जीवन
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जब तक पेड़ तब जीवन
पेड़ कटे आ जाए बर्बादी
बचा लो इन्हें आज अभी
फिर आ सकती आजादी,
दिनरात पेड़ काट रहे जन
जरूर कभी प्रलय आएगी
सब कुछ नष्ट हो जाएगा
प्रकृति नहीं बचा पाएगी ,
लगाओ पेड़ धरा पर कहीं
बना दो धरा हरी भरी अब
पेड़ लगाकर देख लो जरा
पेड़ पौधों में नजर आए रब,
जीवन क्षण भंगुर कहलाता
कुछ करो जनहित के काम
कुछ भी अगर नहीं किया
खत्म हो जाए जग से नाम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
किस्मत
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किस्मत का रोना रोते
करते नहीं कोई काम
इतना बुरा वक्त आया
पीते गली गली जाम,
कोई उनको ना काम
ताश पीटते थोथे काम
इतना शोर शराबा हो
रगड़ते रहो लेकर बाम,
अपना पता ना परिवार
बस उन्हें दारू से प्यार
एक बात मतलब हजार
झगड़े खातिर रहे तैयार,
सुधर जाए किस्मत भी
मेहनत से जी ना चुराए
जिंदगी वहीं कहलाती
परहित में सबको हंसाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.......
मोलडऩाथ का मेला आया
शक्कर का प्रसाद चढ़ाएंगे
धोक लगा बाबा धूने पर
मन की मुरादें सब पाएंगे।
ताऊ बोला ताई से.........
भीम सिंह ने मूर्ति लगवाई
होशियार ने लिखी पुस्तक
फागुन एकादशी का मेला
दे रहा है सिर पर दस्तक,
दूर-दूर तक जाने हैं जाते
बाबा की महिमा निराली
भजन सत्संग होते रहते हैं
वो करे कनीना रखवाली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
रसगुल्ले
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ताई बार बार रसगुल्ले ले रही थी और युवक उन्हें बार बार डालकर दे रहा था। हर बार उनकी प्लेट में युवक पांच से सात रसगुल्ले डालता और ताई उसे चट कर जाती। जब ताई ने 30 के करीब रसगुल्ले खा लिए तो युवक ने ताई से कहा-ताई, और रसगुल्ले ले लो। ताई का जवाब था-पेट तो अपना ही
है। और कहां से खाए जाएंगे। उनका जवाब सुनकर युवक को हंसी आ गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






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