Saturday, February 01, 2020



सुन 

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ये पौधे  कह रहे हैं
कभी तो उनकी सुन
मत काट  ना उनको
छोड़ दे कलुषित धुन,
ये जीव पुकार रहे हैं
हम हैं वन  के प्राणी
मार देंगे अगर हमको
बस तुम्हें होगी हानि,
पर्यावरण पुकार रहा
क्यों करते हो प्रदूषण
मत करो खिलवाड़ ये
पर्यावरण होता भूषण,
ये धरा  पुकार रही है
मत बनो इस पर बोझ
परहित का काम करो
प्रभु भजन  करो रोज।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


सपने 

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कभी देखे थे सपने
कहीं होते थे अपने
जगत देव देवी  भी
सदा पड़ते थे जपने,
मन में कुछ अरमान
अनोखी होती  शान
आगे बढ़ता देखकर
कहते थे उसे महान,
सारे सपने नष्ट किए
नीचों ने किया प्रहार
सता सता मार डाला
सपने भी गए बेकार,
चले गए धरा छोड़के
कोई साथ न दे पाया
किसे कहे अपने गम
जग ने मजाक बनाया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




दिहाड़ी 

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बुढिय़ा ने दिहाड़ीदार मजदूर को धमकाकर भगाते हुए स्वयं कस्सी उठाकर राजगीर के साथ मसाला बनाना शुरू कर दिया और पास खड़े बेटों एवं पोतों से कहा-तुम चूडिय़ां पहन लो। मर्द होकर भी 500 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी नहीं बचा पाते। बेचारे बेटे पोतों ने कहा-मां बुजुर्ग हो। तुमने कभी पैसे देखे नहीं। ऐसे में तुम पैसे बचाने के लोभ के वशीभूत ऐसा कह रही हो। अब तो पैसे बहुत हैं। कभी तो उन पैसों का आनंद लो वरना वे व्यर्थ में चले जाएंगे। किंतु मां ने एक ना सुनी अपना काम जारी रखा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.....
भद्दा मजाक होता यहां
दोषी भी बच जाते सारे
राष्ट्रपति भी चैलेंज हुए
कैसे बने हैं न्याय हमारे।
ताऊ बोला ताई से.......
न्याय मिलेगा  एक दिन
अपराधी ना बच पाएगा
अपराधी को लगे फांसी
एक दिन  जरूर आएगा,
जिसने निर्भया को मारा
वो बे-मौत  मर जाएगा
लाख कोशिश कर लेना
जल्लाद  फांसी लगाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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