जन्म दिन
जन्म दिन
दे रहे शुभकामनाएं
आया है शुभ दिन
इंतजार था इसी का
काटे दिन गिन गिन,
केक काट रहे बड़ा
मोमबत्ती बूझा सात
हंसी खुशी छा गई
प्रभु बच्चे सब साथ,
भाई बहन हंस रहे
कोई दे बड़ा उपहार
मां बाप खुश हो रहे
लुटा रहे निज प्यार,
आएगा फिर ये दिन
इंतजार हो एक साल
खूब शिक्षा पाए अब
प्रभु रखेगा खुशहाल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जल
नहीं बना सकते जल
चला गया पाताल में
अगर नहीं सुधर पाए
जीना हो बेहाल में,
जल घटता जा रहा
नहीं मिले कोई हल
आज नहीं सुधरे तो
समस्या बनेगी कल,
जल होता है अमृत
तो जल को बचाइये
जरूर सफलता मिले
अगर हाथ बढ़ाएंगे
जीवन सफल होगा
भविष्य को बचाएंगे,
लो अब करें प्रयास
बढ़ाएं मिलके हाथ
जल बच गया अगर
शुभ होंगे दिन रात।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना**
सर्दी
घेर रही सर्दी सभी
टूट गए सारे रिकार्ड
नष्ट हो गई सब्जियां
जल हैं झाड़ झंखाड़,
कोई कांप रहा बैठा
कोई सोया लिपटकर
सरीसृप धरा में छुपे
पक्षी छुपे अपने घर,
पाला जमा घास पर
सफेद चादर सी छाई
ठिठुरन बढ़ती जाए
आग सेकते ताऊ ताई,
सर्दी पूरे यौवन पर है
अभी और रुलाएगी
सर्दी जब चली जाए
बसंत खूब हंसाएगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
मकर संक्रांति आ रही है
दान पुण्य करेंगे जमकर
भीष्म पितामह प्राण त्यागे
आता यह पवित्र बनकर।
ताऊ बोला ताई से.......
एक मन गेहूं दान करेंगे
दान देंगे गुड़ की बोरी
गौमाता कहलाती जग में
बांध लो उनसे प्रीत डोरी,
भूखों को खाना खिलाएंगे
गरीबों में देंगे वस्त्र दान
जो जग में दान पुण्य करे
उसकी बनती सुंदर शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
झूठन
गौशाला में लोग भारी मात्रा में पशुचारा एवं गुड़ दान दे रहे थे। सभी की आस्था गौशाला में देखने को मिल रही थी किंतु गुड़ को एक जगह इकट्ठा करने वाले दो जन आने वाले गुड़ को चख चखकर मजे ले रहे थे। सभी की नजरें इन झूठन करने वालों पर टिकी हुई थी। किंतु गुड़ चखने वालों को तो महज अपने मजे दिखाई पड़ रहे थे तभी एक गुड़ दान देने वाले सज्जन ने हिम्मत करके कहा-तुम दोनों गुड़ को झूठा कर रहेे हो। गाय हमारी गौ-माता कहलाती है। माता को
अपनी झूठन खिलाकर तुम्हें शर्म आनी चाहिए। दोनों गुड़ खाने वालों के होश ठिकाने आ गए। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जन्म दिन
दे रहे शुभकामनाएं
आया है शुभ दिन
इंतजार था इसी का
काटे दिन गिन गिन,
केक काट रहे बड़ा
मोमबत्ती बूझा सात
हंसी खुशी छा गई
प्रभु बच्चे सब साथ,
भाई बहन हंस रहे
कोई दे बड़ा उपहार
मां बाप खुश हो रहे
लुटा रहे निज प्यार,
आएगा फिर ये दिन
इंतजार हो एक साल
खूब शिक्षा पाए अब
प्रभु रखेगा खुशहाल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जल
नहीं बना सकते जल
चला गया पाताल में
अगर नहीं सुधर पाए
जीना हो बेहाल में,
जल घटता जा रहा
नहीं मिले कोई हल
आज नहीं सुधरे तो
समस्या बनेगी कल,
जल होता है अमृत
तो जल को बचाइये
जरूर सफलता मिले
अगर हाथ बढ़ाएंगे
जीवन सफल होगा
भविष्य को बचाएंगे,
लो अब करें प्रयास
बढ़ाएं मिलके हाथ
जल बच गया अगर
शुभ होंगे दिन रात।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना**
सर्दी
घेर रही सर्दी सभी
टूट गए सारे रिकार्ड
नष्ट हो गई सब्जियां
जल हैं झाड़ झंखाड़,
कोई कांप रहा बैठा
कोई सोया लिपटकर
सरीसृप धरा में छुपे
पक्षी छुपे अपने घर,
पाला जमा घास पर
सफेद चादर सी छाई
ठिठुरन बढ़ती जाए
आग सेकते ताऊ ताई,
सर्दी पूरे यौवन पर है
अभी और रुलाएगी
सर्दी जब चली जाए
बसंत खूब हंसाएगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
मकर संक्रांति आ रही है
दान पुण्य करेंगे जमकर
भीष्म पितामह प्राण त्यागे
आता यह पवित्र बनकर।
ताऊ बोला ताई से.......
एक मन गेहूं दान करेंगे
दान देंगे गुड़ की बोरी
गौमाता कहलाती जग में
बांध लो उनसे प्रीत डोरी,
भूखों को खाना खिलाएंगे
गरीबों में देंगे वस्त्र दान
जो जग में दान पुण्य करे
उसकी बनती सुंदर शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
झूठन
गौशाला में लोग भारी मात्रा में पशुचारा एवं गुड़ दान दे रहे थे। सभी की आस्था गौशाला में देखने को मिल रही थी किंतु गुड़ को एक जगह इकट्ठा करने वाले दो जन आने वाले गुड़ को चख चखकर मजे ले रहे थे। सभी की नजरें इन झूठन करने वालों पर टिकी हुई थी। किंतु गुड़ चखने वालों को तो महज अपने मजे दिखाई पड़ रहे थे तभी एक गुड़ दान देने वाले सज्जन ने हिम्मत करके कहा-तुम दोनों गुड़ को झूठा कर रहेे हो। गाय हमारी गौ-माता कहलाती है। माता को
अपनी झूठन खिलाकर तुम्हें शर्म आनी चाहिए। दोनों गुड़ खाने वालों के होश ठिकाने आ गए। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




No comments:
Post a Comment