Thursday, January 09, 2020

किसे सुनाऊं------कविताएं/लघु कथा *********************************************
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किसे सुनाऊं
दर्द सने में है मेरे
कैसे किसे सुनाऊं
प्रभु से मिलना है
कैसे चलके जाऊं,
मंजिल मेरे  पास
कैसे कदम बढ़ाऊं
अपने सीने दर्द मैं
कैसे किसे बताऊं,
जीना  चाहता  हूं
पर जी नहीं पाऊं
रोगों ने घेर लिया
कैसे किसे हंसाऊ,
मां सरस्वती कृपा
मैं हंसता ही जाऊं
देवी लाज  रखना
आज शीश नवाऊं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


रिश्वत
राजू ने हाथ जोड़ते हुए अधिकारी से कहा-साहब, पांच लाख रुपये की जमीन ली है। इसकी रजिस्ट्री कर दो। मैं आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगा। मैं बिश्वेदार बन जाऊंगा।
अधिकारी ने क्रोध में आकर कहा-तुम्हें बार बार समझा दिया है कि एक लाख रुपये लगेंगे किंतु तुम मानते ही नहीं। अगर यह राशि दे सको तो कल आ जाना वरना समय बर्बाद मत करो।
परेशान एवं रोते हुए राजू ने एक लाख रुपये कहीं से उधार लेकर रिश्वत देकर अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवाई। वो कहता ही जा रहा था-दुख की बात है कि भारत देश में रिश्वतखोरी मिटाना मुश्किल है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




 ताई ताऊ संवाद
ताई बोली ताऊ से................
रिमझिम रिमझिम बरसे
मौसम में है  ठंड बहार
जाड़े में  जीना मुश्किल
रजाई से अब करो प्यार।
ताऊ बोला ताई से...........
सर्दी भी बेहतर होती है
गर्मी के अपने  होते रंग
बसंत ऋतु के देख नजारे
रह जाते जन जीवन दंग,
ठंड में मकर संक्रांति पर्व
लेकर आता  भीष्म  याद
ऐसा महापुरुष फिर जन्मे
करते हैं प्रभु से फरियाद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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