Friday, January 17, 2020

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  • Suresh Yadav मोबाइल के ही जरिये आपके दरशन हुये।लोगो के विचारो मे भी खूब यहा घरशन हुये।
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छुईमुई
छुईमुई- मुझे मत छूओ, संवेदी पौधा, शर्मीला पौधा, सोने वाला पौधा, लाजवंती आदि कई नामों से जाना जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे मिमोसा पुडिका नाम से जाना जाता है। रात को पत्ते सो जाते हैं और दिन को खुल जाते हैं। आंधी, छूने, हिलाने, गर्मी आदि से भी पत्ते किसी नुकसान से बचाने के लिए बंद हो जाते हैं। यह फलीदार एवं कांटेदार शाक होती है। हवा की नाइट्रोजन को अवशोषित करने वाले जीवाणु इसकी जड़ों में पाए जाते हैं। इसके पत्ते कट लगने पर, जोड़ों के दर्द, पत्तों का जूस शूगर के इलाज में, बदहजमी, पीलिया, पेट के कीड़े, जड़ दांत के दर्द में, जहरीले कीट काटने पर पत्तों का रस लगाकर, उच्च रक्तचाप को दूर करने आदि कई बीमारियों में काम आता है। लिनियस वैज्ञानिक ने 1753 में इसका नाम पहली बार रखा था।
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भांखड़ी
इस वक्त जंगलों एवं खेल के मैदानों आदि में भांखड़ी बहुत अधिक मिलती है। पीले फूल एवं कांटे वाला फल इसकी पहचान है। इसे ट्राइबुलस टेरेस्ट्रीज नाम से जाना जाता है। इसे डेविल आई, बिंदिया, छोटा गोखरू , कैट्स हैड आदि कई नामों से जाना जाता है। यह करीब तीन हजार वर्ष पुराना औषधीय क्रीपर है। यह पुरुषों में टेस्टीस्टीरोन सेक्स हार्मोन बढ़ाने वाली(अभी और भी शोध जारी), हृदय संबंधित रोगों से बचाने वाली, लिवर, तनाव घटाने,गुर्दे की क्रियाशीलता बढ़ाने आदि के काम आती है। ऊंट इसे बहुत चाव से खाता है। पंसारी के छोटा गोखरू नाम से मिलती है। याद रहे बड़ा गोखरू इससे अलग होता है। फल पकने पर भारी संख्या में कांटे बन जाते हैं जो पैरों में लगने पर कष्ट पहुंचाते हैं। हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ के गांवों में बहुतायत में मिलती है।
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कंटीली चौलाई
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा में बारिश के बाद कंटीली चौलाई की भरमार है। इसे अमरंथस स्पाइनोसस नाम से जाना जाता है। चौलाई कुल से संबंधित है जिसे लोग सब्जी के रूप में तथा पशुओं का दूध बढ़ाने के काम में लेते हैं। जब इस पौधे पर बीज बनते हैं तो भारी मात्रा में कांटे लग जाते हैं। यह पौधा आजकल सड़क किनारे, रेलवे पटरी के पास तथा खेतों में भारी मात्रा में खड़ा है। यह कई औषधियों में काम आता है। गनोरिया, बुखार, रक्त कमी, मूत्र विकार, फोड़े एवं पेट के विकार दूर करने के काम आता है। कुछ लोग इसे ही चौलाई के रूप में खाते हैं जबकि यह चौलाई नहीं है।
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सेमल
रेड काटन ट्री, सेमल विशाल पौधा होता है जो यहां तहां खड़ा मिलता है। सुआ सेमल कहावत इसके फलों पर लागू होती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे बोम्बैक्स सीबा नाम से जानते हैं। इसके बड़ा लाल फूल लगता है जिसकी सब्जी बनाते हैं वहीं फूल को सूखाकर इसकी चाय बनाकर पीने से लाभ होता है। इसके फल से रूई निकलती है जो अति मखमली होती है जो तोशक आदि भरने के काम आती है। लिकोरिया, रक्त शोधन, फोड़ा फुंसी के इलाज में काम आता है। जड़ खांसी जुकाम में तो छाल घावों पर लगाने से आराम मिलता है। यह यहां तहां पार्क, नहर के किनारे, सड़क मार्ग के किनारे खड़े मिलते हैं।
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गन्ना
बहुवर्षीय पौधा जिससे गुड़ व चीनी बनती है गन्ना कहलाता है। इसे सेकेरम आफिसिनेरम नाम से जाना जाता है। किसी कार्य के शुभारंभ में मुंह मीठा किया जाता है। आयुर्वेद भी यही कहा गया है। पत्थर के कोल्हू का प्रमाण राजस्थान में सबसे पुराना है। गन्ने से गुड़, चीनी, खांडसारी, मिश्री, गुड़ राब, शक्कर आदि बनाए जाते हैं। मिठास जीवन का आधार है। अगर मिठास नहीं होता तो जीवन अधूरा होता। मुहावरे एवं लोकोक्तियां भी गुड़ एवं मिठास पर बनी हैं।

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