कविता/कहानी/ताऊ ताई संवाद
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त्योहार
आते हैं कई पर्व जब
भर जाते उमंग जोश
गले मिलते एक दूजे
भूल जाते हैं गुण दोष,
एकता, भाईचारा बढ़ा
चले जाते हैं त्योहार
दुश्मनी सभी भूल कर
बढ़ा लेते हैं निज प्यार,
कभी होली कभी ईद
कभी आती है दीवाली
कभी बहार फाग की
कभी आती बसंत बहार,
त्योहार अगर नहीं होते
बैरभाव बहुत बढ़ जाए
पर्व समय समय पर आ
आपस में ही प्रीत जगाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
भक्ति
बच्ची अपनी मां के लिए प्रतिदिन फूल तोड़कर लाती थी और मां बच्ची बैठकर शिवभोले की आराधना करती थी। जब बच्ची बड़ी होकर नौकरी में लग गई तो एक दिन उसने मां से पूछा-आप इतने समय से पूजा कर रही हो आखिरकार क्या मांगना चाहती हो?
मां ने उत्तर दिया-मैं तुम्हारी नौकरी पाने की दुआएं मांगती थी और अब तुम्हारी नौकरी बेहतर ढंग से पूर्ण होने की प्रार्थना करती हूं। मां की बात सुनकर बच्ची की आंखें भर आई। मां की भक्ति के आगे वो झुक गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से......
मकर संक्राति और लोहड़ी
त्योहार आया तिल कुटनी
मूंगफली,रेवड़ी तिल खाएंगे
भूल जाएंगे रोज रोट चटनी।
ताऊ बोला ताई से.........
मूंगफली,रेवाड़ी खाएंगे हम
लोहड़ी का त्योहार मनाएंगे
दिन समय में हम सो जाएंगे
मकर संक्रांति पर जगाएंगे,
तिल कुटनी त्योहार पुराना
तिल कुटकर गुड़ में मिलाएं
गणेश की पूजा अर्चना करे
फिर बांट बांटकर खाएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
त्योहार
आते हैं कई पर्व जब
भर जाते उमंग जोश
गले मिलते एक दूजे
भूल जाते हैं गुण दोष,
एकता, भाईचारा बढ़ा
चले जाते हैं त्योहार
दुश्मनी सभी भूल कर
बढ़ा लेते हैं निज प्यार,
कभी होली कभी ईद
कभी आती है दीवाली
कभी बहार फाग की
कभी आती बसंत बहार,
त्योहार अगर नहीं होते
बैरभाव बहुत बढ़ जाए
पर्व समय समय पर आ
आपस में ही प्रीत जगाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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त्योहार
आते हैं कई पर्व जब
भर जाते उमंग जोश
गले मिलते एक दूजे
भूल जाते हैं गुण दोष,
एकता, भाईचारा बढ़ा
चले जाते हैं त्योहार
दुश्मनी सभी भूल कर
बढ़ा लेते हैं निज प्यार,
कभी होली कभी ईद
कभी आती है दीवाली
कभी बहार फाग की
कभी आती बसंत बहार,
त्योहार अगर नहीं होते
बैरभाव बहुत बढ़ जाए
पर्व समय समय पर आ
आपस में ही प्रीत जगाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
भक्ति
बच्ची अपनी मां के लिए प्रतिदिन फूल तोड़कर लाती थी और मां बच्ची बैठकर शिवभोले की आराधना करती थी। जब बच्ची बड़ी होकर नौकरी में लग गई तो एक दिन उसने मां से पूछा-आप इतने समय से पूजा कर रही हो आखिरकार क्या मांगना चाहती हो?
मां ने उत्तर दिया-मैं तुम्हारी नौकरी पाने की दुआएं मांगती थी और अब तुम्हारी नौकरी बेहतर ढंग से पूर्ण होने की प्रार्थना करती हूं। मां की बात सुनकर बच्ची की आंखें भर आई। मां की भक्ति के आगे वो झुक गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से......
मकर संक्राति और लोहड़ी
त्योहार आया तिल कुटनी
मूंगफली,रेवड़ी तिल खाएंगे
भूल जाएंगे रोज रोट चटनी।
ताऊ बोला ताई से.........
मूंगफली,रेवाड़ी खाएंगे हम
लोहड़ी का त्योहार मनाएंगे
दिन समय में हम सो जाएंगे
मकर संक्रांति पर जगाएंगे,
तिल कुटनी त्योहार पुराना
तिल कुटकर गुड़ में मिलाएं
गणेश की पूजा अर्चना करे
फिर बांट बांटकर खाएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
त्योहार
आते हैं कई पर्व जब
भर जाते उमंग जोश
गले मिलते एक दूजे
भूल जाते हैं गुण दोष,
एकता, भाईचारा बढ़ा
चले जाते हैं त्योहार
दुश्मनी सभी भूल कर
बढ़ा लेते हैं निज प्यार,
कभी होली कभी ईद
कभी आती है दीवाली
कभी बहार फाग की
कभी आती बसंत बहार,
त्योहार अगर नहीं होते
बैरभाव बहुत बढ़ जाए
पर्व समय समय पर आ
आपस में ही प्रीत जगाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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