पत्ते
*************************************
पेड़ के ये पत्ते हरे हरे
हाथ सा हिला रहे हैं
ये अद्भुत प्रयोगशाला
बसु ने अद्भुत कहे हैं,
क्लोरोफिल भरा हुआ
बनाते दिनभर भोजन
प्रकाश संश्लेषण से
प्रसन्न करे सबका मन,
आक्सीजन ये छोड़ते
घटा देते विषैली हवा
खाकर इनका भोजन
हो जाते हैं जन जवां,
पत्ते,डाली और पेड़
सब मिलकर रहते
इनका जीवन अच्छा
देवता इनको कहते।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
घी
(सत्य घटना पर आधारित)
जल्दी से दो चाय बना देना। बस आने वाली है। दो जनों ने चायक की दुकान पर बैठते हुए कहा।
दुकानदार ने कहा-भाई चाय बनने में कुछ देर लगेगी। आप इंतजार करे। मेरे देशी घी से भरी डोली में चूहा गिर गया और वो घी पीकर फूल गया है।
एकटक दोनों राहगीर दुकानदार को देखने लगे और दुकानदार ने चूहे की पूंछ पकड़कर मरे हुए चूहे के शरीर पर लगा घी सूतना शुरू कर दिया। आंखें फटी की फटी रह गई। सहसा एक राहगीर ने पूछा-यह क्या कर रहे हो।
दुकानदार ने उत्तर दिया-भाई 700 रुपये किलो का भाव घी का है। चूहे पर एक सौ ग्राम घी चिपटा हुआ था। बताओ वो 70 रुपये का हुआ ना?
छी छी....कैसा गंदा है। हम नहीं पीएंगे चाय वाय। राहगीरों ने नाक पर कपड़ा रखकर भागना उचित समझा। वो कह रहे थे-सचमुच यह तो कंजूस चूहा चूस है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
व्यसन
पी रहे भर भर प्याले
चाय की लगी है लत
सर्दी,गर्मी बस चाय है
कैसी बनी है जन गत,
कहीं बीड़ी,सिगरेट है
कहीं चलते देशी ठर्रा
कोई शराब में डूबा है
बन गए कार्य रोजमर्रा,
कहीं गुटका, तंबाकू है
कोई खा रहा है खैनी
पान पराग, चिलम पर
निगाहें होती कुछ पैनी,
बुरी होती हैं सारी लत
कर देती बुरी जन गत
सेहत सुधर जाए झट
नहीं लगे इनकी ये रट।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
ठंड पाकर पक गए बेर
लाओ खाएंगे मिलकर
मौसमी फल कहलाते
मिलते हैं हर घर घर।
ताऊ बोला ताई से....
कई प्रकार के बेर आए
मधुर मधुर लगते हैं सारे
लो मैं लाकर देता तुमको
रसीले बेर हैं प्यारे प्यारे,
पचेरी,देशी,बागू व झाड़ी
कई प्रकार के होते हैं बेर
लो मिलकर सबको खाए
वर्ष बीतने पर आए फेर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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पेड़ के ये पत्ते हरे हरे
हाथ सा हिला रहे हैं
ये अद्भुत प्रयोगशाला
बसु ने अद्भुत कहे हैं,
क्लोरोफिल भरा हुआ
बनाते दिनभर भोजन
प्रकाश संश्लेषण से
प्रसन्न करे सबका मन,
आक्सीजन ये छोड़ते
घटा देते विषैली हवा
खाकर इनका भोजन
हो जाते हैं जन जवां,
पत्ते,डाली और पेड़
सब मिलकर रहते
इनका जीवन अच्छा
देवता इनको कहते।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
घी
(सत्य घटना पर आधारित)
जल्दी से दो चाय बना देना। बस आने वाली है। दो जनों ने चायक की दुकान पर बैठते हुए कहा।
दुकानदार ने कहा-भाई चाय बनने में कुछ देर लगेगी। आप इंतजार करे। मेरे देशी घी से भरी डोली में चूहा गिर गया और वो घी पीकर फूल गया है।
एकटक दोनों राहगीर दुकानदार को देखने लगे और दुकानदार ने चूहे की पूंछ पकड़कर मरे हुए चूहे के शरीर पर लगा घी सूतना शुरू कर दिया। आंखें फटी की फटी रह गई। सहसा एक राहगीर ने पूछा-यह क्या कर रहे हो।
दुकानदार ने उत्तर दिया-भाई 700 रुपये किलो का भाव घी का है। चूहे पर एक सौ ग्राम घी चिपटा हुआ था। बताओ वो 70 रुपये का हुआ ना?
छी छी....कैसा गंदा है। हम नहीं पीएंगे चाय वाय। राहगीरों ने नाक पर कपड़ा रखकर भागना उचित समझा। वो कह रहे थे-सचमुच यह तो कंजूस चूहा चूस है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
व्यसन
पी रहे भर भर प्याले
चाय की लगी है लत
सर्दी,गर्मी बस चाय है
कैसी बनी है जन गत,
कहीं बीड़ी,सिगरेट है
कहीं चलते देशी ठर्रा
कोई शराब में डूबा है
बन गए कार्य रोजमर्रा,
कहीं गुटका, तंबाकू है
कोई खा रहा है खैनी
पान पराग, चिलम पर
निगाहें होती कुछ पैनी,
बुरी होती हैं सारी लत
कर देती बुरी जन गत
सेहत सुधर जाए झट
नहीं लगे इनकी ये रट।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
ठंड पाकर पक गए बेर
लाओ खाएंगे मिलकर
मौसमी फल कहलाते
मिलते हैं हर घर घर।
ताऊ बोला ताई से....
कई प्रकार के बेर आए
मधुर मधुर लगते हैं सारे
लो मैं लाकर देता तुमको
रसीले बेर हैं प्यारे प्यारे,
पचेरी,देशी,बागू व झाड़ी
कई प्रकार के होते हैं बेर
लो मिलकर सबको खाए
वर्ष बीतने पर आए फेर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




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