ताऊ ताई संवाद कविता
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चौलाई
बारिश के मौसम में कभी जंगलों में स्वयं उगती थी। अब यह लुप्तप्राय हो गई है। इसके विभिन्न जायकेदार साग एवं सब्जियों बनते थे। उच्च मात्रा में लोहा, आक्जलिक एसिड,कैल्शियम एवं विटामिन मिलते थे। आंखों की रोशनी बढ़ाने, खून की कमी दूर करने व हड्डियों की कमजोरी दूर करने में कारगर होती थी। बुजुर्ग आज भी याद करते हैं।
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चौलाई
बारिश के मौसम में कभी जंगलों में स्वयं उगती थी। अब यह लुप्तप्राय हो गई है। इसके विभिन्न जायकेदार साग एवं सब्जियों बनते थे। उच्च मात्रा में लोहा, आक्जलिक एसिड,कैल्शियम एवं विटामिन मिलते थे। आंखों की रोशनी बढ़ाने, खून की कमी दूर करने व हड्डियों की कमजोरी दूर करने में कारगर होती थी। बुजुर्ग आज भी याद करते हैं।












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