Monday, January 13, 2020

मकर संक्रांति 
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उत्तरायण का पर्व कहलाए







दान पुण्य का ये पर्व हमारा
गायों की सेवा करता जगत
बुजुर्ग जगाने का पर्व हमारा,
पितामह भीष्म को याद करे
त्यागे थे जिन्होंने आज प्राण
हवन यज्ञ, पुनीत  कर्म करो
पर्यावरण शुद्ध हो शुद्ध घ्राण,
खीर चूरमा, दाल चूरमा बने
लगाते खुशी खुशी सब भोग
जल्दी प्रात: उठकर स्नान करे
नहीं होगा शरीर में कोई रोग,
सूर्य उत्तर दिश में बढऩे लगे
दिनों में हो  लगातार बढोतरी
फसल पकान की ओर चली
आएगी बसंत ऋतु की घड़ी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
तिल कुटनी का व्रत किया है
लंबी हो पति की उम्र कामना
सदा यूं ही जीवन  चलता रहे
कभी दुखों का ना हो सामना।
ताऊ बोला ताई से..............
जीवनभर एक पत्नी करती है
कितने ही  व्रत और उपवास
पत्नी पति की सहभागिनी हो
नहीं होती पति  की वो दास,
पत्नी कितना  त्याग करती है
जीवन भर पाती ना  वो सुख
पुरुष प्रधान  यह देश हमारा
पत्नी के भाग्य में मिलते दुख।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




चांद निकला
सज धज कर पत्नी अपने पति के लिए सुबह से व्रत किए हुए थी और चांद निकलने का इंतजार कर रही थी। कभी छत पर जाती तो कभी आवाज आती चांद निकल आया है। पत्नी बार बार छत पर जाती किंतु निराश लौट आती। वैसे भी सुबह से कुछ खाया नहीं था ऐसे में परेशान होना स्वाभाविक है। आखिरकार उसका पति छत पर चढ़ गया और कहा-लो चांद निकल आया। पत्नी झटपट छत पर पहुंची और पूछा-कहा है चांद? तो पति ने कहा-आज तो तुम ही चांद सी लग रही हो तो दूसरे चांद की क्या जरूरत। पति के मजाक से पत्नी झल्लाई और बैठकर चांद का इंतजार करने लगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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