दोहे*
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सम्मानित जन रो रहे, झूठा है संसार।
पापी जग में बढ़ गये, धन दौलत से प्यार।।
नहीं पिपासा रह गई, नहीं चाह संसार।
संगति में मन लग रहा, प्रभु का मिलता प्यार।।
सम्मानित जन कह रहे, कर लो थोड़ा गौर।
बूढ़े जन बेघर हुये, कहीं न उनको ठौर।।
भाई भाई लड़ रहे, घटी है प्रेम प्रीत।
ओछे जन से प्यार है, जहां की यहीं रीत।।
खेल कूद में नाम हो, पाए शिक्षा रूप।
सबके मन को भा रहा, बनो जगत में भूप।।
विषय- वह बात जिसे सुनकर आपको खुशी मिलती है
विधा-कविता
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घर से निकले घूमने, सामने आया मित्र,
फूल से मुस्कुरा रहे,तन पर छिड़का इत्र,
चंद बातें हुई दोस्त से, मन मिली खुशी,
उसने यह पैगाम दिया, क्यों रहते दुखी।
रामू मेरे दोस्त ने, कही मुझसे एक बात,
सदा प्रसन्न रहना, बेशक जग छूटे साथ,
प्रसन्नता मन में हुई, होने चली एक रात,
प्रसन्नचित मन में चली, यादों की बारात।
दोस्त यूं मिलते रहे,मन को मिले आराम,
सोचा जीवन चार दिन, भजलो अब राम,
राम भजन करने से ही, प्रसन्नता लगे हाथ,
प्रार्थना है प्रभु से अब, छूटे न दाता साथ।
एक दिन बैठा था घर, आया दर्द में बाल,
तन पर कपड़े थे नहीं, कच्छा बना रुमाल,
मांगा उसने खाना तो, झटपट दिया परोस,
मन में खुशी मिली अपार,खत्म हुआ रोष।
जब भी किसी गरीब को, देता हूं मैं खाना,
मन में अपार खुशी हो, दर्द अब पहचाना,
जाना सभी को धरा से, करो ऐसा ही काम,
प्रसन्नता से दिल भर जाए, होगा जगत नाम।
पेड़ पौधों को देखता, मिलती खुशी अपार,
क्यों न लगाते पेड़ जब, फल देते है हजार,
पेड़ फूलों से लदे हो, या लगे हुये हो फल,
दर्द तन मन के दूर हो, रोगों का मिले हल।
जब कभी लगाता पौधा, खुशी मिले अपार,
प्रभु मुझे दो जिंदगी इतनी,लगाऊं पेड़ हजार,
धरती का फिर ऋण भी,नहीं रहे फिर उधार,
सुंदर विचार देख पले, खाता हूं जब अनार।
किसी को देखता दर्द में, आंसू बहते तड़ तड़,
ऐसा लगता जैसे बारिश कर रही हो पड़ पड़,
उस समय कर मदद जन, होती मुझको खुशी,
तमन्ना रहती मेरी है, कोई नहीं रहे जग दुखी।
सबसे ज्यादा खुशी मिले, जंगल में हो भ्रमण,
बेशक कोई जानवर बोले,अचानक आक्रमण,
जंगल के नाना जीव देख, प्रसन्नता मिल जाए,
वाह, वाह! करता रहूं, जीव मुझे जब हँसाय।
तितर,बेटेर,फाख्ता, मोर, चिडिय़ा नाना प्रकार,
कछुआ,सांप,गोह,सेही देख देख मन हटे हार,
शुद्ध हवा में झूमता, देखता हूं प्रकृति के नजारे,
सारी थकान दूर हो, जिंदगी में होते वारे न्यारे।
गरीब को अमीर मार रहा, अमीर मरियल जन,
देखा मुझसे नहीं जाए, आग लगे फिर मेरे तन,
जब कोई आगे बढ़े या गरीब का देता है साथ,
मन बाग बाग हो जाता है,खुशियां लगती हाथ।
शिक्षा का ताना बाना बुन, देता शिष्य दिन रात,
अच्छे अंक ले पास हो,स्वर्ग सा लगे मुझे हाथ,
प्रसन्नता अनहद होती, जब हँस रहे जन हजार,
दिल बाग बाग हो जाता है,मिले खुशी बेशुमार।
यही मेरी तमन्ना है, बढ़ता ही जाए जग में प्यार,
बांटे खुशियां लोग मिल,बांटे जन मन को ऐतबार
आगे बढ़े मेरा देश रंगीला, जीत मिले नहीं हार,
मैं खुशी बांटूंगा आगे बढ़कर,खुशी होगी अपार।





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