खाटू
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अर्ज सुनों बाबा मेरी
आश ले आया द्वारे
मनोकामना पूरी करो
जगत दाता मेरे प्यारे,
पैदल चलकर आया
बहुत दुख पाया हूं
जीवनभर दुखी रहा
जग ने भी सताया हूं,
तीन बाणधारी कहते
नीले घोड़े की सवारी
शीश के दानी कहाते
अर्ज सुनो यह हमारी,
वर्षों से आता रहा हूं
पास है बस अरमान
यही अर्ज हमारी है
रखना बस मेरा मान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
खाटू में मेला लगा है
कर लेती हूं तैयारी
मैं निशान चढ़ाऊंगी
जाएंगी सखियां सारी।
ताऊ बोला ताई से.....
सवा मीटर कपड़ा ले
चल दो जल्दी भोर
पड़ाव कम करने हैं
नारों से करना शोर,
दर्शन कर प्रसाद ले
सीधे आना निज घर
मनोकामना हो पूरी
नहीं किसी का डर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
तीन बाणधारी
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भीष्म का पौत्र था
नाम था बरबरीक
बलवान से लडऩा
दी थी उन्हें सीख,
गुरु सेवा करने से
मिला था वरदान
साहस से भरा था
शक्ति में था महान,
मां से पा आशीष
युद्ध मैदान आया
उनके बाण देखके
सबने शीश नवाया,
ना होगा महापुरुष
ऐसा था बलशाली
शीश का दानी था
चकित जग माली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अकड़
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वार्षिक परीक्षाएं चल रही थी कि एक लड़की एक घंटा लेट आने के कारण परीक्षा में न बैठने दिया। लड़की ने अकड़ दिखानी शुरू कर दी। उसने कहा कि -मैं पढऩे में बहुत बुद्धिमान हूं, मुझे परीक्षा से कैसे रोका जा सकता है। शिक्षक ने परीक्षा में बैठा तो दिया किंतु लड़की कहने लगी कि अब मेरा एक घंटा बीत गया वो कौन देगा? शिक्षक ने कहा-वो सरकार देगी। अब तो तुम परीक्षा देकर अपने घर जाओ। इतना सुनकर लड़की रोने लगी। अन्य शिक्षक समझ ही नहीं पाए कि दोषी कौन है?
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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अर्ज सुनों बाबा मेरी
आश ले आया द्वारे
मनोकामना पूरी करो
जगत दाता मेरे प्यारे,
पैदल चलकर आया
बहुत दुख पाया हूं
जीवनभर दुखी रहा
जग ने भी सताया हूं,
तीन बाणधारी कहते
नीले घोड़े की सवारी
शीश के दानी कहाते
अर्ज सुनो यह हमारी,
वर्षों से आता रहा हूं
पास है बस अरमान
यही अर्ज हमारी है
रखना बस मेरा मान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
खाटू में मेला लगा है
कर लेती हूं तैयारी
मैं निशान चढ़ाऊंगी
जाएंगी सखियां सारी।
ताऊ बोला ताई से.....
सवा मीटर कपड़ा ले
चल दो जल्दी भोर
पड़ाव कम करने हैं
नारों से करना शोर,
दर्शन कर प्रसाद ले
सीधे आना निज घर
मनोकामना हो पूरी
नहीं किसी का डर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
तीन बाणधारी
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भीष्म का पौत्र था
नाम था बरबरीक
बलवान से लडऩा
दी थी उन्हें सीख,
गुरु सेवा करने से
मिला था वरदान
साहस से भरा था
शक्ति में था महान,
मां से पा आशीष
युद्ध मैदान आया
उनके बाण देखके
सबने शीश नवाया,
ना होगा महापुरुष
ऐसा था बलशाली
शीश का दानी था
चकित जग माली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अकड़
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वार्षिक परीक्षाएं चल रही थी कि एक लड़की एक घंटा लेट आने के कारण परीक्षा में न बैठने दिया। लड़की ने अकड़ दिखानी शुरू कर दी। उसने कहा कि -मैं पढऩे में बहुत बुद्धिमान हूं, मुझे परीक्षा से कैसे रोका जा सकता है। शिक्षक ने परीक्षा में बैठा तो दिया किंतु लड़की कहने लगी कि अब मेरा एक घंटा बीत गया वो कौन देगा? शिक्षक ने कहा-वो सरकार देगी। अब तो तुम परीक्षा देकर अपने घर जाओ। इतना सुनकर लड़की रोने लगी। अन्य शिक्षक समझ ही नहीं पाए कि दोषी कौन है?
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**







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