Wednesday, January 29, 2020

Write a comment...





गुलाब इस धरा पर सदियों से कितने ही कवियों, लेखकों एवं इंसानों के मन को भाव विभोर करता आ रहा है। वैज्ञानिक नाम रोजा है जिसकी अनेकों प्रजातियां पाई जाती है। इसमें एंटी आक्सीडेंट, विटामिन ए,सी,डी,ई आदि मिलते हैं। यह एंटी आक्सीडेंट, एंटी सेप्टीक, एंटी बेक्टिरियल का काम करता है। इसे रोज जल, रोज आयल, रोज सेंट के रूप में काम में लेते हैं। गुलाब के फूलों की चाय लिवर, गले के रोग में, गुलाब जल आंखें धोने, पत्तों का जल बदहजमी, मोतीझरा, गुलाब तेल कई रोगों के इलाज में, गुलकंद आदि बनाने के काम में लाया जाता है। फूल माला एवं देवताओं पर भी अर्पित करते हैं। इसके अलावा भी कई उपयोग हैं। गुलाब एक झाड़ी के रूप में मिलता है।
Write a comment...





हरी मिर्च खाने से विटामिन सी, विटामिन ए,एंटी आक्सीडेंट प्राप्त होते हैंवहीं खून में चीनी की मात्रा को घटाने में कारगर है। विटामिन मसूडों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। मिर्च में पाया जाने वाला कप्सेसीन प्रास्टेट एवं फेफड़ों के कैंसर को होने से रोकता है वहीं शरीर कृमि रहित बन जाता है। इसमें मिलने वाले फाइबर पाचन क्रिया को स्वस्थ रखते हैं। यह शूगर के मरीजों के लिए बेहतर होती है। ऐसे में हरी मिर्च का प्रयोग कई लाभ भी देता है।
Write a comment...





Write a comment...





Write a comment...





Write a comment...





समस्त फेसबुक से जुड़े साथियों,
ऋषि मुनियों की धरा पर युगों से औषधीय पौधों विभिन्न रोगों का उपचार होता आया है। ये औषधीय पौधे हमारी अमूल्य धरोहर है। इंसान को इन पेड़ पौधों की रक्षा करने का प्रण लेना चाहिए न कि उन्हें तोड़कर या काटकर नष्ट करना चाहिए। यदि इन पौधों को नष्ट किया जाएगा तो जीवनदायिनी एवं प्राणप्रद आक्सीजन समाप्त होगी ही साथ में ऋषि मुनियों की जड़ी बूटियां एवं औषधियां धरा से लुप्त हो जाएंगी और उन्हें रेड डाटा बुक में लुप्त प्रजाति एवं लुप्त होने की कगार पर प्रजाति मे...
See More
बेलगिरी का वजन अलग अलग होता है किंतु उन्हाणी के पास नेता कंवरसिंह कलवाड़ी के यहां फार्म पर दो दो किग्रा तक के बेलगिरी देखे जा सकते हैं। बावल कृषि विवि से यह वैरायटी लाकर लगाई हुई है जो छोटा पेड़ ही फलों से लद जाता है।
Write a comment...





बेलपत्र जिसे बेलगिरी, ऐगल आदि नामों से पुकारते हें गर्मी भगाने व पेट के रोगों के लिए रामबाण माना जाता है। गर्मियों में इसका जूस पीना पसंद करते हैं। बेलगिरी मोटापा, डायरिया, बहरापन, आंखों के रोगों में भी काम में लाया जाता है। इसके तीन पत्ते साथ जुड़े होते हैं और शिवभोले पर सोमवार एवं शिवरात्रि पर अर्पित किए जाते हैं।
Write a comment...





Write a comment...





Comments
  • Mahavir Pahalwan Baghot गुरु जी आप ने तो कमाल की बात लिख दी है आप जैसा पत्रकार हजारो में कोई मिलता है
Write a comment...





पानी रे पानी तेरा रंग कैसा-बर्फ में ढाल दो तो बर्फ जैसा। दो फोटो बोतलनुमा दिखाई दे रही हैं जो बर्फ की बनी हुई हैं। बेचारा पानी ठोस, तरल, गैस रूप में भिन्न भिन्न आकारों में इंसान के हाथों ढल जाता है। वास्तव में यह पानी की बोतल फ्रिजर में रखने से बहुत कम ताप पर जमकर बोतल फट गई और बचा बोतल का प्रतिरूप।
Write a comment...





पानी रे पानी तेरा रंग कैसा-बर्फ में ढाल दो तो बर्फ जैसा। दो फोटो बोतलनुमा दिखाई दे रही हैं जो बर्फ की बनी हुई हैं। बेचारा पानी ठोस, तरल, गैस रूप में भिन्न भिन्न आकारों में इंसान के हाथों ढल जाता है। वास्तव में यह पानी की बोतल फ्रिजर में रखने से बहुत कम ताप पर जमकर बोतल फट गई और बचा बोतल का प्रतिरूप।
Comments
  • Mahavir Pahalwan Baghot गुरु जी को प्रणाम बहोत बढ़िया लिखा है जी
Write a comment...





कनीना में प्रेक्टिस कर रहे डा वेदप्रकाश के घर पर उनकी पत्नी द्वारा आंगन में यूं तो सेब, आम, अमरूद एवं कई अन्य फल लगे हुए हैं किंतु आडू के पौधों पर फल अधिक लगने से टहनियां टूट रही हैं। उनके घर आंगन के आडू देखे फोटो में।
Comments
Write a comment...





जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में कक्षा छह वर्ष 2015 में चयनित बच्चों के नाम 641 Jaipur Haryana 07 Mohindergarh 09 04 02 J04064 AARYAN UD URBAN DISABLE SEAT
642 Jaipur Haryana 07 Mohindergarh 09 01 02 N00737 PREETI UD URBAN DISABLE SEAT
643 Jaipur Haryana 07 Mohindergarh 09 02 01 A00802 KUSAHL UO URBAN OPEN SEAT
644 Jaipur Haryana 07 Mohindergarh 09 04 01 A03622 YOGESH KUMAR UO URBAN OPEN
645 Jaipur ...
Continue Reading
ये कोई कचरी या कचरा नहीं, खरबूजा या तरबूजा नहीं हे अपितु ये कभी ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों में अपने आप पैदा होने वाले फल इंद्रायण या जिसे गरबूंदा, गरमुंडा आदि नामों से जाना जाता है। अति कड़वे फल पशु हो या इंसान उसके पेट के रोगों को दूर करने के लिए काम आता है। पेट के दर्द की फांकी में यही मिला होता है। अनाज की पैदावार की भूख ने इनकी तबाही ला दी है। राजस्थान के क्षेत्रों में आज भी मिलते हैं।
Write a comment...





एक जमाने में किसानों का मधुर फल झींझ होती थी जो खेजड़ी या जांटी के पेड़ पर लगे पौष्टिक फल सांगर के सूख जाने के बाद बनती थी। आज या तो बहुत कम झींझ बनती हैं या फिर बच्चे एवं जवान इन्हें खाने की बजाय दूर फेंकते थे। आज लोग कहते सुने हैं कि इसको खाने से रोग हो जाएंगे। इसकी कीमत 90 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों के सानिध्य में जाकर पता करने से लग सकता है। देखे फोटो में झींझ।
Write a comment...





Write a comment...





Write a comment...





Comments
  • Mahavir Pahalwan Baghot गुरु जी को मेरी तरफ से चरण वन्दना जी
Write a comment...





Write a comment...





Write a comment...





Write a comment...





No comments: