जरा सुनो
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बलात्कारियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाए। ऐसा कानून भी बनाना चाहिए।
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दोहा ***********************
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आर्तनाद सुन दिल भरा, जीवन निश्चित अंत।
नहीं अमर इस धरा पर, राजा हो या संत।।
दुष्ट साथ अब छोड़ दो, कितने कहते संत।
नरक द्वार वो भोगता, कुत्ते जैसा अंत।।
आर्तनाद जब से सुना, अन्तर्मन बेचैन।
कुर्बानी दी वीर ने, मिला नहीं तब चैन।।
विधा-कविता
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मौन तपस्या बहुत बड़ी, करना जाने कोय,
दिन रात प्रभु रटन, दुख दर्द सदा सम होय,
ऊर्जा तन की रोकिये,करिये सुंदर यह काम,
मौन व्रत धारण करो, हो जाये जग में नाम।
इतिहास गवाह जग में, कितने हुये विद्वान,
मौन शक्ति उन्हें मिली, बने जगत में महान,
शिव,योगी,गांधी,भागीरथ,देव बड़े निराले थे,
मौन शक्ति बम समान,जानता है पूरा जहान।
भोजन करते जब कभी, होती ऊर्जा संचित,
अधिक बोलने से जन, रह जाता है वंचित,
ऊर्जा बचे शरीर गर, लाभ शरीर को हजार,
ऊर्जा नष्ट नहीं कीजिये, जीवन बनता बेकार।
भय,क्रोध,चिंता मिटे, मौन में शक्ति है अपार,
शरीर निरोगी बन जाए, करो मौन से ही प्यार,
जिसने भी मौन किया, सकारात्मक बने विचार,
मौन धारण जब करें, मिलता है प्रभु का प्यार।
शिवभोले जग में हुये, रखते तप का बड़ा ज्ञान,
मौन रहते थे कई कई कल्प, यूं त्रिलोकी महान,
शहस्त्र कल्प जब बीते, टूटता समाधि मौन भंग,
जग के रक्षक वो बने, देवलोक की है वो शान।
बापू के तीन ये बंदर,बतलाते हैं जगत का हाल,
एक उनमें रहता है मौन, बदले जमाने की चाल,
गांधी जब अफ्रीका गये, किया उन्होंने मौन व्रत,
बापू नाम से जाने जाते, बने थे अंग्रेजों के काल।
योगी,संत,महात्माऔर कितने ही हुये जगत देव,
एकांत बैठकर तप करते, मौन रह प्रभु से लीन,
उम्र,तन शक्ति,सांस बढ़े,अपनाओ गर ना यकीन,
सरस्वती में 6 माह तपे शिव, जैसे कोई हो मीन।
भागीरथ ने मौन-तप किया, लाये धरा पर गंगा,
सगर, अंशुमान मौन तप,पहुंचे थे दोनों देवलोक,
मौन शक्ति जब शिव तोड़ी,जटाओं में फंसी गंगा,
अभिमान गंगा गया, लिया नहीं कभी कोई पंगा।
च्यवन ऋषि मौन तप किया, महेंद्रगढ़ की ढोसी,
सुकन्या ने फोड़ी आंखें, तोड़ दिया था मौन व्रत,
शर्याति ऋषि ने अपनी सुकन्या,बनाई ऋषि पत्नी,
च्यवन ऋषि ने शादी करने में,रखी थी एक शर्त।
एक तरफ च्यवन वृद्ध,दूजे सुकन्या खड़ी जवान
अश्विनी कुमार फिर आये,बनाया था च्यवनप्राश
फिर से हुआ जवान च्यवन, तोड़ा था निज मौन,
मौन की शक्ति अपरमपार, जानता नहीं है कौन।
मौन प्रकृति, मौन,आकाश,मौन चंद्रमा की जमीं,
मौन वैली देश में प्रसिद्ध,मौन रहकर हटे कमी,
मौन जुलूस हो या मौन धारण,करे मन को शांत,
बक बक करने से बढ़ते क्रोध,पाप और ये गमी।
सृष्टि का अजब नजारा, मौत मिलती होता मौन,
अंत सभी का मौन रूप है, मौन से उत्पत्ति अंत,
मौन जहां का राज खोलता, मौन बड़ा होता ग्रंथ,
मौन रहकर अर्जित करो ज्ञान,कहते कितने संत।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
बेटी
विधा-कविता
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बेटी घर संसार है,
कर लो इससे प्यार,
जिस घर बेटी नहीं,
मानो घर नरक द्वार।
बेटी बिना सजे नहीं,
घर,आंगन और द्वार,
बेटी बिना निश्चित है,
एक दिन होगी हार।
बेटी मां, बहन होती,
बेटी करती है उद्धार,
बेटी बिना जगत में,
मिलते हैं कष्ट हजार।




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