Tuesday, January 14, 2020


वाह वाह ! वाह वाह!

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ज्ञान
ज्ञान बड़ी चीज है
पाना सदा चाहिए
कुछ कर  गुजरना
स्कूल बस आइये,
पुस्तक ज्ञान भंडार
मन खूब  लगाइये
मेहनत से दिनरात 
निज नाम कमाइये,
गलत काम न करो
गलत होता बेकार
गलत काम  करके
सदा ही होगी हार,
नाम बहुत होता है
आइये ज्ञान पाएंगे
स्कूल में जाकर के
गुरु से ज्ञान पाएंगे।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**



नमन
नमन तुम्हें  हे पेड़!
तुम रक्षक कहलाते
पूजा  करें सदा हम
अन्न अमृत  दे जाते,
पूर्वजों  को  देखा है
तुम चश्मदीद गवाह
सुनकर तुम्हारी सेवा
जन करते वाह वाह,
फल-फूल  के दाता
महिमा होती  अपार
मैत्रीभाव बढ़ जाएगा
जन करने  लगे प्यार,
भविष्य को निहारना
साक्षी बने रहना तुम
मेरी यही अरदास है
ध्यान लगाके ले सुन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**





सैनिक
सब कुछ देश पर वारी
तत्पर सेवा  की तैयारी
दुश्मन को  बस मार दूं
रहती मंशा उनकी सारी,
कभी नहीं करते आराम
बस रक्षा का सदा काम
घर मंदिर पास ना होता
बार्डर ही होता है धाम,
तीज त्योहार मन में रहे
मिलने की  रहती आश
जब कभी घर पर आते
बाल बच्चे रहते हैं पास,
बहुत कठिन  है जीवन
कहलाते हैं देश  रक्षक
अगर नहीं  हो देशभक्त
दुश्मन बन जाएंगे भक्षक।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




खाना या डंडा
रामू ने अपने घर के पास लिखा था-चाहे खाना खाओ या खाओ डंडा। जब भी कोई भिखारी वहां चलकर आता था तो रामू तुरंत उसे घर के अंदर बिठाता और उसके बारे में सारी जानकारी लेकर कहता-बताओ, तुम क्या लोगे? खाना या डंडा? दो चीजें ही मिलेंगी। पैसे मांगे तो बुरा हाल होगा। या तो खाना खाओ या फिर डंडा खाओ अन्य कोई विकल्प नहीं है। जब भी कोई भीख मांगता तो डंडों से पीट पीटकर बुरा हाल कर देता। वे बस एक बात ही कहता-इंसान को सारा खेल खाने के लिए करना होता है। वो उन्हें देने के लिए तैयार है। रुपयों से शराब पीते हैं या फिर व्यसनों में गंवा देते हैं। उन्हें देखकर भीख मांगने वाले मारे डर के पैसे नहीं मांगते थे। उनकी विचारधारा से लोग प्रसन्न थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा
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ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से........
कहां गए वो जगाने वाले
कहां गए वो बुजुर्ग महान
मकर संक्रांति आती जाती
कहां गई  पुरानी पहचान।
ताऊ बोला ताई से.......
आदर सम्मान घट गया है
बुजुर्गों का ना सम्मान रहा
आदर्श पुत्र  पुत्री नहीं रहे
ये बेचारे बुजुर्ग जाए कहां,
जगाकर लेते थे आशीर्वाद
करते थे दानपुण्य का काम
घर में हंसी खुशी होती थी
बन जाता था घर एक धाम।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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