देश
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विभिन्न धर्मों का देश है
जहां देव पुरुष कहलाते
हंसी खुशी में जीवन जी
एक दूजे को गले लगाते,
त्योहारों का देश कहाता
जगमग होती है दीवाली
सब के सब आधीन होते
वो ही है जगत का माली,
पवित्र नदियां यहां बहती
नहीं कोई होता बैर भाव
एक दूजे के पर्व में जाए
होता है जन जन में चाव,
फूट डालना चाहते हैं जो
वो ही गद्दार कहलाते हैं
जो देश को न्योछावर हो
देशभक्त वो कहलाते हैं।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना**
राम
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वो बच्ची भूखी और गरीब थी। माता पिता बचपन में ही छोड़कर चले गए थे ऐसे में बेचारी जब कहीं जाती तो बच्चे भी उसे हेय दृष्टि से देखते और उसे अपने साथ खेलने से मना कर देते। बच्ची एक दिन रोने लगी तो एक दिन रामू ने आकर पूछा-तुम क्यों रो रही हो? बच्ची ने रामू को सारी बात बताई। रामू ने जब उसकी कहानी सुनी तो आंखों में आंसू आ गए और कहा-लो आज से मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा। आज से मैं तुम्हारा दोस्त बन गया हूं। अब तो बच्ची रामू के संग खेलती और प्रसन्न थी क्योंकि उसे दोस्त मिल गया, खेलने का सामान मिल गया। उसके लिए तो रामू ,रामू नहीं अपितु राम थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
नेताजी की याद आ रही
जिसने दी थी एक फौज
कुर्बानी से मिली आजादी
भारतवासी करते हैं मौज।
ताऊ बोला ताई से.........
काश! आज वो होते तो
दुश्मन ना दिखाता आंख
जब देश मनाता आजादी
याद आती उनकी धाक,
अमर सपूत वीर कहलाते
जो देश को दे जाते जान
दुनियां चाहे मिट जाएगी
नहीं मिटेगी उनकी शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सुगंध
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फूल में ढूंढता सुगंध
हंस रहा वो मंद मंद
कहां छिपी है ये गंध
मन में उठती द्वंद्व,
भंवरा ढूंढ रहा कुछ
क्या उसे मिल पाएगी
रची बसी है फूल में
खूब वो तो तड़पाएगी,
तितली,मधुमक्खी भी
मंडरा रहे डाली फूल
नहीं लगता उन्हें डर
फूल पास में है शूल,
दोस्ती फूल सुगंध की
नहीं मिले खूब ढूंढते
इसलिए भंवरा तितली
फूल बार-बार सूंघते।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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विभिन्न धर्मों का देश है
जहां देव पुरुष कहलाते
हंसी खुशी में जीवन जी
एक दूजे को गले लगाते,
त्योहारों का देश कहाता
जगमग होती है दीवाली
सब के सब आधीन होते
वो ही है जगत का माली,
पवित्र नदियां यहां बहती
नहीं कोई होता बैर भाव
एक दूजे के पर्व में जाए
होता है जन जन में चाव,
फूट डालना चाहते हैं जो
वो ही गद्दार कहलाते हैं
जो देश को न्योछावर हो
देशभक्त वो कहलाते हैं।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना**
राम
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वो बच्ची भूखी और गरीब थी। माता पिता बचपन में ही छोड़कर चले गए थे ऐसे में बेचारी जब कहीं जाती तो बच्चे भी उसे हेय दृष्टि से देखते और उसे अपने साथ खेलने से मना कर देते। बच्ची एक दिन रोने लगी तो एक दिन रामू ने आकर पूछा-तुम क्यों रो रही हो? बच्ची ने रामू को सारी बात बताई। रामू ने जब उसकी कहानी सुनी तो आंखों में आंसू आ गए और कहा-लो आज से मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा। आज से मैं तुम्हारा दोस्त बन गया हूं। अब तो बच्ची रामू के संग खेलती और प्रसन्न थी क्योंकि उसे दोस्त मिल गया, खेलने का सामान मिल गया। उसके लिए तो रामू ,रामू नहीं अपितु राम थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
नेताजी की याद आ रही
जिसने दी थी एक फौज
कुर्बानी से मिली आजादी
भारतवासी करते हैं मौज।
ताऊ बोला ताई से.........
काश! आज वो होते तो
दुश्मन ना दिखाता आंख
जब देश मनाता आजादी
याद आती उनकी धाक,
अमर सपूत वीर कहलाते
जो देश को दे जाते जान
दुनियां चाहे मिट जाएगी
नहीं मिटेगी उनकी शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सुगंध
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फूल में ढूंढता सुगंध
हंस रहा वो मंद मंद
कहां छिपी है ये गंध
मन में उठती द्वंद्व,
भंवरा ढूंढ रहा कुछ
क्या उसे मिल पाएगी
रची बसी है फूल में
खूब वो तो तड़पाएगी,
तितली,मधुमक्खी भी
मंडरा रहे डाली फूल
नहीं लगता उन्हें डर
फूल पास में है शूल,
दोस्ती फूल सुगंध की
नहीं मिले खूब ढूंढते
इसलिए भंवरा तितली
फूल बार-बार सूंघते।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**





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