Saturday, September 19, 2020

 दोहा *****************

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 सार्वजनिक
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सार्वजनिक कर दी गई, नेताजी की मौत।
नेता हरकत कर रहे , मांगे इसका स्रोत।।
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 विस्तारित
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विस्तारित हर बात को, कहना सदा न ठीक।
गाथा सुनकर ऊबते, आती कुछ को छींक।।
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दिवास्वप्र
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दिवास्वप्र जो देखते, मेहनत करें छदाम।
जीवन उनका नर्क है, मिले अधूरे काम।।
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प्रस्तावित
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प्रस्तावित है योजना, देश नव निर्माण।
पूरी होगी एक दिन,जब तक तन में प्राण।।




पहली रचना और कवि
कविता
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दिल के उद्गार कहलाए काव्य,
आम जन के नहीं प्रादुर्भाव हो,
कविता लिखने के लिए कवि,
मन में दर्द के उत्पन्न भाव हो।

पंत ने स्पष्ट लिखा हुआ है,
*वियोगी होगा पहला कवि,
*आह से उपजा होगा गान,
निकलकर आंखों से चुपचाप,
बहीं होगी कविता अनजान*।।

कविता जब लिखी जाती है,
जब दिल पर कोई ठेस लगे,
भाव काव्य के तब उत्पन्न हो,
सुंदर-सुंदर बड़ा काव्य सजे।

दिल टूटता है जब किसी का,
दर्द में वो आंसू बहाता रहता,
उसका दुख दर्द काव्य बनता,
वो फिर छंद,काव्य ही कहता।

सिद्ध सरहपा पहले हुये कवि,
आठवीं शती में आता है नाम,
तत्कालीन नालंदा में वो जन्में,
दुख में लिखना उनका काम।

उठाके देखों कवियों की गाथा,
दर्द में जीये जीवन था निराला,
वियोग हुआ या गरीबी दे दर्द,
रोते-रोते तब काव्य निकाला।

तुलसी, निराला, मुंशी देख लो,
या फिर पढ़ो सहजो, मीराबाई,
दिन रात आह निकलता रहता,
मार्मिक,दर्द, लब काव्य सजाई।

ठेस लगी, कभी पत्नी सुन ताना,
कभी वियोग हुआ, न था अन्ना*
फटे पुराने तन पर रहे थे कपड़े,
काव्य का मधुर हाथ लगा गन्ना।

जिनके दिल में न दर्द और खुशी,
कविता लिखने में मिलते हैं दुखी,
कोई शराब का लेता जग सहारा,
कोई हुश्र और इश्क का है मारा।

याद आती अब मुझको मेरी पत्नी,
छोड़ गई मुझे मझधार में तड़पता,
30 वर्षों से अनवरत लिखा काव्य,
आज भी उनके दर्शन को तरसता।

अपने अपने दिल पर, रखो हाथ,
पूछो कविता क्यों दे रही है साथ,
पता लगेगा कितने कवि दुख झेले,
तन्हाई गमों के संग रोज ही खेले।। 

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