नाम
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किसी को राम कहते
किसी को कहे श्याम
किसी का राधा नाम
बन जाए बिगड़े काम,
कोई पप्पू कहलाता
कोई कहलाता काला
कोई तन से हो सुंदर
कोई होता भोलाभाला,
कोई सुमन कहलाती
कोई कहलाती रजनी
कोई राधा कहलाती
बन जाए कृष्ण सजनी,
कोई शेर सिंह कहाता
कोई गीदड़ सिंह होता
कोई देखकर हंसता है
कोई देख देखकर रोता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
भविष्य
जब बच्चे बड़े होते हैं
खोल देते जन का राज
कितने ही पापड़ बेलते
उठाने पड़ते उनके नाज,
कभी बच्चे धोखा देते हैं
न पढ़ते न लिखते कभी
लाख कोशिश कर लो
बेशक परेशान हो सभी,
कभी तो बच्चे ऐसे होते
कर देते हैं परिवार नाम
पूरे जग में होता उजाला
कर जाते हैं ऐसा काम,
जिनके बच्चे सफल हो
हो जाए जीवन सफल
आज के बच्चे होनहार
तो सुनहरा होगा कल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
लग गई है बड़ी बीमारी
भावी पीढ़ी की मत मारी
मोबाइल के चक्कर में पड़े
उनकी बनी दुनिया न्यारी।
ताऊ बोला ताई से........
एक ओर जहां लाभ होते
दूसरी ओर होती है हानि
दोनों साथ साथ चलते हैं
यह नहीं है युवा मनमानी,
जहां लाभ कुछ चलता है
वहां हानि चलती है साथ
हर जन की पसंद बनी है
मोबाइल की क्या है बात।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा**
सब्जी
(सत्य घटना पर आधारित)
रामू अपे थैले में भिंडी सब्जी खरीदकर होटल के सामने से गुजरने लगे तो होटल के मालिक जो रामू का परिचित था, ने पूछा-आप यह क्या खरीदकर लाए हो? रामू ने जवाब दिया-हरी हरी भिंडी खरीदकर लाया हूं जो 50 रुपये किलो के हिसाब से मिली है।
.....इतनी महंगी। भिंडी चाहिए थी तो मेरे से ही ले ली होती। मैं 15 रुपये किलो खरीदी हैं। होटल मालिक ने क हा।
रामू होटल मालिक के पास खड़े होकर देखने लगा। वो होटल में सब्जी बनाने के लिए भिंडी काट रहा था जिसमें अनेकों भिंडी कीड़ों की खाई हुई तथा कीड़ों युक्त थी। टमाटर पर नजर पड़ी तो वो भी गले सड़े थे। रामू ने कहा-हद कर दी। तुम इतनी घटिया सब्जी लोगों को खिलाते हो?
होटल मालिक ने जवाब दिया-ये लोग मीट, मछली खा जाते हैं, मुर्गे को ही खा जाते हैं और बकरे की बोटी बोटी कर खा जाते हैं तो उनके लिए कीड़े कौन सी दिक्कत देते हैं।
रामू अवाक आगे बढ़ गया और सोच रहा था कि ये होटल तो गंदगी खिलाते हैं। घर का खाना आखिरकार बेहतर माना जाता है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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किसी को राम कहते
किसी को कहे श्याम
किसी का राधा नाम
बन जाए बिगड़े काम,
कोई पप्पू कहलाता
कोई कहलाता काला
कोई तन से हो सुंदर
कोई होता भोलाभाला,
कोई सुमन कहलाती
कोई कहलाती रजनी
कोई राधा कहलाती
बन जाए कृष्ण सजनी,
कोई शेर सिंह कहाता
कोई गीदड़ सिंह होता
कोई देखकर हंसता है
कोई देख देखकर रोता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
भविष्य
जब बच्चे बड़े होते हैं
खोल देते जन का राज
कितने ही पापड़ बेलते
उठाने पड़ते उनके नाज,
कभी बच्चे धोखा देते हैं
न पढ़ते न लिखते कभी
लाख कोशिश कर लो
बेशक परेशान हो सभी,
कभी तो बच्चे ऐसे होते
कर देते हैं परिवार नाम
पूरे जग में होता उजाला
कर जाते हैं ऐसा काम,
जिनके बच्चे सफल हो
हो जाए जीवन सफल
आज के बच्चे होनहार
तो सुनहरा होगा कल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
लग गई है बड़ी बीमारी
भावी पीढ़ी की मत मारी
मोबाइल के चक्कर में पड़े
उनकी बनी दुनिया न्यारी।
ताऊ बोला ताई से........
एक ओर जहां लाभ होते
दूसरी ओर होती है हानि
दोनों साथ साथ चलते हैं
यह नहीं है युवा मनमानी,
जहां लाभ कुछ चलता है
वहां हानि चलती है साथ
हर जन की पसंद बनी है
मोबाइल की क्या है बात।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा**
सब्जी
(सत्य घटना पर आधारित)
रामू अपे थैले में भिंडी सब्जी खरीदकर होटल के सामने से गुजरने लगे तो होटल के मालिक जो रामू का परिचित था, ने पूछा-आप यह क्या खरीदकर लाए हो? रामू ने जवाब दिया-हरी हरी भिंडी खरीदकर लाया हूं जो 50 रुपये किलो के हिसाब से मिली है।
.....इतनी महंगी। भिंडी चाहिए थी तो मेरे से ही ले ली होती। मैं 15 रुपये किलो खरीदी हैं। होटल मालिक ने क हा।
रामू होटल मालिक के पास खड़े होकर देखने लगा। वो होटल में सब्जी बनाने के लिए भिंडी काट रहा था जिसमें अनेकों भिंडी कीड़ों की खाई हुई तथा कीड़ों युक्त थी। टमाटर पर नजर पड़ी तो वो भी गले सड़े थे। रामू ने कहा-हद कर दी। तुम इतनी घटिया सब्जी लोगों को खिलाते हो?
होटल मालिक ने जवाब दिया-ये लोग मीट, मछली खा जाते हैं, मुर्गे को ही खा जाते हैं और बकरे की बोटी बोटी कर खा जाते हैं तो उनके लिए कीड़े कौन सी दिक्कत देते हैं।
रामू अवाक आगे बढ़ गया और सोच रहा था कि ये होटल तो गंदगी खिलाते हैं। घर का खाना आखिरकार बेहतर माना जाता है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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