नींबू
एशिया की उपज है और खट्टा स्वाद एवं विटामिन सी से भरपूर होने के कारण
स्कर्वी रोग को दूर भगाता है। यह पेट की कई प्रकार की बीमारियां एवं गुर्दे
की बीमारी दूर करता है। विस्तार से मेरे ब्लाग पर देखे।
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अनार
एक झाड़ी पर लगने वाला फल है जो इतना महत्वपूर्ण है कि एक अनार सौ बीमार
की कहावत लागू हुई। यह खून की बीमारी, कैंसर, अपची तथा गुर्दे की बीमारी को
दूर कर सकता है। इसके बारे में विस्तार से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
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सदाबहार
जिसे विंका रोजा भी कहते हैं। यह सदाबहार पौधा है जिस पर कई प्रकार के फूल
खिलते हैं। सफेद व पीला दवाओं में काम आता है। कई रोगों में भी लाभकारी
है। इसके बारे में विस्तार से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
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गुलमोहर
जिसे गुल या फ्लेम आफ फोरेस्ट भी कहते हैं। जब भीषण गर्मी पड़ती है तो इस
पौधे पर लाल रंग के बहुत अधिक फूल खिलते हैं और दूर से आग लगा हुआ नजर आता
है। यह बदहजमी, बुखार एवं कई रोगों के काम आता है। विस्तार से मेरे ब्लाग
पर देखे।
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कटहल
जिसे जैकफ्रूट कहा जाता है, विटामिन सी, पोटाशियम, प्रोटीन एवं कैल्शियम
का बेहतर स्रोत है। यह न केवल सब्जी है अपितु फल भी है जो बंगलादेश का
राष्ट्रीय फल है। कई वात पित रोग दूर भगाता है। इसके बार में अधिक जानकारी
मेरे ब्लाग पर प्राप्त करें।
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गुलदावदी
जिसे गोल्ड फ्लोवर नाम से जाना जाता है, एक बहुवर्षीय शाक है। इसकी चाय
उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, बदन दर्द में काम आती है। यह सजावटी पौधा होता है।
गर्भकाल, शूगर के मरीज को तथा एड्स रोगी को नहीं लेना चाहिए। विस्तार से
मेरे ब्लाग पर पढ़े।
विलायती
आक एक जहरीला बहु वर्षीय पौधा होता है जो पानी के पास मिलता है। गुलाबी
फूल खिलते हैं व सफेद जूस निकलता है। यह जहरीला पौधा है। इसको सूखाकर
जलाने, कागज बनाने के काम में लेते हैं। दवाओं में भी काम आता है।
अमरूद
एक दूर तक महक देने वाला विटामिन ए, सी से भरपूर तथा पोटाशियम का बेहतर
स्रोत है। बाहर से विभिन्न रंगों का तो अंदर से पीले या लाल रंग का होता
है। यह मसूढ़ों को ठीक करने, बीपी को घटाने, सर्दी एवं जुकाम में गुणकारी
माना जाता है। विस्तार से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
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लाजवंती
जिसे छुईमुई, टच मी नोट एवं कई अन्य नामों से जाना जाता है एक खरपतवार है
जो शाक के रूप में मिलता है। यह दमा, उच्च रक्तचाप, कोलस्ट्रोल घटाने के
काम आता है। विस्तृत जानकारी मेरे ब्लाग पर पढ़ सकते हैं।
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जंगली
टिंडा जिसे ग्रामीण भाषा में टिंडसी कहते हैं। यह बेहतर सब्जी के साथ-साथ
कैंसर रोकने, हृदयघात कम करने, एंटी आक्सीडेंट प्रदान करने, प्रोटीन एवं
कार्बोहाइड्रेट का बेहतर स्रोत है। टिंडसी के बीज भी भूनकर खाए जाते हें।
इसके बारे में विस्तार से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
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बरगद,
बड़ या बनयान ट्री भारत का राष्ट्रीय पौधा है। यह कलकता में सबसे अधिक
उम्र का माना जाता है जो अढ़ाई एकड़ तक फैल जाता है। यह नपुंसकता दूर करने व
ताकत बढ़ाने के काम आता हे। अधिक जानकारी के लिए मेरे ब्लाग पर जाकर पढ़े।
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भारतीय
मूल का सदाबहार पौधा नीम घर का रामबाण डाक्टर कहलाता है। इससे सैकड़ों रोग
दूर किए जा सकते हैं। कम पानी को सहन करने वाले नीम के विषय में विस्तार
से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
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मकड़ा
घास कड़ी के जाले जैसी तथा कौवे के पैर जैसी नजर आने के कारण क्रो फुट घास
नाम से जानी जाती है जो अफ्रीका में अकाल के समय काम आती है। यह कई रोगों
में भी उपयोगी है। इसके बारे में अधिक जानकारी मेरे ब्लाग पर देखे।
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यह
है बाघेश्वरीधाम जहां पर 25 जुलाई शिवरात्रि को लाखों कांवर चढ़ाई जाती
हैं। स्वयंभू शिवलिंग एवं तपस्वियों की तप स्थली पर शिव भोले ने बाघ का रूप
धारण करके राजा दलीप की परीक्षा ली थी जिसके चलते बाघ के कारण बाघोत नाम
पड़ा।
हरिद्वार
से कांवर लेकर कनीना के बाघेश्वरी धाम पर अर्पित करने में करीब दस दिनों
का समय लग गया। यही वजह है कि आपसे दूर रहा। मेरी यात्रा का एक दृश्य।






























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