नेताजी
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अफसोस कि अब वो बोस नहीं
अफसोस कि वो अब जोश नहीं
यह कोई किसी का दोष नहीं
जय हिंद वाला जयघोष नहीं,
अफसोस कि अब वो बास नहीं।
शहीदों की भूमि खून से सींची
यह भूमि उस जवान की है
यह कहानी उस जहान की है
जिस पर आप कोई रोष नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
बीज आजादी का बो गए
जाने कहां वो खो गए
अब अंग्रेजों का राज नहीं
अब तानाशाही का ताज नहीं
अब जनता में आक्रोश नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
कितनी बस्तियां वीरान हुई
कितने लोगों की जान गई
अब कोई गद्दार शेष नहीं
अब वह परतंत्र देश नहीं
लेकिन अब वो धनकोष नहीं
अफसोस कि अब......
यह देश आज पुकारता है
बार बार उन्हें निहारता है
अब युवकों में वो जोश नहीं
अब कोई जन ठोस नहीं
अब जनता भी निर्दोष नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
यह कोई ........................
कहां खो गए बोस बाबू
खत्म हो रहा वीरों का जादू
कर रहे अब हम फरियाद
आ रही अब तुम्हारी याद
याद करेंगे जब तक सांस
कहां जाए वो आगोश नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
यह कोई..............................
आजाद हिंद के सैनिक पुकारे
कहां खां गए भारत के दुलारे
एक बार दर्शन दे दो बोस हमारे
तक तक थक गए नयन हमारे
या तो धरा पर वापस जाओ
वरना हम आएंगे द्वार तुम्हारे
अब जनता भी खामोश नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
यह कोई किसी..................
बस तुम्हारी कमी खलती है
कुर्बानी दिलों में पलती है
जब याद करते हैं तुम्हारे शब्द
अंगड़ाई ले दुनिया चलती है
कैसे भुला दे आज तुमको
ये आंखें टप टप बरसती हैं
सजग खड़े हैं मदहोश नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
यह कोई...........................
अब चहुं ओर अंधेरा छाया
जर्जर हो गई अपनी काया
पुकार रहे सभी नेता-नेता
जयघोष अब नहीं सुनाई देता
हिटलर से जब आंख मिली थी
वो दृृश्य अब ना दिखाई देता
किसको पुकारे अब होश नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहींं
यह कोई किसी का दोष नहीं
अफसोस कि अब.................
पराधीनता का दुख झेला था
सचमुच बोस अलबेला था
वो जोश, वो जवानी पुकारे
लो खून ले लो बोस हमारे
देशद्रोहियों को फिर मारेंगे
जय हिंद जय हिंद पुकारेंगे
पर अक कोई फिरदौस नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
अफसोस कि अब वो............
यह देश तुम्हारा ऋणी रहेगा
यह तिरंगा तुम्हें याद करेगा
धरती मां तुम्हें पुकारेगी
हर जननी तुम्हें निहारेगी
आजादी तुम्हारा तके रास्ता
हिंदुस्तान से था तेरा वास्ता
होशियार सिंह खामोश नहीं
अफसोस कि अब वो बोस नहीं
यह कोई.........................
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**





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