Saturday, January 18, 2020

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पुनर्नवा
ग्रामीण क्षेत्रों में खाटा का साग, कढ़ी तथा अन्य सब्जियों में पुनर्नवा के पत्ते डाले जाते हैं। सांटी को बोराहविया डिफूजा नाम से जानते हैं। सूखने के बाद बारिश में फिर से पनप जाती है जिसके चलते इसे पुनर्नवा कहते हैं। खनिज लवण एवं विटामिनों से परिपूर्ण सांटी को खाने से पीलिया, सूजन, कफ एवं पीड़ा खत्म होती है। इस समय खेतों में उग रही है।
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अवकाश
गर्मी पड़ रही जोर की
स्कूलों में है अवकाश
बच्चे हंसी खुशी कहते
बारिश हो जाए काश!...
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नहाओ
नहाना अति जरूरी है
बाल्टी भरकर नहाओ
स्नान के लिए मत ना
नदी,जोहड़ पर जाओ,...
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लो आई बारिश
लो आई बारिश सुहानी
गरजे बादल बरसे पानी
टिड्डे, मेंढक गाए मस्त
आशिक करते मनमानी,...
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पलपोटा
जंगल में मिलने वाला पलपोटा(फाइसेलिस मिनिमा)आंवला, टमाटर आदि स्वाद में मिलता है। फल को बाहृ दलपुंज गुब्बारे की भांति फुलाए रखता है। पकने पर स्वयं टहनी से गिर जाता है। कभी इसे बड़े चाव से खाया जाता था जो अब कम हो गए हैं। यह पीड़ाहर औषधीय पौधा होता है। पकने पर फल पीला पड़ जाता है।
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तुलसी
घरों में पाया जाने वाला पौधा तुलसी(ओसिमम टेनुआईफ्लोरम), पुदीना(मेंथा पाइपेरिटा) तथा जंगली तुलसी (नकद बावरी)एक ही कुल के पौधे हैं जो सेहत के लिए तो लाभकारी हैं साथ में घर में शुभ माने जाते हैं। तुलसी में विष्णु का वास बताया जाता है जो शरीर की कई बीमारियों में कारगर है वहीं पुदीना पेट की बीमारियों में रामबाण है वहीं नकद बावरी जंगली पौधा है जिसके काले रंग के बीज खीर बनाने के काम में लेते हैं। यह भी पेट के लिए लाभकारी होता है।
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कद्दू
अकसर कद्दू को पेठा, सीताफल आदि नामों से पुकारते हैं जबकि पेठा आगरा की प्रसिद्ध मिठाई है जो पेठा नामक फल से बनती है। सीताफल वास्तव में एक फल का नाम है। कद्दू पंपकिन नाम से जानी जाती है जो वैज्ञानिक भाषा में कुकरबिटा पीपो नाम से जानी जाती है। विटामिन एवं खनिज लवणों से परिपूर्ण सब्जी विवाह शादी एवं भंडारे में प्रमुखरूप से बनाई जाती है। श्रीभगवान, सूबे सिंह एवं राजेंद्र सिंह ने बिना उर्वरक एवं दवाओं के एक ही बेल पर कई कद्दू पैदा किए हैं जिनका वजन दस किलो तक हैं। इसे कहते हैं आर्गेनिक सब्जी का एक रूप।
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पील
पील जिसे ग्रामीण लोगों का अंगूर नाम से जाना जाता है वास्तव में साल्वेडोरा इंडिका पौधे के फल है जो अधिक गर्मी एवं लू में ही लगते हैं। इस वर्ष जाल के पेड़ों पर भारी मात्रा में लगे हुए हैं। पील को पीलू नाम से भी जाना जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि जब पीलू अधिक लगे तो बारिश अच्छी होगी।
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  • Vijaypal Sehlangia बहुत अच्छा प्रयास ,यादव जी.
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  • Rajkumar Kumar बहुत खूब पर्यावरण संरक्षण पर आपकी रचना प्रेरणादायक हैं
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  • Rajkumar Kumar **""सुदिनम सुदिनम जन्मदिनम, तव भवतु मंगलम जन्मदिनम।
    विजयी भवः सर्वत्र सर्वदा, शुभम मंगलम जन्मदिनम।।""**"
    🙏🙏🌳🌳सभी अपने जन्मदिन पर पौधा जरूर लगाये व वृक्ष बनने तक उसकी देख रेख करे।🌴🌲🌿🌿
    निवेदक
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