जान ले
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जाना होगा एक दिन
अब तो यह जान ले
कौन अपना पराया है
अच्छे से पहचान ले,
बहुत कुछ कमाया है
पर साथ नहीं जाएगा
सोच ले क्या तेरे साथ
मरकर साथ निभाएंगा,
बहुत घमंड होता था
सारा होगा चकनाचूर
जिस घमंड पर जीता
वो तोड़ेगा तेरा गरूर,
बेटे, पौते बहुत सुहाते
पूछ ले ये कौन है तेरे
सब कुछ धरा रहेगा
करता है जो तेरे मेरे।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**
दूसरी मां
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बच्चे को दिनरात सताया जा रहा था। उसे रोटी रोटी देना तो दूर पानी भी नहीं दिया जाता। हर वक्त उसकी पिटाई की जाती थी। पड़ोसी सारी घटना को बखूबी देखते थे। एक दिन जब दूसरी मां बच्चे को पीट रही थी तो पड़ोसन ने कह ही दिया-दूसरी मां कभी मां का स्थान नहीं ले सकती। उसका अपना खून नहीं होता है। वो तो यूं ही सितम ढहाएगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
महाशिवरात्रि पर्व आया
गाजर,बेर का करो प्रबंध
शिवभोले को अर्पित करे
इच्छा पूरी हो जाए चंद।
ताऊ बोला ताई से.........
महाशिवरात्रि पर्व पर ही
अमरनाथ गुफा में रातभर
शिव ने अमर कथा सुनाई
कथा सुनकर बोले हर हर,
हुंकारे भर लिए कबूतर ने
पार्वती तब गई थी सोय
अमर हो गए कबूतर भी
होनी सदा होकर ही होय।
**होशियार सिंह, कनीना,हरियाणा**
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जाना होगा एक दिन
अब तो यह जान ले
कौन अपना पराया है
अच्छे से पहचान ले,
बहुत कुछ कमाया है
पर साथ नहीं जाएगा
सोच ले क्या तेरे साथ
मरकर साथ निभाएंगा,
बहुत घमंड होता था
सारा होगा चकनाचूर
जिस घमंड पर जीता
वो तोड़ेगा तेरा गरूर,
बेटे, पौते बहुत सुहाते
पूछ ले ये कौन है तेरे
सब कुछ धरा रहेगा
करता है जो तेरे मेरे।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**
दूसरी मां
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बच्चे को दिनरात सताया जा रहा था। उसे रोटी रोटी देना तो दूर पानी भी नहीं दिया जाता। हर वक्त उसकी पिटाई की जाती थी। पड़ोसी सारी घटना को बखूबी देखते थे। एक दिन जब दूसरी मां बच्चे को पीट रही थी तो पड़ोसन ने कह ही दिया-दूसरी मां कभी मां का स्थान नहीं ले सकती। उसका अपना खून नहीं होता है। वो तो यूं ही सितम ढहाएगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
महाशिवरात्रि पर्व आया
गाजर,बेर का करो प्रबंध
शिवभोले को अर्पित करे
इच्छा पूरी हो जाए चंद।
ताऊ बोला ताई से.........
महाशिवरात्रि पर्व पर ही
अमरनाथ गुफा में रातभर
शिव ने अमर कथा सुनाई
कथा सुनकर बोले हर हर,
हुंकारे भर लिए कबूतर ने
पार्वती तब गई थी सोय
अमर हो गए कबूतर भी
होनी सदा होकर ही होय।
**होशियार सिंह, कनीना,हरियाणा**


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