Monday, February 03, 2020

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ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाला इंद्रायण जिसे गरबूंदा नाम से जाना जाता है। यह पेट की बीमारियों एवं कैंसर जैसी घातक बीमारी को ठीक करने में अहं भूमिका निभाता है। गांवों में इसकी फांकी प्रसिद्ध है। यदि इच्छा हो तो विस्तृत जानकारी मेरे ब्लाग पर पढें या गरबूंदा को क्लिक करें।
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कैर, टींट, करीर, केरिया, पीचू एक औषधीय पौधे के रूप हैं। पीट की कई प्रकार की बीमारियों में काम आने वाला टींट, अचार, कढ़ी तथा कई अन्य रोगों में काम आता है। इच्छा हो तो विस्तार से टींट को मेरे ब्लाग पर पढ़ें।
अमरबेल, आकाश बेल, डोडर एक परजीवी पौध होता है जो रक्तशोधन, पीत-कफनाशी में काम आता है वहीं फोड़ा फुंसी के इलाज में बहु उपयोगी है। विस्तृत जानकारी के लिए लिंक को क्लिक करें।
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सांटी जिसे आयुर्वेद में पुनर्नवा नाम से जाना जाता है। सफेद फूल वाली सांटी ब्लड शूगर, पेचिस, हृदय रोग, कैंसर तथा खून की कमी वालों के लिए बेहतर शोक है। इसके बारे में विस्तृत मेरे ब्लाग पर जाकर पढ़ सकते हैं। कृपया उपरोक्त सांटी लिंक को क्लिक करे।
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अति गुणकारी सेहत उपयोगी छोटी गोखरू ग्रामीण क्षेत्रों में भारी मात्रा में हाता है जो भाखड़ी/भाखरी, भाखड़ा तथा अन्य ग्रामीण नामों से जाना जाता है। हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी को दूर करने में रामबाण है।
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भूख बढ़ानी हो तो पलपोटा खाइये। खेतों में स्वयं पैदा होने वाले पलपोटा इंसान ने अपने पेट की भूख समाप्त करने के लिए समाप्त कर दिए हैं।
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बंधुओं,
भारत के राज्य हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ से कई जंगली पौधे या तो कम हो गए हैं या वे मिटने की कगार पर हैं। मेरा उद्देश्य उन पौधों के बारे में कम से कम जानकारी को बचाए रखने का है। उन पौधों के वो नाम दिए गए हैं जिनसे हम उन्हें ग्रामीण भाषा में जानते हैं किंतु साथ में उनके वैज्ञानिक नाम भी दिए गए हैं। उनके गुण एवं स्वभाव को अति मेहनत से अपने शब्दों में पिरोकर अपने ब्लाग पर इस सोच से डाल रहा हूं ताकि आपके कहीं काम आए। आशा है कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी यह ज्ञान कारगर साबित होगा। अधिक जानकारी के लिए लिंक को या मेरे ब्लाग पर क्लिक कर सकते हैं। पूर्ण स्नेह के साथ सभी सुधी ब्लाग एवं गूगल पाठकों को प्रणाम।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना***
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