काला तिल
बाजरे की फसल के साथ काला तिल अपने आप उगा हुआ है। इसे सिसेमम इंडिकम नाम से जाना जाता है। तैल शब्द की उत्पत्ति भी तिल से हुई। टोटकों में काले तिल सबसे अधिक प्रयोग किए जाते हैं। सफेद तिल की बजाय काला तिल अधिक गुणकारी माना जाता है। फूलों का रंग काला, पीला, सफेद, बैंगनी आदि होता है। बुद्धि बढ़ाने, बार बार पेशाब की आदत कम करने जैसे लाभ हैं। दान पुण्य करना, तर्पण, देवी देवताओं को अर्पित करने के लिए लोग तिल प्रयोग करते हैं।
बाजरे की फसल के साथ काला तिल अपने आप उगा हुआ है। इसे सिसेमम इंडिकम नाम से जाना जाता है। तैल शब्द की उत्पत्ति भी तिल से हुई। टोटकों में काले तिल सबसे अधिक प्रयोग किए जाते हैं। सफेद तिल की बजाय काला तिल अधिक गुणकारी माना जाता है। फूलों का रंग काला, पीला, सफेद, बैंगनी आदि होता है। बुद्धि बढ़ाने, बार बार पेशाब की आदत कम करने जैसे लाभ हैं। दान पुण्य करना, तर्पण, देवी देवताओं को अर्पित करने के लिए लोग तिल प्रयोग करते हैं।
बड़ा गोखरू
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा के जंगलों एवं असिंचित भूमि पर इस वक्त बड़ा गोखरू जिसे पेडालियम मुरेक्स नाम से जाना जाता है भारी मात्रा में खड़ा है वहीं छोटा गोखरू जिसे भाखड़ी कहा जाता है पर्याप्त मात्रा में खड़ा है। छोटा गोखरू को ट्राइबुलस टेरेस्ट्रीस नाम से जाना जाता है। छोटा गोखरू ऊंटों को खिलाया जाता है जबकि बड़ा गोखरू मूत्र विकार, गुर्दे के रोग दूर करने तथा शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए लड्डू बनाकर खाया जाता है। आयुर्वेद में इसे शरीर में ठंडक देने वाले, भूख बढ़ाने तथा खून साफ करने आदि के काम में लाया जाता है।
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा के जंगलों एवं असिंचित भूमि पर इस वक्त बड़ा गोखरू जिसे पेडालियम मुरेक्स नाम से जाना जाता है भारी मात्रा में खड़ा है वहीं छोटा गोखरू जिसे भाखड़ी कहा जाता है पर्याप्त मात्रा में खड़ा है। छोटा गोखरू को ट्राइबुलस टेरेस्ट्रीस नाम से जाना जाता है। छोटा गोखरू ऊंटों को खिलाया जाता है जबकि बड़ा गोखरू मूत्र विकार, गुर्दे के रोग दूर करने तथा शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए लड्डू बनाकर खाया जाता है। आयुर्वेद में इसे शरीर में ठंडक देने वाले, भूख बढ़ाने तथा खून साफ करने आदि के काम में लाया जाता है।





























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