अत्याचार
बढ़ गए अत्याचार यार
अब कैसे जीवन जीएंगे
जहर गमों का घोलकर
शेष जिंदगी निज जीएंगे,
कहीं अत्यचार गरीब पे
होते नारी पर अत्याचार
कहीं मार काट चल रही
दम तोड़ता मां बाप प्यार,
भाई भाई लड़ रहे है ज्यों
भारत पाक का होता युद्ध
बेटी मां पर सितम ढहाए
बेटा बाप पर होता क्रुद्ध,
आजाद देश के नागरिक
फिर भी ना लगते आजाद
क्यों देश आजाद किया है
देशभक्तों की सताती याद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
धौंस
मासूम बच्ची कायल थी। आज उसके लिए धरा छोटी नजर आ रही थी और सामने दरिंदा अधिकारी होने की धौंस जमा रहा था। दुष्कर्म करके बच्ची के सामने खड़ा इस प्रकार की बातें कर रहा था और कोई उसके खिलाफ आवाज तक नहीं उठा रहा था। तभी सामने खड़े एक युवक ने साहस करके तथाकथित अधिकारी की शिकायत थाने तक कर दी। तथाकथित अधिकारी पुलिस ने गिरफ्तार क्या किया शिकायतकर्ता को जमकर पिटवा दिया। अस्पताल में पड़ा युवक कह रहा था-बेशक जान जाए किंतु ऐसे दरिंदों के विरुद्ध आवाज नहीं उठेगी तब तक न जाने कितने मासूमों की आवाज दफन होती रहेगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से....
धूप खिली चिलचिलाती
फिर क्यों न मन हो खुश
धूप सेक ले इस सर्दी में
क्यों बैठे हो दूर हो नाखुश।
ताऊ बोला ताई से.......
बहुत दिन सर्दी के बीते हैं
अब मन हो गया उदास है
कभी तो दिन बदल जाएंगे
दिल बदलने की आश है,
बसंत ऋतु जब लौट आए
मन हो जाए तब प्रसन्न
उमंग भरेगी भंवरे की गूंज
खुश हो जाए तन और मन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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