Saturday, September 05, 2020

 दोहा अरमान
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अच्छी शिक्षा ले सदा, बढ़े जगत में ज्ञान।
मिले ठीक सी  नौकरी, पूरे हो अरमान।।
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 अध्यापक से मिली सीख
विधा-कविता
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उप शीर्षक-लेख सुधारा (सीख)
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चंचल मन घूम रहे थे, नहीं कोई था डर,
पढऩे जात स्कूल में , आते शाम को घर,
रूखी सूखी चटनी छाछ, भोजन था प्यारा,
थैला उठाकर जाते थे, पास स्कूल हमारा।

शिक्षक मेरा शिव कुमार, बहुत कड़क था,
लेख देख-देख डंडे मारता, जब भड़कता,
पीट पीटकर कर दे लाल,  डर लगता था,
कोई शिकायत लेकर जाए, उसे घड़ता था।

बहुत डर लगता पर, एक मजबूरी सामने,
गरीबी हालात घर की, कागज कहां मिले,
लेखनी कैसे चला पाऊं, हाथ  मेरे बंधे थे,
पर शिक्षक के व्यवहार, नहीं शिकवे गिले।

उनकी एक ही शिक्षा, अपना लेख सुधारों,
दस सफा लिखो राज के, ना समय गंवाओ,
कलम,दवात,होल्डर, सभी को रखना पास,
सुंदर लेख लिखकर, कक्षा पूरी को हँसाओ।

शिक्षक आकर रोज कहे, लेख और सुधारो,
मैं कहता गुरुजी डर लगता, डंडा मत मारो,
फिर भी 5-7 मार डंडे के,पड़ पड़ वो पड़ते,
बहुत उदास रहते देख,मन घुटता था हमारो।

सोचा अब तो बचना मुश्किल,करेंगे प्रयास,
घर पर खूब अभ्यास करे, फिर जागी आश,
करत करत अभ्यास से, जड़मति हुई सुजान,
बार-बार लिखते रहे, बुरा लेख हुआ नाश।

देख लेख में सुधार,शिक्षक ने मारे कम डंडे,
बढ़ गया उत्साह मेरा, सोचा गाड़ दूंगा झंडे,
लेख में हुआ ओर सुधार, मन हा गया खुश,
कुछ और कम हुई पिटाई,मन का मिटा दुख।

फिर तो लेख गया सुधरता, जी सा ही आया,
शिक्षक ने एक रोज मुझे, हँसकर ही बुलाया,
कहा शाबास करो मेहनत, आगे तुम्हें बढऩा,
मन लगाकर करना काम, कुछ ज्यादा पढऩा।

मन हो गया खुश फिर तो, सुधरता गया लेख,
नजरों में दोस्तों के आया, दोस्त बन थे अनेक,
आखिरकार लेख हुआ सुंदर,नाम अति कमाया,
हर शिक्षक ने देख लेख,फिर मुझे गले लगाया।

एक दिन प्रार्थना सभा में, मेरा नाम ही पुकारा,
सुंदर लेख शृंखला में, ऊपर मिला नाम हमारा,
बड़ी ईनाम मिली मुझको, नहीं पीछे मुड़ देखा,
समझा अब तो बदल गई, मेरी भाग्य की रेखा।

वो दिन है उसके बाद,लेख जिसने भी है देखा,
वाह वाह! मुंह से निकला, पाठ ये नया सीखा,
एक के बाद एक बड़ी डिग्री, आखिरकार पाई,
एक दिन उस गुरु की मुझे तो, याद बड़ी आई,

पता किया गांवों से तो, शिक्षक का पता लगा,
प्यारे हो चुके प्रभु के वो, उसकी ही थी रजा,
बहुत दर्द हुआ दिल को, अच्छा लगा शिक्षक,
उसकी देन रही मुझ पर, नहीं रहे हम भिक्षक।

खूब ऊंचाइयां अब छू चुका, भूला  नही पाता,
याद करूं शिक्षक की तो मेरा, दिल भर आता,
नमन आज शिक्षक दिवस पर,रहे स्वर्ग में वास,
करते रहना वहां पर भी, बुराइयों का तुम नाश।

लेख सुधारो, लेख सुधारो,आता है मुझको याद,
प्रभु वो शिक्षक फिर जन्म मिले, करते फरियाद,
नमन आज उनको, गुरु को, रहेंगे मेरे दिल सदा,
यादें उन दिनों की, गुरुओं की, नहीं करूंगा जुदा।

लेख सुधरा खूब,पढ़ाई कर ली खूब,नाम अच्छा,
अब तो दिन बुढ़ापे के आने लगे, प्रभु ही सच्चा,
भगवान शिक्षक को भेजता धरा पर देकर है ज्ञान,
सारे जग में शिक्षक सा नहीं, धरा पर है पहचान।

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