Saturday, January 11, 2020

लाल बहादुर शास्त्री     कविता
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ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
मकर संक्रांति का पर्व आया
ले आओ मूंगफली व गजक
रेवड़ी मिलकर खाएंगे  दोनों
भीष्म को याद करे यकायक।
ताऊ बोला ताई से...........
ठंड सता रही हमें दिनोंदिन
जलाएंगे  जमकर यहां ईंधन
गर्मागर्म चूरमा -दाल खाएंगे
खुश हो जाएगा तन और मन,
मूंगफली एवं  गजक  खाएंगे 
नहा धोकर  जलाएंगे तब पूर
रेवड़ी, शकरकंदी मिल खाएं
छा जाएगा  तन  अनोखा नूर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 



दुर्घटना
पिता जी, हमें ठंड लग रही है। हमें दो घुट चाय के ला दो। बस स्टैंड पर बस रुकते ही अधेड़ से उनकी पुत्री एवं पुत्र ने कहा।
अधेड़ दौड़कर चाय की दुकान से दोनों हाथों में दो चाय के कप लेकर बस की ओर आ रहा था और रोड़ क्रास करने लगा तो तेज रफ्तार से आ रही बस ने उसे रौंद दिया। चाय का इंतजार करने वाले भाई बहन की आंखें फटी की फटी रह गई। चारो ओर सन्नाटा छा गया। एक तो सर्दी उस पर दुर्घटना ने झकोर कर रख दिया। पापा, पापा चिल्ला रहे भाई बहन अपने को दोषी ठहरा रहे थे कि उन्होंने चाय मांगकर बहुत बड़ा अपराध कर लिया। लोग ढांढस बंधा रहे थे। उनके आंसू रोके से नहीं रुक रहे थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 
 





  शास्त्री
सीधे सादे गठीला तन
कहलाते हैं वो शास्त्री
दस जनवरी 1966 की
याद आती है वो रात्रि,
भारत के वो प्रधानमंत्री
ताशकंद  का  समझौता
अमर हो गया  वो भक्त
दे गया मौत  को न्यौता,
सम्मान ना झुकने दिया
देश ने किया है विकास
याद रखेगा  उनको जग
जब तक तन में है सांस,
नीतिवान वो  गुणहीजन
कभी नहीं  भुला सकते
चले गए है वो  देशभक्त
यादों को संजोकर रखते।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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