Monday, September 28, 2020

 जरा सुनो
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पढ़ लिखने के बावजूद भी नौकरियां न मिलने से युवा पीढ़ी डिपरेशन का शिकार हो रहे हैं।हालाल बदतर है।
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अनिवार्य
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करो अनिवार्य देश में, रोजगार अधिकार।
खुशहाली में जन हँसे, बढ़े जगत में प्यार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
-अनिवार्य
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करो अनिवार्य देश में, रोजगार अधिकार।
बढ़े भुखमरी रोज ही, मरते लोग हजार।।





आजादी के मतवाले सरदार भगत सिंह
विधा-कविता
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स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी भगत सिंह नाम था,
आजादी रग रग में बसे, आजादी पाना काम था,
अंग्रेजों से किया मुकाबला, आजादी दीवाना था,
अत्याचारों के आगे न झुके, ऐसा वो परवाना था।
 
केंद्रीय संसद में बम फेंके,सांडर्स को जाके मारा,
सुनकर उनकी दीवानगी, खून खौलता है हमारा,
रंग दे बसंती चोला गीत, सिर चढ़कर बाला था,
अंग्रेजी हुकूमत खातिर,बम, बारूद व गोला था।

असहयोग आंदोलन जब, पूरे देश में फेल हुआ,
भगत सिंह,राजगुरु सुखदेव,क्रांतिकारी नाम दिया
बंगा गांव में जन्में थे, भागोंवाला उन्हें नाम दिया,
ऐसा बहादुर वीर जिन्होंने पूरे जग में नाम किया।

जिस दिन उनका जन्म हुआ, शुभ दिन कहलाया
उस दिन उनके चाचा अजीत,सुवर्ण, कृष्ण आये
उनके पिता किशन सिंह,निज भाई गले से लगाये
भगत की दादी मां, बेटों को देखकर अति हर्षाये

23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने, उनको दी फांसी,
राजगुरु सुखदेव संग, भगत को आई बड़ी हाँसी
फांसी से पहले उन्हें लेनिन की जीवनी भी पढ़ी,
भारत के अमर सपूत ने, हंसके फांसी फिर चढ़ी

सदियों बाद ऐसे वीर होते जो देश के मतवाले हो
सुनकर उनकी दास्तान हर माता मन ही मन दे रो
ऐसे वीर को नमन आज,जिसने दी आजादी भोर
फांसी देकर अंग्रेज कांप उठे, पूरे जग मचा शोर।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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कन्या भ्रूण हत्या क्यों?
विधा-कविता
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शान मानते बेटे जगत में,
चाहत होती है औरत की,
बेटी की गर्भ हत्या करके,
चाहत होती शोहरत की।

अभी जन्म ना लिये जिसे,
करते गर्भ में उसकी हत्या,
पूरे जगत में नाम हो देवी,
औरत करती औरत हत्या।

अमीर लोग तो समझते है,
बेटी को सिर पे एक बोझ,
गरीब बेचारे रो रहे रोताना
दे नहीं पाते खाने को रोज।

लड़का लड़की दोनों देखो,
लड़कियां नहीं कभी कम,
मैदान मार रही लड़कियां,
लड़कों का निकला है दम।

पैसे कमाने की खातिर भी,
डाक्टर बन गये हैं, कसाई,
औरत के गर्भ लड़की बता,
जमकर छुरी डाक्टर चलाई।

कन्या भ्रूण हत्या क्यों करते,
पूछो लड़कों के ठेकेदारों से,
कन्या इतनी, बुरी लगती है,
पूछ लो जुर्म के ठेकेदारों से। 

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