हँसाये,
कभी बैठे एकांत में जन को ही रुलाये।

दिल का क्या, कब कहां नाच दिखाये,
शांत रहे कभी यह रातों को ही जगाये,
कब किस छवि को दिल में ही बसाये,
कब घोड़े बेच जन को बिस्तर सुलाये।


दिल का क्या, कब कहां झगड़ा कराये,
चलते चलते हँसाये और खिलखिलाये,
कभी बिछुड़े हुये कई दोस्तों से मिलाये,
कभी न मिलने की दे जाये बद दुआए।

दिल का क्या है,कब काबू में आ जाये,
वरना इंसान को फांसी पर ही चढ़वाये,
दिल तो आखिर दिल है, यह गीत गाये,
फूल और कलियों की छवि मन बसाये।


दिल एक बंद मुट्ठी सम,होता अनोखा,
विश्वास नहीं हो तो, दे सकता है धोखा,
खेलकूद में दिल, बच्चे जैसा बन जाता,
बड़ा मजा देता वक्त पर, मिलता मौका।

दिल का क्या कहना, तन में इसे रहना,
काबू में रखना इसे,संतों का यह कहना,
आंसू भी बहते हैं बड़े, जब लगती ठेस,
दिल के कारण कभी लफड़े पड़े सहना।


दिल का क्या हो,जब युवा बनके आये,
किसी को प्यार दे, प्यार में ही खो जाये,
कभी कसमें खाये, कभी कसमें खिलाये,
दर्द में कभी कभी दिल,देता बड़ी सजाये।

दिल का क्या है, नूरी सपने कभी सजाये,
भाग दौड़ की जिंदगी में, बेचैन कर जाये,
दिल तो आशिक मिजाज बन,मन तड़पाये,
रात दिन का चैन छीन, पल पल ये रुलाये।
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* डा. होशियार सिंह




यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Tuesday, March 15, 2022

                                       बिना बात किये

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विधा-कविता   
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बिना बात किये कभी, खुलता नहीं भेद,
भेद जगत में मानते,एकता में करता छेद,
शक्ति बनती शक्तिहीन,भेद कभी न खोल,
खोल दिये जब भेद तो,होता है बड़ा खेद।

बिना बात किये लोग, मन में बांधते गांठ,
मुंह सूजा कर लेते हैं,भूल जाते सब ठाठ,
बातें करके दुश्मन से, मिटती है मनमुटाव,
छोटी उम्र दर्द में, उम्र बना देती जन साठ।


बिना बात किये लोग, सच रहती सदा दूर,
बातों ही बातों में, मिट सकता है जन गरूर,
शांत कभी नहीं बैठिये, मिले जहां का भेद,
सुख अमन चैन से, चेहरे पर मिलता है नूर।

बिना बात किये कभी,बनाना नहीं कभी बैर,
मन में अगर बैर बने, समझो जन नहीं खैर,
भेद सारे खुल जाते, आता जब कभी सामने,
जब कभी दुख दर्द पड़े,बन सकता निज गैर।


बिना बात किये कभी,बैठे दिल में बड़ा घाव,
घात लगाकर बैठे जन, कभी चकते रहे दाव,
सोच समझकर चलना, जग होता दुख दरिया,
अच्छे अपने पूत के,पालने में ही दिखते पांव।

बिना बात किये ही, सोच बैठते बुरी सी बात,
दर्द जहां के मिल जाये, नींद नहीं पूरी ही रात,
सत्कर्मों के बल पर ही,जन का हो जाता नाम,
सारे काम पिट जाये, बुरे कभी होते हैं हालात।


बिना बात किये, नहीं होता समस्या समाधान,
हर काम बिगड़ जाये, नहीं हो पाता समाधान,
आपसी वार्तालाप से, होता है मन का भी मैल,
अच्छे जन इंसान खातिर, होते हैं दिल व जान।

बिना बात किये तो,अपने भी हो जाते सब दूर,
भरे घर में लगते सभी बुरे,मिट जायेगा तन नूर,
हँसते गाते जो रहते हैं, बन जाते हैं सभी काम,
नम्र बनकर रहना चाहिए, नहीं करना है गरूर।।

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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400








Monday, March 14, 2022

              कुछ यादें अक्सर

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विधा-कविता   
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कुछ यादें अक्सर, छोड़ जाती अमिट छाप,
भुला नहीं पाते जीवनभर,जन जाते हैं भांप,
यादों के सहारे कट जाती है पूरी ही जिंदगी,
खूबसूरत हसीं दिनों को करते रहते हैं जाप।

कुछ यादें अक्सर,रह रहकर आती रहे याद,
कभी हँसते रहते थे, कभी करते थे फरियाद,
दिल को तड़पा जाती है, यादों के सुंदर पल,
कभी कभी ये यादें ही,बन जाती हैं बुनियाद।


कुछ यादें अक्सर, ख्वाबों में यूं बस जाती हैं,
एकांत जीवन में यादें मन को ही तड़पाती हैं,
यादें कभी कभी दे जाती है बड़ा भारी कष्ट,
यादें आती हैं, सताती हैं और चली जाती हैं।


कुछ यादें अक्सर,बचपन की याद दिलाती हैं,
तितली सम उड़ते फिरते भूख नहीं सताती है,
यादों को छोडऩा, इंसान के लिए होता कठिन,
कुछ यादें मन में तो कुछ दिल में बस जाती हैं।

कुछ यादें अक्सर, दे जाती जन को ही धोखा,
क्या जमाना होता था, लोग देखते थे वो मौका,
यादों को दिल में बसा,सारी उम्र लेते हैं गुजार,
यादें जब जहन में बस जाये, रंग आता चौखा।

युवा समय की यादें, अनमोल धरोहर होती है,
कलियुग का जीवन देख,यादें ही बड़ी रोती है,
यादों को दिल से निकालना, नहीं हो आसान,
यादें तो जिंदगी में भी, नये बीज कभी बोती हैं।

बुढ़ापे में यादें, महज बन जाती हैं एक सहारा,
कभी कोई याद बुरी हो,यादों में आ जाए प्यारे,
यादें मौत के बाद भी,लोगों के जुबान पर आये,
अरदास प्रभु,यादें एक बार दिल में आये हमारे।


यादें हर इंसान के जहन में रंगी बसी मिलती हैं,
यादों के सहारे ही, मन की कलियां खिलती हैं,
यादों को कह दो सदा मन को यूं तड़पाती जायें,
दिल में बसी हैं यादें , दिल से नहीं हिलती हैं।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Sunday, March 13, 2022

                        शकुन 

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विधा-कविता
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सुंदर जग की बात चले,
जन मिलते शकुन हजार,
बस जग में यूं बढ़ता रहे,
जन जन में ही एक प्यार।

जब मात पिता साथ दे,
शकुन दिल को मिलता,
आशीर्वाद सिर पर सदा,
लंबी उम्र का ही खिलता।


दोस्त मिले वर्षों के बाद,
आती थी जिनकी यूं याद,
शकुन जहां के मिल जाये,
प्रभु से करते हम फरियाद।


धन दौलत सुख मिल जाये,
भाई बांधवों का मिले प्यार,
शकुन जहां के मिल जाएंगे,
दिल गदगद हो हजार बार।

लंबी उम्र जीकर जगत से,
बड़े शान से रुखसत होते,
शकुन हर इंसान मिलता,
याद में उनकी कितने रोते।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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 होशियार सिंह यादव
कनीना, वार्ड नंबर 01,
 मोहल्ला-मोदीका
जिला-महेंद्रगढ़ हरियाणा





फोन-94163 48400

Saturday, March 12, 2022


                          आई रुत सुहानी

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विधा-कविता
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फाग महोत्सव मना रहे,
मचा हुआ जगत में शोर,
रुत सुहानी आ गई अब,
पवन करें मन को विभोर।

ढफ और ताशें बज रही,
होली मिलन गांव गली,
नहीं सर्दी नहीं अब गर्मी,
बागों में खिलती हैं कली।


मस्ती में झूम रहे हैं जन,
फसल पकी काटेंगे लोग,
दुलेेंंडी का रंग उड़ रहा है,
पकवानों का लगाते भोग।


मेले लगे हैं शहर व गांव,
कहीं कौवे करे कांव कांव,
इंसान की जिंदगी दो पल,
नहीं पता कब डूबेगी नाव।


होलिका दहन की तैयारी,
प्रिय की प्रियतमा है प्यारी,
मिलते छुपकर नर व नारी,
मोहनी मूरत लगती न्यारी।

चेहरों पर  खुशियां छाई,
लो अब रुत मिलन आई,
बैर-भाव का त्याग करो,
दोस्ती हर जन को लुभाई।

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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Friday, March 11, 2022

                       मन की बातें

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विधा-कविता   
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मन की बातें, हो बड़ी मतवाली,
कभी दिन होते,कभी रातें काली,
गति मन की,नहीं जाएगी खाली,
जन तन का वो कहलाता माली।

मन की बातें, मन ही सदा जाने,
आम आदमी  उन्हें कब पहचाने,
मन अपना हो, नहीं मिले बेगाने,
स्वच्छंद चलता रहे,न सहता ताने।


मन मंदिर सम, बताया है जग में,
पूजा होती है, बस इसकी तन में,
मन पर काबू रखना सदा चाहिये,
वरना हर वक्त दुख दर्द ही पाइये।

मन चंचल जन का जब मिलता,
नया नजराना हरदम ही खिलता,
मन के आगे कितने गये हैं हार,
मन मरवा दे, कभी कर दे उद्धार।


सच्चे कर्म मन से सदा ही करना,
पाप कर्म, अहित से सदा डरना,
सचाई की राह कभी मन दिखाये,
तन खुश मिले,जब खुश हो जाये।

मन की बातें, मन में मत रखना,
सुख दुख का सब स्वाद चखना,
मन कर सकता, जन को बेचैन,
हँसे या रोये, निस दिन ये नयन।


मन से करना कभी कोई दोस्ती,
स्वार्थ को मन से, रखना यूं दूर,
दोस्ती भली हो,नहीं करो गरूर,
दोस्ती अपनों की, प्रेम हो जरूर।

लो महकाये, निज इस मन को,
नहीं सताये, अपने इस तन को,
आगे एक दिन मन खुद कहेगा,
दिल की बातें हैं,दिल में रहेगा।

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स्वरचित/मौलिक





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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
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Thursday, March 10, 2022

               आंखों को मिला क्या

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विधा-कविता   
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देख रहे अत्याचार जन, शब्द रहे नहीं बोल,
आंखें खुली होकर देखे,भेद रही सभी खोल,
इस जग में आंखें सदा, तराजू सम रही तोल,
शुभ कर्म कर ले सदा,कहलाते बस अनमोल।

अत्याचारों को देखकर, आंखें रहती हो शांत,
उन आंखों को क्या मिले,रखती नहीं हो मान,
रो रहे हो बाल,नारी, सहते रहे जन देख देख,
जीना नहीं हो इंसान का,पीते रहे जो अपमान।

आंखें ही होती जहां में, रखती जर्रे पर नजर,
कभी अपनों पर रखे, कभी नजरें टिकती घर,
रास्ते में कांटे पड़े हो,चलना हो जायेगा दुभर,
अपमानों को सहकर जीये, क्या जीना है नर।

शांत भाव से सहते बुराई,वो भी हो अपमान,
नहीं कोई बदला लेता, वो होता जग अज्ञान,
पाप बुराई से बचाता,  वो होता है बड़ा दान,
अपने सत्कर्मों के बल पर, बनती है वो शान।

आंखों को मिला क्या, जिसने देखा जग पाप,
उन आंखों का क्या जीना, देते देखे जन श्राप,
जीवन से मृत्यु तक जन,क्या क्या जग देखता,
स्वर्ग की राह मिले,कर लेना प्रभु का ही जाप।

आंखों को मिला क्या, जब देखे दर्द में इंसान,
दूसरे के दर्द उठा ले, वो कहलाता जग महान,
आया है जग में इंसान,करने को कोई सत्काम,
लूटपाट,धोखे,फरेब करे, वो जगत में है अज्ञान।

लाख छुपाये पता लगेगा, ये आंखें बता देती हैं,
कितने ताने बाने बुनती,कितने ही कष्ट सहती है,
आंखों को मिला क्या,जो सहकर कष्ट खत्म हो,
अपनों पर अन्याय कभी हो, पल पल बहती है।

आंखों को मिला क्या, प्यार दुलार से रहती दूर,
उन आंखों का नाम नहीं, जिनमें नहीं होता नूर,
आंखें तो शोभा देती जब, कहलाती हो कोई हूर,
आंखों में बसता जीवन,करना नहीं कभी गरूर।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
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