विवाह शादी कविता
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भाग दौड़ करते शादी
फिर आती आजादी
मां बाप का भूला देते
खुद की करते बर्बादी,
बहु बेटा निज धुन में
खूब करते पैसे बर्बाद
खुद तो होटल में जाए
मां बाप ना आते याद,
जिसने उन्हें पाला था
उनसे हो जाते वो दूर
बहु से घुटके हो बातें
बेटे को हो जाए गरूर,
तड़पकर मां बाप जाते
उनको पल में दे भुला
दान दक्षिणा फिर बांटे
कैसे हो उनका भला।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
विवाह शादियां बढ़ गई
अच्छे धोती कुर्ता लाओ
जब कभी शादी में जाते
ये वस्त्र पहन के जाओ।
ताऊ बोला ताई से.......
तुम्हारे लिए लाऊ साड़ी
अपने लिए कुर्ता-धोती
एक गले का हार लाऊ
जिसमें जड़ा होगा माती,
दोनों मिलकर जाएं हम
नाम हो जाए दूर दराज
सपने हमारे पूरे हो जा
आए ताऊ ताई का राज।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
शर्त
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खाना खाकर बाहर दुकान की ओर निकले तो शर्मा जी से उसके साथी ने पूछा-कुछ मीठा खाओगे। शर्मा जी के हां कहने पर साथी ने एक प्लेट में गाजर पाक मंगवा दिया जिसे शर्मा जी चट कर गए। शर्मा जी के साथी की निगाहें फटी की फटी रह गई। फिर तो शर्मा जी के साथी ने शर्मा जी से और कुछ खाने के लिए नहीं कहा वहीं कोई उससे शर्त तक लगाने को तैयार नहीं होता था। सभी को पेटू होने का पता लग गया था। कोई भी सुनता दांतों तले अंगुली दबा लेता।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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