Wednesday, February 19, 2020

मेले 
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लग गए हैं मेले
आ गया फागुन
हंसते गाते जाते
मिलेगा  शकून,
दर्शन करने जा
हंसते हुए आए
ऐसी महिमा हो
मन में बस जाए,
शक्कर, गुड़ बांटे
और चढ़ाए दही
कहीं रंग  बरसे
खुशी मने  कहीं,
आते  जाते रहते
ये मेले  हर बार
कोई बिछुड़ा है
मानना नहीं हार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**







अंधी

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बेचारी अंधी की शादी क्या हुई उसका पति तो शराब के नशे में धुत रहने लगा। एक पुत्र होने के बाद तो सारी जमीन जायदाद बेचकर शराब का आदि हो गया। घर बार न होने के कारण बच्चे ने अपनी मां के सहारा बनना पड़ा। कहीं रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर खाते और इधर उधर समय बीताने लगे। जो भी उनको देखता बस तरस खाकर कहता कि पहले तो अंधी और उस पर यह दुर्दशा। भगवान ने उनके साथ क्या बीताई?
 **होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.....
जगह जगह मेले लगे हैं
मेला देखने का मन करे
पैसे धैली  पास नहीं हैं
इस बात का डर लगता।
ताऊ बोला ताई से......
नहीं है पैसे की जरूरत
मेले में कई लोग मिलते
जान पहचान  बढ़ जाए
मन के बाछे खिल जाए,
भगवान के घर देर नहीं
कब भाग्य खेल दिखाए
आज रोता  जो जाता है




कल हंसता  हुआ आए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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