Tuesday, January 21, 2020

सुर ताल 
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देश मेरा सुरीला है
यहां गाए  सुरताल
वक्त ने बदल दी है
सारे जग की चाल,
भैस, गाय व कुत्ता
गाते हैं सारे सुर में
शेर, शेरनी, गीदड़
बसते  निज घुर में,
मोर,कबूतर,  तोता
सुरताल में गाते हैं
सांप, गोह, बिच्छू
क्रोध में   आते हैं,
वीरों की धरती पर
फांसी सुर में खाई
आजादी देकर रहे
कसम उन्हें उठाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


खाना 

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बच्चे को दूध से नफरत करता देख मां ने कहा-बेटा, देखो, हमने कभी बेहतर भोजन नसीब नहीं हुआ। गरीबी ने हमें मारकर रख दिया किंतु अब तो घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं है फिर तुम दूध से नफरत कर रहे हो। हमने अगर कुछ पीने को मिला तो वो दूध था। कितना बदलाव आ गया। जो कभी नसीब नहीं थी वो अब नसीब हो रही है। युवा फिर भी इनसे मुंह मोड़ता  है। कैसी विडंबना है।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


स्रोत

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सूर्य, हवा और पानी
कहाए ऊर्जा के स्रोत
मिटने न पाए ये सारे
चलती रहे  यह जोत,
सूर्य करोड़ों वर्षों का
करोड़ों वर्षों तक रहे
आसमान यूं चमकेगा
अलविदा  नहीं कहे,
वायु कभी नहीं मिटे
यही  हमारी अर्चना
वायु प्रदूषण की सदा
करते रहो यूं भ्रत्सना,
बचाओ इनको आज
कल सुनहरा हो जाए
जीवन यूं  ही चलेगा
इन्हें दूर नहीं भगाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




खाएंगे 

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गणतंत्र दिवस आया
पर्व अपना  मनाएंगे
संविधान निर्माता को
सीने से हम लगाएंगे,
इस दिन से पहले ही
स्वतंत्रता   हमें मिली
उस  दिन से  मन की
सारी  कलियां खिली,
कुर्बानी दी देशभक्त ने
उसे कभी  न भुलाएंगे
भगत सिंह  जैसे  वीर
फांसी पर  चढ़ जाएंगे,
आओ करे शहीदों को
निज दिल से अब याद 
उनका नाम  जगत  में
चमकता रहे वर्षों बाद।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




 

 

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