अधूरा मुक्तक
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जो गुजरे दिन गमों में तो सुहानी शाम हो जाये।
खुशी मिलनी जो हो मुझको तुम्हारे नाम हो जाये।
मेरा क्या मैं तो जी लूंगा, मुझे आदत अँधेरों की,
लो मांगे दुआएं प्रभु से बस यह काम हो जाये।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा
ओर/पक्ष/दिशा
विधा-दोहे
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बादल छाये नभ सजा, चमके बिजली घोर।
बरसा पानी भीगता, किसान खुश चहु ओर।।
दिशा चार हैं जहाँ, जन मिलते चहुं ओर।
कहीं पेड़ भी कम मिले, मिलते जग में चोर।।
बस उसके आधीन हैं, ले जाये जिस ओर।
खुशी मिले मन को लगे, नाच रहा है मोर।।
शादी विवाह में मिले, दोनों पक्ष समान।
जीवन नैया दौड़ती, जोड़ी स्वर्ग जहान।।
कहीं लड़ाई हो कभी, दो पक्षों में घात।
बैठ मनाये जब उन्हें, बन जाएगी बात।।
दोस्तों के ठिकाने
कविता
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या तो दोस्त बनाओ मत ना,
या वो ठिकाना पूछों मत ना,
दोस्त जहां से प्यारा मिलता,
फाड़ फेंको वो कोई खत ना।
बुरी सोच के लोग कहते है,
वो दोस्त मिलेगा मयखाने में ,
जहन्नुम में बताते, कुछ लोग,
कुछ बताते हैं नक्कारखाने में।
ईश्वर के बाद विश्वसनीय हो,
रहता छाया सूरज के समान,
दोस्ती की मिसाल बनी कई,
दोस्त होता है जग में महान।
दोस्त हुये प्रभु कृष्ण सुदामा,
दोस्ती की थी सच्ची मिसाल,
साथ दिया श्री कृष्ण सुदामा,
जगमग घर किया मालामाल।
सुदामा बैठाया था पलकों पे,
तब पलके बनी दोस्त स्थान,
संदीपन ऋषि के बनी दोस्ती,
भूल नहीं पाएगा यह जहान।
गांधारी-कुंती की थी दोस्ती,
दोनों के पुत्र आपसी दुश्मन,
देखों देवरानी-जेठानी दोस्ती,
एक दूजे को त्याग तन-मन।
दिल से निभाई दोनों ने दोस्ती,
दिल बना फिर दोस्ती ठिकाना,
महाभारत के युद्ध की वो पात्र,
सभी ने देखा सभी ने ही माना।
स्त्री पुरुष के बीच होती दोस्ती,
श्रीकृष्ण-द्रोपदी का सुंदर नाम,
आपत्ति में श्रीकृष्ण काम आया,
चीर हरण के वक्त चीर बढ़ाया।
दिल में बसे थे द्रोपदी के कृष्ण,
दोस्ती की थी अजब ही मिसाल,
शिशुपाल वध के समय बनी थी,
जीवनभर की श्रीकृष्ण देखभाल।
सीता त्रिजटा की सुनी है दोस्ती,
राक्षसी ने देवी को, बैठाया पास,
रावण की सेविका होकर त्रिजटा,
सीता माता को वो आई थी रास।
कर्ण और दुर्योधन के बीच दोस्ती,
भूला नहीं पाएगा यह जगत सारा,
सूद पुत्र और राजकुमार यार बने,
कर्ण जान दी थी दोस्त था प्यारा।
दोस्त का ठिकाना यूं हुआ जग में,
आंखें, पलकें, दिल, रोम रोम खून,
दोस्ती की मिसाल बना दो अब तो,
ज्यों दूध और पानी तथा पानी चून।।
आज से कह दो दोस्त को वो बैठे,
अपने दिल को बनाके एक मुकाम,
याद आनी चाहिए, दोस्त की सदा,
दिन रात हो रही या हो सुबह शाम।
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जो गुजरे दिन गमों में तो सुहानी शाम हो जाये।
खुशी मिलनी जो हो मुझको तुम्हारे नाम हो जाये।
मेरा क्या मैं तो जी लूंगा, मुझे आदत अँधेरों की,
लो मांगे दुआएं प्रभु से बस यह काम हो जाये।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा
ओर/पक्ष/दिशा
विधा-दोहे
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बादल छाये नभ सजा, चमके बिजली घोर।
बरसा पानी भीगता, किसान खुश चहु ओर।।
दिशा चार हैं जहाँ, जन मिलते चहुं ओर।
कहीं पेड़ भी कम मिले, मिलते जग में चोर।।
बस उसके आधीन हैं, ले जाये जिस ओर।
खुशी मिले मन को लगे, नाच रहा है मोर।।
शादी विवाह में मिले, दोनों पक्ष समान।
जीवन नैया दौड़ती, जोड़ी स्वर्ग जहान।।
कहीं लड़ाई हो कभी, दो पक्षों में घात।
बैठ मनाये जब उन्हें, बन जाएगी बात।।
दोस्तों के ठिकाने
कविता
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या तो दोस्त बनाओ मत ना,
या वो ठिकाना पूछों मत ना,
दोस्त जहां से प्यारा मिलता,
फाड़ फेंको वो कोई खत ना।
बुरी सोच के लोग कहते है,
वो दोस्त मिलेगा मयखाने में ,
जहन्नुम में बताते, कुछ लोग,
कुछ बताते हैं नक्कारखाने में।
ईश्वर के बाद विश्वसनीय हो,
रहता छाया सूरज के समान,
दोस्ती की मिसाल बनी कई,
दोस्त होता है जग में महान।
दोस्त हुये प्रभु कृष्ण सुदामा,
दोस्ती की थी सच्ची मिसाल,
साथ दिया श्री कृष्ण सुदामा,
जगमग घर किया मालामाल।
सुदामा बैठाया था पलकों पे,
तब पलके बनी दोस्त स्थान,
संदीपन ऋषि के बनी दोस्ती,
भूल नहीं पाएगा यह जहान।
गांधारी-कुंती की थी दोस्ती,
दोनों के पुत्र आपसी दुश्मन,
देखों देवरानी-जेठानी दोस्ती,
एक दूजे को त्याग तन-मन।
दिल से निभाई दोनों ने दोस्ती,
दिल बना फिर दोस्ती ठिकाना,
महाभारत के युद्ध की वो पात्र,
सभी ने देखा सभी ने ही माना।
स्त्री पुरुष के बीच होती दोस्ती,
श्रीकृष्ण-द्रोपदी का सुंदर नाम,
आपत्ति में श्रीकृष्ण काम आया,
चीर हरण के वक्त चीर बढ़ाया।
दिल में बसे थे द्रोपदी के कृष्ण,
दोस्ती की थी अजब ही मिसाल,
शिशुपाल वध के समय बनी थी,
जीवनभर की श्रीकृष्ण देखभाल।
सीता त्रिजटा की सुनी है दोस्ती,
राक्षसी ने देवी को, बैठाया पास,
रावण की सेविका होकर त्रिजटा,
सीता माता को वो आई थी रास।
कर्ण और दुर्योधन के बीच दोस्ती,
भूला नहीं पाएगा यह जगत सारा,
सूद पुत्र और राजकुमार यार बने,
कर्ण जान दी थी दोस्त था प्यारा।
दोस्त का ठिकाना यूं हुआ जग में,
आंखें, पलकें, दिल, रोम रोम खून,
दोस्ती की मिसाल बना दो अब तो,
ज्यों दूध और पानी तथा पानी चून।।
आज से कह दो दोस्त को वो बैठे,
अपने दिल को बनाके एक मुकाम,
याद आनी चाहिए, दोस्त की सदा,
दिन रात हो रही या हो सुबह शाम।




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