प्याज का देखो राज
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प्याज का देखो राज
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प्याज का देखो राज
नेता देते जनता को, चूसती रहती हरदम
लॉलीपाप खाकर ही, भूल जाते हैं सारे गम,
बच्चे, बूढ़े, स्त्री चूसे,चूसते जाए हर जवान
झूठ पर झूठ पेलते ,नेताओं की बनी पहचान,
होशियार सिंह कहे,सोच कर चूसना लालीपाप ...
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लॉलीपाप खाकर ही, भूल जाते हैं सारे गम,
बच्चे, बूढ़े, स्त्री चूसे,चूसते जाए हर जवान
झूठ पर झूठ पेलते ,नेताओं की बनी पहचान,
होशियार सिंह कहे,सोच कर चूसना लालीपाप ...
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जेएनवी
में पत्रकार होशियार सिंह यादव को सम्मानित करते हुए मुख्य संसदीय सचिव
हरियाणा सरकार अनीता यादव, प्रिंसिपल ए. के. जैन, उप-प्राचार्य डी के
फगेडिय़ा, अनिल कमांडो
स्वतंत्रता दिवस 2013 पर पत्रकार होशियार सिंह यादव को सम्मानित करते हुए प्राचार्य वेदप्रकाश यादव, भगत सिंह, सतेन्द्र सिंह आर्य।
आज
के युग में बच्चे भी बदल गए हैं। आज पैदा हुआ बच्चा भी चाय पीने व नमकीन
खाने को दौड़ता है किंतु छाछ, दूध एवं देसी सब्जी से नाक सिकोड़ता है। यह
विज्ञान का चमत्कार कहे या पैतृक गुणों में बदलाय या अन्य कुछ?
दो बच्चे उठा रहे हैं लौकी
कितनी होगी भारी भरकम
अनुमान लगाकर मौन क्यों
नहीं है दस किलो से कम।
कितनी होगी भारी भरकम
अनुमान लगाकर मौन क्यों
नहीं है दस किलो से कम।
कलम न पकड़ी पकड़ी तस्वीर
नंगे पैर और कपड़े हो गए चीर
जहां तहां मिले कहीं ये ही मलंगे
नंगड़,भूखों ये मिल जाए भीखमंगे
नंगे पैर और कपड़े हो गए चीर
जहां तहां मिले कहीं ये ही मलंगे
नंगड़,भूखों ये मिल जाए भीखमंगे
जगत
में नागों का नाम लेते ही इंसान के जहन में एक खौफ दौडऩे लग जाता है किंतु
अपने आस पास के नागनाथ रूपी इंसानों को नहीं पहचान पाता जिसके फलस्वरूप
इंसान उन मानव रूपी नागों से इतनी बुरी तरह डस लिया जाता है कि जीवन एवं
मृत्यु के बीच ताउम्र जूझता रहता है। ऐसे में उसे उन नागनाथों को इस
नागपंचमी पर पहचानकर दूर रहने की जरूरत है।
नाग
नाग डसा बच भी जाए
इंसान डसा ना बच पाए
दूध पिलाओ नागों को ही
इंसानी नागों को दूर भागाए,...
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नाग डसा बच भी जाए
इंसान डसा ना बच पाए
दूध पिलाओ नागों को ही
इंसानी नागों को दूर भागाए,...
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10 अगस्त को अटेली मंडी(हरियाणा)में बतौर साहित्यकार एवं लेखक, होशियार सिंह यादव कनीना को सम्मानित करते हुए युवा नेता।
इंसान का भाग्य भी पतंग समान है
कभी चढ़ जाए तो कभी गिर जाए
यही इसकी एक अनोखी पहचान है
दे रही वो पतंग एक पैगाम जन को
चढऩा और गिरना जन की शान है।
कभी चढ़ जाए तो कभी गिर जाए
यही इसकी एक अनोखी पहचान है
दे रही वो पतंग एक पैगाम जन को
चढऩा और गिरना जन की शान है।
मां
का स्थान जगत में सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वोच्च माना गया है। मां के ऋण को
चुका पाना असंभव है। मां के आशीर्वाद से भगवान् का प्यार मिल जाता है किंतु
मां से रुष्ट होकर तीन जहां का सम्मान खो देता है। मां से ओतप्रोत कनीना
के लेखक होशियार सिंह की कृति काव्य गंगा से कुछ पंक्तियां प्रस्तुत हैं--
Hoshiar Singh devote his Third Kanwar to Bagheshwar Dham on Aug 4, 2013 at 10.15 AM
Hoshiar Singh as a pedestrian with Kanwar from Haridwar to Bagheshwar Dham Haryana about 350 Km
Route from Bagheshwari Dham Kanina Haryana to Haridwar for holy pilgrim yatra on foot about 350 Km








































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