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कभी
बहुतायत में जाल के पेड़ों पर लाल, पीली, हरी तथा कई अन्य रंगों की लगने
वाली पील अब कनीना की बेणी में दिखाई पड़ी वहीं जाटी या खेजड़ी पेड़ पर
भारी मात्रा में लगने वाला सांगर भी नजर आया। बारिश होने पर दिखाई देने
वाला रेन बग जिसे ग्रामीण तीज कहते हैं दिखाई दिया।
बथुआ
या बाथू अक्सर शाक के रूप में सर्दियों की खरपतवार है लेकिन कनीना के
वार्ड एक मोहल्ला मोदीका में आशा यादव लेखिका के घर पर बड़ी झाड़ी या
पेडऩुमा करीब दस फुट का भारी भरकम बथुआ खड़ा है। उनकी इच्छा है कि यह
पंद्रह फुट तक हो जाए तो लिमका बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो
जाएगा। इससे पूर्व भी उन्होंने एक ही मक्का के भुट्टा पर संयुक्त रूप से आठ
भुट्टे लगे हुए थे तथा एक ही बाजरे के पौधे पर 65 भुट्टे लगे हुए थे।
कनीना
के निवासी सूबे सिंह एवं राजेंद्र सिंह के ट्यूबवेल पर खड़ी ईलाइची के
झाड़ीनुमा पौधे पर भारी मात्रा में फूल देखने को मिल रहे हैं। कहने को तो
इस गर्म क्षेत्र में ईलाइची संभव नहीं परंतु अब फूल आ गए तो फल भी लगेंगे?
अब
चिडिय़ों का चहचहाट, पक्षियों का कलरव सिमट चुका है। न छांद रही न कच्चे
घर। न जीवों के लिए बेहतर पानी व्यवस्था न कोई चुग्गा। बेचारे जाए तो कहा
जाए? किसी पानी के स्रोत के पास सांझ की बेला में कुछ पक्षी आपस में बैठकर
बातें करते सुंदर लगते हैं। पक्षी प्रेमी राजेंद्र सिंह किसान के कुएं का
एक नजारा।
कनीना
से महज चार किमी दूर कंवर सिंह कलवाड़ी के फार्म हाउस पर अढ़ाई से तीन
किग्रा तक के बेलगिरी लगे हुए हैं। उनका कहना है कि वे इनको कभी बेचते नहीं
अपितु उनके पास कोई लेने आए तो दे देते हैं। अमीश यादव बच्चा करीब तीन
किग्रा को बेलगिरी दिखाते हुए।
कनीना
से किमी दूर बव्वा की शीतला माता मंदिर में माता मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
के लिए 251 महिलाओं ने कलश यात्रा एवं मूर्ति शोभा यात्रा निकाली। 28 मार्च
को मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा रात्रि को जागरण, 29 को भंडारा एवं 30 मार्च को
बासौड़ा का मेला लगने जा रहा है जहां बाल उतरवाने के लिए प्रदेश भर के लोग
पहुंचते हैं।
Hoshiar Singh Yadav is with Rao Khola Rinku and 2 others.
जैनाबाद
जिला रेवाड़ी स्थित संत शिरोमणि उधोदास आश्रम में संत लालदास महाराज 52
थांबों की गुदड़ी ओढ़कर होली खेलते हैं। यह प्रथा वर्षों से चली आ रही है।
दुलेंडी का बड़ा मेला बाबा उधोदास के वक्त से चला आ रहा है। अपार भीड़
जुटती है।
कनीना
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा के मंडी निवासियों ने होलिका दहन के लिए होलिका
की विशाल प्रतिमा रंग बिरंगे उपलों से होली को सजाकर उस पर रखी। रंगीन
उपलों को सजाकर रखना किसी बड़ी कलाकारी से कम नहीं था। उस पर पहली बार
होलिका दहन के लिए इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजन करके सभी का मन मोह लिया।
कनीना
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा के मंडी निवासियों ने होलिका दहन के लिए आगंतुकों
के स्वागत के लिए तोरण बनाकर स्वागत किया। सुंदर तोरण से गुजरकर होलिका तक
पहुंचा जा रहा था।



















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