Monday, February 24, 2020

बर्बरीक 
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कलियुग के अवतारी
खाटू श्याम कहलाते
जब जब भक्त पुकारे
दौड़े-दौड़े  चले आते,
भीम के  पौत्र कहाए
तीन बाणधारी नाम है
हारे का सहारा होते हैं
भक्तों सेवा ही काम है,
विजय उनके  गुरु हुए
परम शिष्य बनाया था
उनके रण  को  देखने
भगवान श्रीकृष्ण आया,
सदा-सदा  रहेगा  नाम
शीश के दानी कहलाते
उनका सर्वनाश करते हैं
जो उनके भक्त  सताते।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




ताऊ ताई संवाद

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ताई बोली ताऊ से.....
खाटू का मेला आया है
मैं भी पदयात्रा पर जाऊं
घर से निशान ले जाकर
खाटूधाम पर जा चढ़ाऊं।
ताऊ बोला ताई से......
मैं भी पैदल चल जाऊंगा
उस देव के दर्शन पाऊंगा
सारी मन्नतें पूर्ण कर देगा
जा खाटू में धोक लगाऊं,
कष्ट बेशक सहना पडग़ा
पर उसकी महिमा अपार
चलते रहेंगे दिनरात हम
नहीं कदमों से कभी हार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


आस्था

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पेट के बल चलते हुए खाटू श्याम मंदिर की ओर आते हुए भक्त को देखकर महिलाओं ने पूछा-भक्त इतना कठोर तप क्यों कर रहे हो? भक्त ने उत्तर दिया-मातेय, इस खाटू श्याम ने अपने पितरों के लिए अपने शीश का दान दे दिया था। उससे बड़ा तो कोई तप मैं नहीं कर रहा हूं। इस देव ने जनहित में काम किया। भक्तों का मान बढ़ाया है। मैं भी उनसे कुछ मांगने आया हूं। उनकी बात सुनकर महिलाओं के मुख से वाह वाह, शब्द निकले।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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