खरीफ
फसल में पैदा होने वाली श्रीआई, चौलाई तथा रबी फसल में होने वाला बथुआ
लुप्तप्राय हो रहे हैं। ये प्राकृतिक शाक खून बढ़ाने में तथा विभिन्न
स्वास्थ्य समस्याओं में कारगर होने के साथ साथ भाजी, कढ़ी, खाटा का साग आदि
कई जायकेदार सब्जियों के आधार सिमटकर रह गए हैं। ये विटामिन एवं खनिज लवण
के बेहतर स्रोत होते हैं। देखे चौलाई---
कनीना
एवं आस पास गांवों में आम भी सफलतापूर्वक पैदा कर दिखाया है। कनीना मंडी
से भीम सिंह ट्रंक हाउस, राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह कनीना, सिहोर वाटर
पंप तथा धनौंदा वाटर पंप के अतिरिक्त कई अन्य स्थानों पर आम को न केवल पैदा
किया अपितु पेड़ पर पकाकर भी रेतीले क्षेत्र में नाम कमाया है।
केसर
की खेती अब स्वप्न नहीं रही अपितु जिला महेंद्रगढ़ के कनीना उपमंडल के
गांव ढ़ाणा, नांगल मोहनपुर, चेलावास एवं भडफ़ गांवों में बेहतर केसर उगाकर
पैदावार ली जा रही है। ठंडे प्रदेशों की केसर गर्मी एवं रेतीली जमीन में
उगाकर किसान सचमुच कमाल कर रहे हैं।































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