ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
बढ़ रहे घने अत्याचार
महिला बेचारी रोती हैं
कटों में जीवन जीकर
मौत की नींद सोती है।
ताऊ बोला ताई से.......
सदियों से होते आए हैं
अब भी ना हुआ सुधार
महिला समस्त जग का
कहलाती एक आधार,
महिला एक वो नारी है
करे नहीं भेदभाव कभी
हर बच्चा या बच्ची हो
आंचल में पलते सभी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
प्रधान
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स्कूल मैनेजमेंट का प्रधान क्या बनाया वो तो आए दिन स्कूल में आ धमकता और कभी किसी चीज में कमी तो कभी किसी चीज में कमी निकालता। शिक्षक एवं मुखिया तंग आ गए। एक दिन सबक सिखाने के लिए उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान का चुनाव पुन: करके उन्हें बदल दिया। बस फिर क्या था वो अपना सा मुंह लेकर रह गया। उसके बाद उसने तो उधर दर्शन देने ही बंद कर दिए।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
शिकायत
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करते रहते कई शिकायते
जो जन मन से हो मलिन
रह जाती हैं बस यादें ही
जो जन सज्जन व कुलीन,
दिनभर जिन्हें काम नहीं
उल्टा सीधा वो सोचते हैं
कभी इस पर कभी वहां
कुत्ते की भांति भौंकते हैं,
चोरी, जारी, नीचता होती
बस उनके कलुषित गहने
बेशर्म,गद्दार,बेकार जन ने
हंस हंसकर सारे ही पहने,
एक दिन चले जाएंगे ये
सारे ही जगत को छोड़कर
भुला देंगे पल में जग वाले
ऐसे जन का सिर फोड़कर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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ताई बोली ताऊ से.....
बढ़ रहे घने अत्याचार
महिला बेचारी रोती हैं
कटों में जीवन जीकर
मौत की नींद सोती है।
ताऊ बोला ताई से.......
सदियों से होते आए हैं
अब भी ना हुआ सुधार
महिला समस्त जग का
कहलाती एक आधार,
महिला एक वो नारी है
करे नहीं भेदभाव कभी
हर बच्चा या बच्ची हो
आंचल में पलते सभी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
प्रधान
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स्कूल मैनेजमेंट का प्रधान क्या बनाया वो तो आए दिन स्कूल में आ धमकता और कभी किसी चीज में कमी तो कभी किसी चीज में कमी निकालता। शिक्षक एवं मुखिया तंग आ गए। एक दिन सबक सिखाने के लिए उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान का चुनाव पुन: करके उन्हें बदल दिया। बस फिर क्या था वो अपना सा मुंह लेकर रह गया। उसके बाद उसने तो उधर दर्शन देने ही बंद कर दिए।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
शिकायत
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करते रहते कई शिकायते
जो जन मन से हो मलिन
रह जाती हैं बस यादें ही
जो जन सज्जन व कुलीन,
दिनभर जिन्हें काम नहीं
उल्टा सीधा वो सोचते हैं
कभी इस पर कभी वहां
कुत्ते की भांति भौंकते हैं,
चोरी, जारी, नीचता होती
बस उनके कलुषित गहने
बेशर्म,गद्दार,बेकार जन ने
हंस हंसकर सारे ही पहने,
एक दिन चले जाएंगे ये
सारे ही जगत को छोड़कर
भुला देंगे पल में जग वाले
ऐसे जन का सिर फोड़कर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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