Sunday, February 02, 2020

बाघेश्वरी धाम
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विश्व प्रसिद्ध बाघेश्वरी धाम कनीना से महज 13 किमी दूर पड़ता है। श्रावण माह की शिवरात्रि पर यहां अपार भीड़ जुटती है। इस मेले में लाखों कांवड़ चढ़ाई जाती हैं। इस धाम से हरिद्वार तक का मार्ग आगे दिया गया है। बोलों शिव भोले की जय।
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विश्व प्रसिद्ध बाघेश्वरी धाम कनीना से महज 13 किमी दूर पड़ता है। श्रावण माह की शिवरात्रि पर यहां अपार भीड़ जुटती है। इस मेले में लाखों कांवड़ चढ़ाई जाती हैं। इस धाम से हरिद्वार तक का मार्ग आगे दिया गया है। बोलों शिव भोले की जय।
हरिद्वार एवं नीलकंठ, गंगोत्री से भक्तजन कंधे पर गंगाजल लेकर करीब 350 किमी दूरी तय करके बाघेश्वरी धाम पर अर्पित करते हैं। अपार भक्ति एवं श्रद्धा उनके दिलों में होती है। लीजिए इन भक्तों को नमन करें। बम-बम भोले।
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कभी घर आंगन में गोननी, गुननी, गोंदिया, गोंदी का पेड़ लगा होता था जिसके पत्ते मुंह आने पर रामबाण होते थे। लेहसुआ की बहन गोननी के फल लाल, पीले एवं सरस होते थे। घाव, चोट एवं हेपेटाइटिस में अति कारगर गोननी के विषय में विस्तृत काव्य रचना मेरे ब्लाग पर देखने का कष्ट करें।
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शतावर एक औषधीय पौधा है जिसकी जड़ों में शकरकंदी जैसी रचनाएं पाई जाती हैं। शतावर स्त्रियों के रोग दूर करने, पुरुष तत्व बढ़ाने, कैंसर तक के रोग को दूर करने के काम आता है। विस्तार से मेरे ब्लाग पर देखे।
झुंडा जिसे मुंजा भी कहते हैं घास कुल का पौधा है जिससे झोपड़ी बनाई जाती थी जहां चिडिय़ां आकर डेरा डालती थी। रस्सी, खिलौने आदि बनाने के अलावा इस पौधे की जड़ सिर चकराने को दूर करते हैं। इसके बारे में विस्तार से मेरे ब्लाग पर देखे।
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आंवला एक अद्भुत फल है। आंवला एकादशी को इस पौधे की पूजा होती है वहीं शरीर के तीनों दोषों को हरने वाला तथा सैकड़ों रोगों में लाभप्रद है। विस्तार से देखे मेरे ब्लाग पर।
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कोहिंद्रा नामक एक नकली अमरंथस कहलाता है जो पीलिया रोग में रामबाण है। इसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। यह पशु आहार भी होता है। इसके बारे में विस्तार से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
नूनिया या नूणखा एक प्राकृतिक नमकीन वाला पौधा होता था जो सलाद के रूप में अमेरिका तक विख्यात है। इस पौधे में ओमेगा तीन नामक रासायनिक पदार्थ पाया जाता है। यह शाम के समय खाने पर अधिक स्वादिष्ट होता है तथा बाकी समय कम। यह खाटा का साग बनाने, विभिन्न प्रकार के रोग रोकने में उपयोगी है। विस्तार से मेरे ब्लाग पर पढ़े।
आयुर्वेद में अमृता कहलाने वाली गुड़ुची या गिलोय एक ऐसी बेल है जिसके पीले रंग की आकाशीय जड़े निकल आती हैं। यह जंगल, पहाड़ी या खेत में मिल सकती है। यह बुखार, तीनों ताप दूर करने वाली तथा शरीर की कई बीमारियों में रामबाण है। विस्तृत जानकारी मेरे ब्लाग पर देखे।
बालम खीरा एक वृक्ष होता है जिस पर दस किग्रा तक अति कठोर खीरा लगती हैं। इसके पेड़ के नीचे वाहन पार्क करना खतरे से खाली नहीं है। यह पत्थरी के इलाज में रामबाण तथा इसके छाल से कई प्रकार की क्रीम बनती हैं। विस्तार से देखे मेरे ब्लाग पर।
फल पर कांटों वाला तथा भेड़ की ऊन में चिपक उसकी कीमत घटाने वाला मसखरा बुखार, ट्यूमर, टीबी तथा कई बीमारियों में काम आता है। यह गर्मी में यहां वहां खड़ा मिलता है। विस्तार से मेरे ब्लाग पर देखे।
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घृतकुमारी जिसे ग्वारपाठा भी कहते हैं। इसकी 200 स्पीशिज पाई जाती हैं जिनमें से महज आधा दर्जन ही काम की होती हैं। यह शुगर, त्वचा रोग एवं पेट के रोगों में रामबाण होता है। इसके बारे में विस्तृत मेरे ब्लाग पर पढ़े।

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