Saturday, December 21, 2019

                                   भैया दूज
पिता जी-मैं अपनी बहन से मिलने जाना चाहता हूं। हमारे शिक्षक बता रहे थे कि भैया दूज के दिन बहन अपने भाई का इंतजार करती है और भैया दूज पर्व सचमुच बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा देता है, रामू ने पूछा।
रमेश ने उत्तर दिया-बेटा, तुम्हारे तो बहन ही नहीं है।
....तो फिर मुझे मौत से डरना होगा, रामू ने रुआसे चेहरे से कहा।
रमेश ने बड़े अचरज से पूछा-ऐसा क्या कह रहे हो बेटा।
रामू ने उत्तर दिया-हमारे शिक्षक कह रहे थे कि जो भैया दूज को अपनी बहन के दर्शन करके यमुना नदी में गोता लगाता है उसे यमराज एवं मौत की कोई चिंता नहीं है किंतु अब समझ आया कि बहन अभाव में तो मेरा जीवन एवं प्राण संकट में पड़ सकते हैं।
पिता पुत्र को दिलासा दे रहा था कि ऐसा कुछ नहीं है। देखना तेरी जिंदगी में अनेकों खुशियां आएंगी। ....पर पिता की बात उनके गले से नहीं उतर रही थी।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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