पौधों की पूजा
हरे पेड़ पौधों पर वर्षभर कुल्हाड़ा चलता है और पेड़ पौधों की पूजा कम ही होती है किंतु जन्माष्टमी के दिन जाटी पौधे की पूजा की जाती है वहीं पर गोगा नवमी के दिन गुगा नामक पौधे की पूजा होती है। दोनों ही पौधे अति महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जाटी सुख दुख का साथी तथा राजस्थान में खेजड़ी नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस है। जाटी की पूजा वर्षों से चली आ रही है। यह एक ऐसा पौधा है जो अपने नीचे अन्य पौधों को सहारा देता और नाइट्रोजन की पूर्ति करता है। उसके फल सांगर भी होटलों में महंगे दामों पर बिकते हैं और सब्जी के काम में लाया जाता है। उधर जाहरवीर गोगा की याद में गुगा नामक पौधे की पूजा की जाती है जिसे अपामार्ग, लटजीरा चिरचिटा आदि नामों से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम अचारिंथस असपेरा कहते हैं। इसमें औषधीय गुण है इस कारण से उसकी पूजा होती है यह कई बीमारियों में सहायक एवं घर के आस-पास भी मिल जाता है।
हरे पेड़ पौधों पर वर्षभर कुल्हाड़ा चलता है और पेड़ पौधों की पूजा कम ही होती है किंतु जन्माष्टमी के दिन जाटी पौधे की पूजा की जाती है वहीं पर गोगा नवमी के दिन गुगा नामक पौधे की पूजा होती है। दोनों ही पौधे अति महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जाटी सुख दुख का साथी तथा राजस्थान में खेजड़ी नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस है। जाटी की पूजा वर्षों से चली आ रही है। यह एक ऐसा पौधा है जो अपने नीचे अन्य पौधों को सहारा देता और नाइट्रोजन की पूर्ति करता है। उसके फल सांगर भी होटलों में महंगे दामों पर बिकते हैं और सब्जी के काम में लाया जाता है। उधर जाहरवीर गोगा की याद में गुगा नामक पौधे की पूजा की जाती है जिसे अपामार्ग, लटजीरा चिरचिटा आदि नामों से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम अचारिंथस असपेरा कहते हैं। इसमें औषधीय गुण है इस कारण से उसकी पूजा होती है यह कई बीमारियों में सहायक एवं घर के आस-पास भी मिल जाता है।
















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