सिफारिश
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नहीं सिफारिश चाहिए, ज्ञानी अरु विद्वान।
वीरों के गुणगान से, चमके देश महान।।
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दोहा ***********************
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हिंदी मां निज पास है, करो उसका प्रचार।
पर भाषा के मोह में, जीवन हो बेकार ।।
सुंदरता के सामने, फीके सारे रंग।
दानव मानव देवता, करे चित्त को भंग।।
करो सिफारिश देश की, करो नित्य गुणगान।
नाम कमाए विश्व में, भारत मेरा महान।।
जुगनू
विधा-कविता
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अंबर पर बादल गरजे,
चमकती द्युति बारंबार,
तम हुआ नभ चमका,
जुगनू फिरते हैं हजार।
प्रकृति का अजीब है,
दे रहा चमक प्रकाश,
ऐसा लगे आकाश में,
अंधेरा का करते नाश।
जुगनू को अफ्रीका में,
भरे लालटेन में लोग,
रात भर प्रकार मिले,
कैसा अजब संजोग।।
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तम/अंधेरा/अंधकार
विधा-कविता
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तम मिटाना देश से,
व्याधि मिटे हजार,
बढ़े देश में एकता,
आपस में हो प्यार।
अज्ञान भरा है दिल,
मिटाओ देकर शिक्षा,
वक्त बीता पछताएंगा
मांगों सड़क पे भीक्षा।
अंधकार तन पर हो,
जीना हो जाए बेकार,
मिटा दो तम आज ही,
भर दो दिलों में प्यार।।
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विधा-कविता
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शृंगार करेगा घंटो तक,
लगा है इश्क का रोग,
मीट मांस वो खा रहा,
लगता मदिरा का भोग।
कभी गले को सजाता,
कभी बाजू करे शृंगार,
चलता है वो बन ठन,
नखरे करता है हजार।
दिखावे की चीज बनी,
आज इंसान का वेश,
कई भांति के लोग है,
बुराई बची नहीं शेष।
खेल अधूरा नहीं रहे,
करो पाप अब हजार,
जनहित में जीए नहीं,
वो जीवन हो बेकार।




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