रेडियो
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मनोरंजन का उपहार
सौ साल पहले चला
262 रेडियो स्टेशन
1923 में प्रथम खुला,
मन की बात सुनते हैं
आज ग्रामीण के लोग
सुन-सुन गीत मुहावरे
कट जाते हैं सारे रोग,
मार्काेनी ने खोजा था
बने थे रेडियो स्टेशन
मनोरंजन ऐसा करता
प्रसन्न हो तन व मन,
कभी घर-घर होता
अब बचे बहुत कम
मोबाइल अब आया
इस बात का है गम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महिला दिवस
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ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
महिला दिवस आया
मनाएंगे मिलकर सारे
सरोजिनी नायडू याद
शब्द उनके लगे प्यारे।
ताऊ बोला ताई से......
प्रथम राज्यपाल बनी
स्वर कोकिला कहाई
महिला वर्ग से संबंध
भारत में धाक जमाई,
कांग्रेस की अध्यक्षा
अच्छी कवयित्री थी
उनके होठों पर बैठी
देवी की गायत्री थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पैसे
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वो सुबक सुबक कर रोने लगा और ऐसा दिखावा किया कि उनका तो सब कुछ ही लुट गया हो। रामू ने जब उससे पूछा तो बताया कि उनका तो एकमात्र पुत्र था उनका देहांत हो चुका है। अब उनका कोई सहारा नहीं है। रामू ने पूछा-बता क्या मदद करूं? किसी अधिकारी को लिखकर कुछ राशि दिलवाने का प्रयास करूं या कुछ और?
तभी उसने रोते हुए कहा कि मेरी मदद करो-बस पव्वा के पैसे दे दो। इसी में ही गुजारा हो जाएगा। रामू ने जब यह सुना तो स्तब्ध रह गया। उस पर तरस खाने की बजाय क्रोध में आ गया किंतु क्रोध दिखाना उचित नहीं समझा और आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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मनोरंजन का उपहार
सौ साल पहले चला
262 रेडियो स्टेशन
1923 में प्रथम खुला,
मन की बात सुनते हैं
आज ग्रामीण के लोग
सुन-सुन गीत मुहावरे
कट जाते हैं सारे रोग,
मार्काेनी ने खोजा था
बने थे रेडियो स्टेशन
मनोरंजन ऐसा करता
प्रसन्न हो तन व मन,
कभी घर-घर होता
अब बचे बहुत कम
मोबाइल अब आया
इस बात का है गम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महिला दिवस
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ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
महिला दिवस आया
मनाएंगे मिलकर सारे
सरोजिनी नायडू याद
शब्द उनके लगे प्यारे।
ताऊ बोला ताई से......
प्रथम राज्यपाल बनी
स्वर कोकिला कहाई
महिला वर्ग से संबंध
भारत में धाक जमाई,
कांग्रेस की अध्यक्षा
अच्छी कवयित्री थी
उनके होठों पर बैठी
देवी की गायत्री थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पैसे
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वो सुबक सुबक कर रोने लगा और ऐसा दिखावा किया कि उनका तो सब कुछ ही लुट गया हो। रामू ने जब उससे पूछा तो बताया कि उनका तो एकमात्र पुत्र था उनका देहांत हो चुका है। अब उनका कोई सहारा नहीं है। रामू ने पूछा-बता क्या मदद करूं? किसी अधिकारी को लिखकर कुछ राशि दिलवाने का प्रयास करूं या कुछ और?
तभी उसने रोते हुए कहा कि मेरी मदद करो-बस पव्वा के पैसे दे दो। इसी में ही गुजारा हो जाएगा। रामू ने जब यह सुना तो स्तब्ध रह गया। उस पर तरस खाने की बजाय क्रोध में आ गया किंतु क्रोध दिखाना उचित नहीं समझा और आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**







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