एलियन
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सुबह के करीब सवा पांच बजे थे कि आकाश में अचानक तेज द्युति पैदा होने के साथ साथ एक तेज धमाके के साथ आकाश प्रकाशमान हो गया। राजू अपनी सुबह की सैर पर गया हुआ था कि जब उसने आसमान का नजारा देखा तो मुख से निकला-ये तो कहीं एलियन तो नहीं? वर्षों से जो रहस्य बना हुआ था कहीं वो तो नहीं? नहीं, नहीं, यह तो उल्का या उल्का पिंड हो सकता है? इन्हीं अनुत्तरित प्रश्रों का जवाब ढूंढते हुए आगे बढ़ा था कि कुत्तों के भोंकने तथा मोरों के पिपाहट की आवाज सुनकर सभी स्तब्ध रह गए। इतना बड़ा देश और इतने बड़े वैज्ञानिक अभी तक नहीं बता पाए कि आखिरकार यह घटना क्या थी? दिनभर सोच में डूबा राजू उदास बैठा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
डार्विन
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जैव वैज्ञानिक ने खोजा
इंसान कैसे पैदा हुआ
कैसे हुआ था विकास
अनुत्तरित प्रश्र था कुआं,
वालस -डार्विन आए
खोज डाला ये विकास
प्रकृति वरित करती है
कमजोर का होता नाश,
विषमताएं पाई जाती हैं
अच्छे गुण सतत चलते
नई पीढ़ी का विकास
नए गुण उसमें मिलते,
गुत्थी सुलझा डाली थी
जो अब तक चली आई
1859 में बना था वाद
जन गुत्थी थी सुलझाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
्र
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
सुबह सवेरे देखा एलियन
तुम कभी नहीं मान सकते
हो सकता है बात सच्ची
तुम नहीं ये विश्वास रखते।
ताऊ बोला ताई से.........
अगर एलियन आ जाए तो
जेली से कूट कूट भगाऊं
फिर भी नहीं बतलाएंगे तो
उनको पकड़ बांधकर लाऊं,
वैज्ञानिक देश के अति आगे
उनसे नहीं छुप सकता राज
भार और भारतवासियों पर
मुझको तो बहुत है नाज।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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सुबह के करीब सवा पांच बजे थे कि आकाश में अचानक तेज द्युति पैदा होने के साथ साथ एक तेज धमाके के साथ आकाश प्रकाशमान हो गया। राजू अपनी सुबह की सैर पर गया हुआ था कि जब उसने आसमान का नजारा देखा तो मुख से निकला-ये तो कहीं एलियन तो नहीं? वर्षों से जो रहस्य बना हुआ था कहीं वो तो नहीं? नहीं, नहीं, यह तो उल्का या उल्का पिंड हो सकता है? इन्हीं अनुत्तरित प्रश्रों का जवाब ढूंढते हुए आगे बढ़ा था कि कुत्तों के भोंकने तथा मोरों के पिपाहट की आवाज सुनकर सभी स्तब्ध रह गए। इतना बड़ा देश और इतने बड़े वैज्ञानिक अभी तक नहीं बता पाए कि आखिरकार यह घटना क्या थी? दिनभर सोच में डूबा राजू उदास बैठा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
डार्विन
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जैव वैज्ञानिक ने खोजा
इंसान कैसे पैदा हुआ
कैसे हुआ था विकास
अनुत्तरित प्रश्र था कुआं,
वालस -डार्विन आए
खोज डाला ये विकास
प्रकृति वरित करती है
कमजोर का होता नाश,
विषमताएं पाई जाती हैं
अच्छे गुण सतत चलते
नई पीढ़ी का विकास
नए गुण उसमें मिलते,
गुत्थी सुलझा डाली थी
जो अब तक चली आई
1859 में बना था वाद
जन गुत्थी थी सुलझाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
सुबह सवेरे देखा एलियन
तुम कभी नहीं मान सकते
हो सकता है बात सच्ची
तुम नहीं ये विश्वास रखते।
ताऊ बोला ताई से.........
अगर एलियन आ जाए तो
जेली से कूट कूट भगाऊं
फिर भी नहीं बतलाएंगे तो
उनको पकड़ बांधकर लाऊं,
वैज्ञानिक देश के अति आगे
उनसे नहीं छुप सकता राज
भार और भारतवासियों पर
मुझको तो बहुत है नाज।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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