खुशी
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मेले और पर्वों से सदा
मिलती है बहुत खुशी
वरन जगत के कष्टों से
मिलती है दुनिया दुखी,
जब कभी पर्व आते हैं
भर देते हैं मन उल्लास
ऐसा लगता पास कोई
दे रहा है एक आभास,
जब कोई मेला आएगा
मन को अति हर्षाएगा
बहुत दुख मिलते सदा
मानव छुटकारा पाएगा,
पर्व और मेले आते रहे
ले आए खुशी पैगाम
हर हर बोले मन सदा
हो जाए जगत में नाम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से....
यह जग दर्द का दरिया
यहां जल जल मरते हैं
दुष्ट, राक्षस से जगवाले
सदा डर डर के मरते हैं।
ताऊ बोला ताई से......
दुष्ट की प्रवृत्ति न बदले
काटते रहते हैं पल पल
दुष्ट, निकष्ट, राक्षस का
नहीं सीधा सा कोई हल,
युगों से दुख देते आए हैं
अभी और भी दुखाएंगे
देव कुछ न बिगाड़ पाए
सज्जन भी आंख चुराएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
परेशान
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दूसरी बीवी होने का रोब बहुत झाडऩे वाली रजनी अपने पति को तो तंग करती ही थी वहीं पहली पत्नी के बच्चे के भी बेहद तंग करती थी। जिसे देखकर लगता था कि यह औरत कोई औरत नहीं अपितु एक मुसीबत बनकर आई है। आस पास के लोग भी उससे बेहद तंग थे। आखिरकार पत्नी ने बच्चे को लेकर कहीं जाने का इरादा कर लिया। पत्नी ने उन्हें घर छोड़कर जाने की झटपट बात कह डाली। आखिरकार रोते हुए पति और उसका बच्चा घर से निकल गए। लोगों को भी आंसू आ गए किंतु उस औरत को नहीं जिसे देखकर लोग चकित थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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मेले और पर्वों से सदा
मिलती है बहुत खुशी
वरन जगत के कष्टों से
मिलती है दुनिया दुखी,
जब कभी पर्व आते हैं
भर देते हैं मन उल्लास
ऐसा लगता पास कोई
दे रहा है एक आभास,
जब कोई मेला आएगा
मन को अति हर्षाएगा
बहुत दुख मिलते सदा
मानव छुटकारा पाएगा,
पर्व और मेले आते रहे
ले आए खुशी पैगाम
हर हर बोले मन सदा
हो जाए जगत में नाम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से....
यह जग दर्द का दरिया
यहां जल जल मरते हैं
दुष्ट, राक्षस से जगवाले
सदा डर डर के मरते हैं।
ताऊ बोला ताई से......
दुष्ट की प्रवृत्ति न बदले
काटते रहते हैं पल पल
दुष्ट, निकष्ट, राक्षस का
नहीं सीधा सा कोई हल,
युगों से दुख देते आए हैं
अभी और भी दुखाएंगे
देव कुछ न बिगाड़ पाए
सज्जन भी आंख चुराएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
परेशान
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दूसरी बीवी होने का रोब बहुत झाडऩे वाली रजनी अपने पति को तो तंग करती ही थी वहीं पहली पत्नी के बच्चे के भी बेहद तंग करती थी। जिसे देखकर लगता था कि यह औरत कोई औरत नहीं अपितु एक मुसीबत बनकर आई है। आस पास के लोग भी उससे बेहद तंग थे। आखिरकार पत्नी ने बच्चे को लेकर कहीं जाने का इरादा कर लिया। पत्नी ने उन्हें घर छोड़कर जाने की झटपट बात कह डाली। आखिरकार रोते हुए पति और उसका बच्चा घर से निकल गए। लोगों को भी आंसू आ गए किंतु उस औरत को नहीं जिसे देखकर लोग चकित थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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