Friday, February 07, 2020

पाप 
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पाप की गठड़ी सिर रखे
छल कपट मुंह में बसते
खुद को बुद्धिमान समझ
पर जन पर  ताने कसते,
अपने को  श्रेष्ठ  समझते
दूसरों पर डाले हेय दृष्टि
अपने घर में चिंघाड़ मारे
जंगली सम  उनकी सृष्टि,
कलुषित कर्म,  नहीं धर्म
वो जाने क्या है ज्ञान मर्म
कोई कुछ भी बात करता
उन्हें लगता है  झूठा भ्रम,
ऐसे इंसान कुकर सम हो
न जाने कब काटे किसको
भोंडे नृत्य  करने वाले वो
करते रहते घर में डिस्कों।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**  



परीक्षा 

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सिर पर आई परीक्षा
किसान हो गए सतर्क
फसल पकने जा रही
नहीं करते तर्क वितर्क,
स्कूली बच्चे तनाव में
देनी होगी यह परीक्षा
गुरुजन मेहनत में जुटे
दे चुके  शिक्षा-दीक्षा,
परीक्षा का नाम सुनते
होश ठिकाने आ जाते
कई तरह के रोग लगे
खाना भी वो ना खाते,
तीन माह कठिन डगर
विद्यार्थी, किसान,नेता
जितनी मेहनत वो करे
उतना फल ईश्वर देता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना**   

गुजारा

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मां बेटी अपनी बदनसीबी पर रोते बिलखते भरे बाजार में मूली, गाजर जैसी सब्जी खाकर पेट भर रही थी। उनके पास खाने को दाना तक नहीं था। मंदिर में आने जाने वाले उनको देखकर आगे बढ़ जाते परंतु किसी ने भी उन पर तरस नहीं खाया। तभी एक बच्चा अपने पिता के साथ मंदिर क्या आया उन दोनों पर तरस आ गई। उसने अपने पिता से जिद की कि इस बेचारी बच्ची एवं उसकी मां को वो कुछ दे। बच्चे ने अपनी कीमती गेंद एवं चाकलेट बच्ची को पकड़ा दी। उसके पिता ने जेब से एक हजार रुपये निकाले और उसे देकर आगे बढ़ गए। आज बच्ची ने जी-भर कर चाकलेट का मजा लिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.........
हरिद्वार चलेंगे मिलकर
गंगा में डुबकी लगाएंगे
इस जन्म में  पाप किए
वो सभी  धोकर आएंगे।
ताऊ बोला ताई से........
पाप नहीं धुलते गंगा में
गंगा बेशक  होती मैली
जनहित में जो काम करे
उसने खूब खुशियां झेली,
पाप कर्म करने से बचेंगे
तब जाकर  होगा उद्धार
नहीं कुछ साथ चलता है
बस साथ चले हित कार।
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होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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