कोढ़
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जीवाणु से होता रोग
हैन्सेन है इसका नाम
दीर्घकालीन रोग होता
अंगों को करे तमाम,
स्थायी विकलांग बने
प्राचीन समय का रोग
जब कभी होता था ये
कहते थे इसे संजोग,
मरते हैं बहुत से लोग
घातक होता है ये रोग
प्रारंभ में इलाज थोड़ा
जन इसका कष्ट भोग,
ढूंढ ली है इसकी दवा
फैलाती इसे पानी हवा
एक दिन ऐसा आ जाए
बच जाए बूढ़ा व जवां।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.......
कहने को हाड़ मांस का
चलता फिरता पुतला था
पर आजादी दिलवाने में
अग्रणी देव निकला था।
ताऊ बोला ताई से------
नाम उसका बाबू गांधी
यात्रा चलाई एक डांडी
अंग्रेज भी तिनके से उड़े
जब चली उनकी आंधी,
लााठी,धोती,साधारण सा
वो चश्मे लगाकर चलता
देशवासी इतना चाहते थे
बापू शब्द दिल में पलता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अभिशाप
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जीवनभर एक एक पाई जोड़कर एक जमीन का टुकड़ा खरीदने वाली औरत की जमीन पर पर जबरन कब्जा करने वाले धीरू को अभिशाप देते हुए रमनी की मौत हो गई किंतु उसकी मौत के बाद धीरू का एक एक करके सब कुछ तबाह हो गया। पत्नी और बच्चे भी दुर्घटना में मारे गए। अकेला धीरू पानी और रोटी के लिए तड़पने लगा। हर इंसान के मुख से शब्द निकला-गरीब की हाय मार गई। अभिशाप कभी नहीं पीछा छोड़ रहा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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जीवाणु से होता रोग
हैन्सेन है इसका नाम
दीर्घकालीन रोग होता
अंगों को करे तमाम,
स्थायी विकलांग बने
प्राचीन समय का रोग
जब कभी होता था ये
कहते थे इसे संजोग,
मरते हैं बहुत से लोग
घातक होता है ये रोग
प्रारंभ में इलाज थोड़ा
जन इसका कष्ट भोग,
ढूंढ ली है इसकी दवा
फैलाती इसे पानी हवा
एक दिन ऐसा आ जाए
बच जाए बूढ़ा व जवां।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.......
कहने को हाड़ मांस का
चलता फिरता पुतला था
पर आजादी दिलवाने में
अग्रणी देव निकला था।
ताऊ बोला ताई से------
नाम उसका बाबू गांधी
यात्रा चलाई एक डांडी
अंग्रेज भी तिनके से उड़े
जब चली उनकी आंधी,
लााठी,धोती,साधारण सा
वो चश्मे लगाकर चलता
देशवासी इतना चाहते थे
बापू शब्द दिल में पलता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अभिशाप
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जीवनभर एक एक पाई जोड़कर एक जमीन का टुकड़ा खरीदने वाली औरत की जमीन पर पर जबरन कब्जा करने वाले धीरू को अभिशाप देते हुए रमनी की मौत हो गई किंतु उसकी मौत के बाद धीरू का एक एक करके सब कुछ तबाह हो गया। पत्नी और बच्चे भी दुर्घटना में मारे गए। अकेला धीरू पानी और रोटी के लिए तड़पने लगा। हर इंसान के मुख से शब्द निकला-गरीब की हाय मार गई। अभिशाप कभी नहीं पीछा छोड़ रहा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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