Friday, January 17, 2020

रेन बग
बेहतर बारिश के बाद रेन बग दिखाई पड़ते हैं। मखमली गहरे लाल रंग के जीवों को आम भाषा में तीज कहते हैं। ये अकसर श्रावणी तीज के पर्व पर अधिक नजर आते हैं। इन जीवों को बच्चे पकड़कर खेलते देखे गए हैं। वास्तव में इनका नाम रेन बग या रेड वेल्वेट माइटस भी है। ये नर एवं मादा अलग-अलग होते हैं। ये दवाओं में काम आते हैं जिनका वैज्ञानिक नाम ट्रोंबिडियम स्पीशिज है।इन जीवों को बच्चे पकड़कर अपनी ज्योमेट्री बाक्स में रख लेते हैं और बच्चे इन्हें विद्या को बढ़ाने वाले मानते हैं। मिट्टी से निकलने वाले ये जीव देखने में अति मनमोहक होते हैं।
Comments
  • Vijaypal Sehlangia बहुत सुन्दर ,होशियार सिंह जी.
Write a comment...





आक
शाक नामक आक को मदार नाम से भी जाना जाता है। वास्तु शास्त्र की माने तो दूध वाले पौधे घर में शुभ नहीं माने जाते किंतु सफेद आक घर में उगाकर पूजा की जाती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में कैलोट्रोपिस जिंजाटी नाम से जाना जाता है। इस पौधे के जड़, पत्ती, फूल एवं दूध दवाओं में काम आते हैं। यह भी एक कारण है कि इसकी पूजा की जाती है। रेगिस्तान में अल्प जल वाले क्षेत्रों में भी हरा भरा मिलता है जो आयुर्वेद में भी कई दवाएं बनाने के काम आता है। इसके फलों की रूई तोशक भरने के काम आती है। बीज रुई के सहारे बहुत दूर तक उड़ सकता है। कुछ लोग इसे शिवभोले का प्रिय बताते हैं। वास्तव में यह आक लाभकारी भी है तो जहरीला भी है। जब समुद्र मंथन से शिव ने कालकूट पी लिया था तो आक को जहर तथा जहर पसंद करने वाला शिव बताया जाता है।
बया पक्षी
सीख दई थी बांदरे और घर बया का जाय-यह कहावत उस छोटे से पक्षी पर लागू होती है जो विवर बर्ड नाम से जाना जाता है। किसी बड़े से बड़े टेलर में वो शक्ति नहीं कि वो बया जैसा घोंसला सील सके। छोटा सा रंगीन पक्षी ग्रुप में रहने वाला पायोसिएस फिलिपिनियस नाम से जाना जाता है। इसकी एकता, संग में खुश रहना, चीं चीं से मन बहलाना एवं प्रकृति का अजूबा टेलर इंसान को शिक्षा दे रहा है।
ऐ इंसान सोच खोया पाया है क्या
इंसानियत को बयां करता है बया।
Write a comment...





अश्वगंधा
गांवों में अकसंड नाम से प्रसिद्ध प्राचीन आयुर्वेदिक दवाओं में काम आने वाली शाक अश्वगंधा है जिसे विथानिया सोमनीफेरा कहते हैं। नागौरी अश्वगंधा अधिक बेहतर माना जाता है। यह आरिष्ठ, आसव एवं पाक के रूप में काम आता है। इस पौधे के पत्ते मसलकर सूंघे तो घोड़े जैसी बदबू देते हैं जिसके चलते इसे अश्व एवं गंधा नाम से जानते हैं। यह खून से शूगर घटाने,कैंसर प्रतिरोधी, क्रोध के हार्मोन को घटाने वाला, डिप्रेशन एवं क्रोध को कम करने वाला, पुरुषों के हार्माेन को बढ़ाने वाला, दर्दनिवारक, ...
See More
Comments
  • Vijay Yadav Sir how use this plant and which part of this is to be used?
Write a comment...





Comments
  • Rajesh Kumar संगीत संग संवरने पर हृदय स्पर्शी बेहतरीन पंक्तियां आपकी जी
Write a comment...





मकड़ा घास
मकड़ा घास जिसे कौवे के पैर जैसी घास नाम से जाना जाता है। एक खरपतवार है जो पशुधन के लिए लाभप्रद है। इस घास को डेक्टाइलोक्टेनियम इजेप्शियन नाम से जाना जाता है। अफ्रीका जैसे देश में अकाल पडऩे पर रोटी बनाने के काम आती है। यह एक खरपतवार है। कुछ जगह इसका जूस बुखार में काम आता है। यह खसरा एवं गुर्दे के रोगों में काम आता है। फोड़ा फुंसी में इसे पीसकर लगाते हैं वहीं इसके बीज हलवा एवं रोटी बनाने के काम आता है। बेहतर पशुचारा भी है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के गांवों में खरीफ फसल में खूब मिलता है।
निंबोरी/गरीबों का आम
निंबोरी वास्तव में नीम के पेड़ के फल हैं जिन्हें गरीबों का आम कहा जाता है। बारिश में ये फल पककर मधुर स्वाद के हो जाते हैं। नीम को अजारिचटा इंडिका कहते हैं। प्रमुख रूप से भारत में मिलने वाले इस पेड़ को औषधियों का खजाना भी कहा जाता हैं। पत्ते, फूल, फल, बीज, टहनी, छिलका एवं नीम का पानी हर पदार्थ गुणों से भरा है। यह एंडी फंगल, एंडी डायबेटिक, एंटी बेक्टिरियल आदि गई गुणों से परिपूर्ण है। बीज से तेल निकाला जाता है। छांव भी स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होती है।
Write a comment...





Write a comment...





पुदीना को मेंथा/मिंट विशेष महक वाली शाक है। इसे मेंथा एशिएटिका नाम से जाना जाता है। यह कच्चे रूप में चटनी,रायता आदि में तो सब्जी में डालकर खाया जाता है। कुछ के लिए एलर्जीकारक होता है। यह चाय,पेयपदार्थों, कैंडी,आइस्क्रीम, टूथपेस्ट, मुख प्रक्षालन, चबाए जाने वाले गम आदि पदार्थों में विभिन्न आयुर्वेदिक दवाएं, डिं्रक्स, बदन एवं पेट दर्द निवारक के रूप में काम आता है। इसके कई अन्य लाभ भी हैं। इसमें मेंथोल तेल मिलने से इसे मेंथोल भी कहते हैं। सूखे रूप में भी अति गुणकारी है। सफेद फूलों में बीज बनते हैं।

No comments: