Saturday, September 12, 2020


दोहा

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सुखमय जीवन कामना, बने जगत पहचान।
ज्ञान विज्ञान में निपुण, मिले बड़ाई मान।। 


मेरा अनुभव.......अब तक का
विधा-कविता
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अनुभव बड़ी चीज बताई,
कहती थी मेरी धापा ताई,
जो कोई अनुभव पायएगा,
जीवन में मार नहीं खाएगा।

मां,बाप,गुरु, बड़े जन का,
होता रहा जग में सम्मान,
बड़ा अनुभव उनके पास,
यूं होती है बुजुर्ग पहचान।

वकील, डाक्टर, शिक्षक
चरवाहा हो मिले भिक्षुक,
अनुभव के बल कामयाब,
अनुभव होता बड़ा नायाब।

विवाह शादी के मौके पर,
बुजुर्ग अनुभवी मिलता है,
अनुभव से जो काम करेगा,
नाम नभ पर ही खिलता है।

अनुभव जिसके पास होता,
वहीं तो बुजुर्ग कहलाता है,
अनुभवहीन एक बच्चा हो,
बोल बोल मन बहलाता है।

रावण मृत्यु शैया पर लेटा,
लक्ष्मण गया था ज्ञान पाने,
पितामह भीष्म मृत्यु शैया,
लगा ज्ञान विज्ञान बतलाने।

आशीर्वाद लेते बूढ़े बुजुर्ग,
दे ज्ञान और अनुभाव बात,
इसलिए अपने अनुभव का
रखते हैं जन सिर पर हाथ।

बच्चा था हो गया बालक,
अब हो चुका हूं मैं अधेड़,
अनुभव अपना लिया बहुत,
अवाक बोलता नहीं है मेड़।

गरीबी में दिन खूब बिताये,
लोगों ने तो हम खूब सताये,
लोग गरीब के नहीं हैं साथी,
गरीब के नहीं चढ़ते बाराती।

धन दौलत बिना नहीं सगा,
ना नारी,दोस्त,ज्ञान व प्यार,
धन दौलत जब पास नहीं,
जीती बाजी जाता जन हार।

फूट नहीं हो घर आंगन में,
पति पत्नी में हो, सदा प्रीत,
बेटा, बेटी,भाई बंधु अच्छे,
दुनिया गाएगी उस घर गीत।

मात पिता का हो आशीर्वाद,
पत्नी का सदा मिलता साथ,
जल्दी अगर ये जग से जाये,
बस फिर जन होएगा अनाथ।

माता पिता और मेरी पत्नी तो
पहले ही छोड़ चुके है साथ,
दुख दर्द का क्या बखान करूं
मैं बना अभागा और अनाथ।

अच्छे दोस्त और सखा संगी,
बना सकते कभी बिगड़े काम,
इसलिये श्रीकृष्ण-सुदामा की,
दोस्ती याद आती सुबह शाम।

दुश्मन अधिक न होने चाहिए,
पर होने चाहिए एकाध जरूर,
उनके कारण बुराई नहीं झांके,
मिट जाता है जन तन का गरूर।

स्वास्थ्य अपने पर ध्यान रखे,
हिम्मत, विश्वास दिल में भरा,
हँसमुख तन-मन सदा रखना,
दिल में नहीं भय ना रहे डरा।

काम भलाई के करने चाहिए,
ईश्वर में जो रखता है विश्वास,
बुरी संगति,मद्यपान और नशा,
ना फटकने चाहिए कभी पास।

बंधु-बांधव, प्रेम प्रीत में बंधे,
बहे गंगा सी घर में सदा धार,
मेरा अनुभव आज तक का है,
बढ़ता जाए प्यार सदा परिवार।
स्वीकार करो नमस्कार,नमस्कार।।
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पसंददीदा रंग पर काव्य सृजन
विधा-कविता
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काला
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कालर रंग होता पक्का,
छुड़ा देता सबके छक्का,
तव्वा काला,भैंस काली,
काला होता जग माली।

काला रंग, गंभीर होता,
काली स्याही दे दिखाई,
काला नाग शिव का हो,
कालो ने ये सृष्टि बसाई।

काला मन को हो कोई,
फिर बनती,  नहीं बात,
काले कारनामे कर कर
कर देते हैं जग में रात।

काला बुरा नहीं होता,
मरकर बनता है काला,
काले फल सेहतवर्धक,
काले मोती की माला।।

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