नूणखा
नूणखा/पर्सले महेंद्रगढ़ जिला के खेतों में खरीफ फसल के साथ बारिश के बाद भारी मात्रा में पैदा होता है जिसे पार्टूूलाका ओलेरेसी नाम से जाना जाता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में ओमेगा-3 पाया जाता है जो हृदय के लिए रामबाण है। यह सलाद के रूप में नमकीन होने के कारण खाया जाता है वहीं खाटा का साग बेहतर जायका देता है। विटामिन एवं खनिज लवण भरपूर, बिच्छू घास से अलग होता है जिसके पीले फूल एवं गोल फल लगते हैं। बेहतर सलाद एवं रोग निरोधी शाक है।
नूणखा/पर्सले महेंद्रगढ़ जिला के खेतों में खरीफ फसल के साथ बारिश के बाद भारी मात्रा में पैदा होता है जिसे पार्टूूलाका ओलेरेसी नाम से जाना जाता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में ओमेगा-3 पाया जाता है जो हृदय के लिए रामबाण है। यह सलाद के रूप में नमकीन होने के कारण खाया जाता है वहीं खाटा का साग बेहतर जायका देता है। विटामिन एवं खनिज लवण भरपूर, बिच्छू घास से अलग होता है जिसके पीले फूल एवं गोल फल लगते हैं। बेहतर सलाद एवं रोग निरोधी शाक है।
प्याज
एक कंद है जिसे एलियम सेपा नाम से जाना जाता है। इसकी पत्तियां भोजन इक_ा कर लेती ह जिन्हें खाया जाता है। यह सब्जी, अचार, सलाद, मसाले के रूप में काम आती है। इसमें उडऩे वाला वाष्प बनने वाला तेल होता है जिसे एलाइल प्रोपाइल डाइसल्फाइड नाम से जाना जाता है जो उड़कर आंखों में अश्रु ले आता है। इसी के कारण तीखी गंध होती है। इसमें लोहा, कैल्शियम एवं विटामिन मिलते हैं जो रक्त बढ़ाने, भूख बढ़ाने बल, तेज एवं काम को बढ़ाने के काम आती है। प्याज दर्जनों रोगों में लाभकारी है। प्याज में जड़, जना एवं पत्ती मिलती हैं। नीचे से काटकर फेंकते हैं वो जड़ एवं छोटा सा तना होता है।
एक कंद है जिसे एलियम सेपा नाम से जाना जाता है। इसकी पत्तियां भोजन इक_ा कर लेती ह जिन्हें खाया जाता है। यह सब्जी, अचार, सलाद, मसाले के रूप में काम आती है। इसमें उडऩे वाला वाष्प बनने वाला तेल होता है जिसे एलाइल प्रोपाइल डाइसल्फाइड नाम से जाना जाता है जो उड़कर आंखों में अश्रु ले आता है। इसी के कारण तीखी गंध होती है। इसमें लोहा, कैल्शियम एवं विटामिन मिलते हैं जो रक्त बढ़ाने, भूख बढ़ाने बल, तेज एवं काम को बढ़ाने के काम आती है। प्याज दर्जनों रोगों में लाभकारी है। प्याज में जड़, जना एवं पत्ती मिलती हैं। नीचे से काटकर फेंकते हैं वो जड़ एवं छोटा सा तना होता है।
भूमि आंवला
जिला महेंद्रगढ़ के खेतों में खरपतवार बतौर भूमि आंवला/भूई आमला शाक के रूप में पाया जाता है। इस वक्त बारिश मौसम में खूब उगता है। इसे फाइलेंथस निरुरी नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में दवाओं एवं जूस के रूप में काम आता है। शूगर,पेट दर्द, सूजन, गुर्दे के रोग, लिवर के रोग,मुंह के छाले , हेपेटाइटिस, रक्त कमी आदि कितने ही रोगों में काम आता है। किसान इसे उखाड़कर फेंक देते हैं।
जिला महेंद्रगढ़ के खेतों में खरपतवार बतौर भूमि आंवला/भूई आमला शाक के रूप में पाया जाता है। इस वक्त बारिश मौसम में खूब उगता है। इसे फाइलेंथस निरुरी नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में दवाओं एवं जूस के रूप में काम आता है। शूगर,पेट दर्द, सूजन, गुर्दे के रोग, लिवर के रोग,मुंह के छाले , हेपेटाइटिस, रक्त कमी आदि कितने ही रोगों में काम आता है। किसान इसे उखाड़कर फेंक देते हैं।
केला
मुसा बल्बिसियाना नाम से जाना जाता है जिसका वृक्ष नहीं होता है। काष्ठकीय तना नहीं पाया जाता है। विश्व के करीब 135 देशों में उगाया जाता है जिसे विश्व में सबसे अधिक फल के रूप में खाया जाता है। केले में करीब 75 प्रतिशत जल पाया जाता है। यह विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण से परिपूर्ण होता है। कच्चे की सब्जी बनाकर खाई जाती है। भारत व चीन केला उत्पाद में अग्रणी है। आज भी कुछ जगह केले के पत्ते पर खाना परोसा जाता है। यह खून की कमी, रक्तचाप, हृदय रोगों में बेहतर है क्योंकि इसमें पोटाशियम तत्व पाया जाता है। मोटापा, मधुमेह, खांसी आदि के समय कम से कम खाने की डाक्टर सलाह देते हैं।
मुसा बल्बिसियाना नाम से जाना जाता है जिसका वृक्ष नहीं होता है। काष्ठकीय तना नहीं पाया जाता है। विश्व के करीब 135 देशों में उगाया जाता है जिसे विश्व में सबसे अधिक फल के रूप में खाया जाता है। केले में करीब 75 प्रतिशत जल पाया जाता है। यह विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण से परिपूर्ण होता है। कच्चे की सब्जी बनाकर खाई जाती है। भारत व चीन केला उत्पाद में अग्रणी है। आज भी कुछ जगह केले के पत्ते पर खाना परोसा जाता है। यह खून की कमी, रक्तचाप, हृदय रोगों में बेहतर है क्योंकि इसमें पोटाशियम तत्व पाया जाता है। मोटापा, मधुमेह, खांसी आदि के समय कम से कम खाने की डाक्टर सलाह देते हैं।
लेहसुआ/लसोड़ा
लेहसुआ जिसे वैज्ञानिक भाषा में कोर्डिया डाइकोटोमा नाम से जाना जाता है। इसे ग्लू बेरी/ लसोड़ा/लेहसुआ/भारतीय चेरी/डेला/गूंदा/लसोड़ा टेंटी आदि कई नामों से जाना जाता है। अचार एवं सब्जी बनाने के काम आता है। पक जाने पर पीला-लाल हो जाता है जिसे ग्रामीण लोग चाव से खाते हैं जिसका स्वाद कुछ मीठा होता है। इसकी बहन गोंदनी जिसके फल गोंदियां खाए जाते हैं। मुंह आने पर गोंदनी के पत्ते खाए जाते हैं।
लेहसुआ जिसे वैज्ञानिक भाषा में कोर्डिया डाइकोटोमा नाम से जाना जाता है। इसे ग्लू बेरी/ लसोड़ा/लेहसुआ/भारतीय चेरी/डेला/गूंदा/लसोड़ा टेंटी आदि कई नामों से जाना जाता है। अचार एवं सब्जी बनाने के काम आता है। पक जाने पर पीला-लाल हो जाता है जिसे ग्रामीण लोग चाव से खाते हैं जिसका स्वाद कुछ मीठा होता है। इसकी बहन गोंदनी जिसके फल गोंदियां खाए जाते हैं। मुंह आने पर गोंदनी के पत्ते खाए जाते हैं।
अंगूरफल/ग्रेपफ्रूट
ग्रेपफ्रूट या अंगूरफल को सिट्रस पैराडाइजी नाम से जाना जाता है। यह चकोतरा एवं नींबू से बना हाइब्रीड फल है। अंगूर के गुच्छे की भांति पेड़ से लटकने के चलते अंगूरफल कहते हैं। ये बड़े फल रहे बाद में पीले फल होते हैं। ये सिट्रस जाति के फल हैं जिनके छीलके एवं बीज से तेल निकाला जाता है जो दवाओं में काम लेते हैं। भार कम करने, दमा, उच्च कोलस्ट्राल के समय लोग इसे प्रयोग में लेते हैं। यह फल चकोतरा से बहुत मिलता है किंतु चकोतरा एक से दो किग्रा का हो जाता है। अंगूरफल पकने पर अंदर से लाल हो जाता है जिसमें फांक नहीं होती हैं।
ग्रेपफ्रूट या अंगूरफल को सिट्रस पैराडाइजी नाम से जाना जाता है। यह चकोतरा एवं नींबू से बना हाइब्रीड फल है। अंगूर के गुच्छे की भांति पेड़ से लटकने के चलते अंगूरफल कहते हैं। ये बड़े फल रहे बाद में पीले फल होते हैं। ये सिट्रस जाति के फल हैं जिनके छीलके एवं बीज से तेल निकाला जाता है जो दवाओं में काम लेते हैं। भार कम करने, दमा, उच्च कोलस्ट्राल के समय लोग इसे प्रयोग में लेते हैं। यह फल चकोतरा से बहुत मिलता है किंतु चकोतरा एक से दो किग्रा का हो जाता है। अंगूरफल पकने पर अंदर से लाल हो जाता है जिसमें फांक नहीं होती हैं।





















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