हिंदी....मेरी एक पहचान
कविता
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जन्म लिया मां ने सिखलाई,
बड़ा हुआ पिता ने बतलाई,
पढऩे गया तो गुरु ने सिखाई,
हिंदी यूँ मेरी पहचान बताई।
खेलते कूदते,लड़ते झगड़ते,
भाग दौड़कर दोस्त पकड़ते,
या फिर देख-देख अकड़ते,
हिंदी भाषा में ही कड़कते।
छोटे थे मां की गोदी में बैठे,
दूध पिया कभी हँसे तो रूठे,
मां ने सुनाई लोरी फिर सोये,
हिंदी में मां हँसकर कहे झूठे।
बचपन में पिता पकड़ा हाथ,
पशु पक्षी की सुनाई थी बात,
कहानी सनाते थे वो देर रात,
हिंदी भाषा ने तब दिया साथ।
स्कूल पहुंचे गुरु कहे कहानी,
हिंदी में ही मांगा था हम पानी,
हिंदी में गुरु को, दिया सम्मान,
हिंदी यहां से बनी थी पहचान।
तख्ती लिखते और पहाड़ा गाये,
बारहखड़ी की मिल तान सुनाये,
हिंदी ही लिखते सफा कहलाए,
हिंदी तो सबकी पहचान बनाये।
गये कालेज याद आये शायारी,
मंच से भाषण की करते तैयारी,
मिले सैकड़ों मंच से ही सम्मान,
यूं बनी हिंदी मेरी एक पहचान।
गये पढ़ाने हिंदी भाषा की प्रयोग,
विज्ञान हिंदी में पढ़ाया था संयोग,
जब भी भ्रमण पर गये हिंदी काम,
हिंदी में स्नातकोत्तर की हुआ नाम।
बने हिंदी के लेखक और पत्रकार,
किया हिंदी से जमकर हमें प्यार,
हिंदी में फटा फट बोल बतलाया,
यूं हिंदी में ही हमने नाम कमाया।
हिंदी में ही, हिंदी विषय पर हुई,
कर रहा प्रतियोगिता की कविताई,
हिंदी माथे की बिंदी सबने बताई,
हिंदी हमने दिल से सदा यूं लगाई।
विश्वभर में प्रसिद्ध हो रही हिंदी,
भारत में 53 करोड़ बोलते लोग,
हिंदी मधुर सरस सलिल है गान,
यूं हिंदी मेेरी बनी अब पहचान।
चार अक्टूबर 1977 का था दिन,
विदेश मंत्री अटल बिहारी याद,
संयुक्त राष्ट्र महासभा जब पहुंचे,
खुशी हुई बोला हिंदी में संवाद।
पहले विदेश मंत्री वो कहलाए,
हिंदी में जाकर बोल दिखलाए,
बढ़ा भारत को विदेशों में मान,
तब हिंदी मेरी बनी है पहचान।
फिर आया सितंबर 2016 दिन,
विदेश मंत्री थी सुषमा स्वराज,
संयुक्त राष्ट्र महासभा, में जाकर,
बोल हिंदी किया दिलों पर राज।
2015 में बैंकाक संस्कृत सभा,
सुषमा स्वराज ने संस्कृत बोली,
हिंदी की जननी बोल हुआ नाम,
इसलिए तो करते हिंदी में काम।
वर्तमान प्रधानमंत्री हैं नरेंद्र मोदी,
2019 में जब किया दौरा विदेश,
संबोधन दिया हिंदी में जा विशेष,
सुनो लो भारत हिंदी का ही देश।
हिंदी विदेशों में जाती अब बोली,
इसलिए मिलकर गाओ यशगान,
कामकाज होता है हिंदी में अब,
यूँ हिंदी भारत की बनी पहचान।
हिंदी है हिंदुस्तान की, मातृभाषा,
हिंदी से नौकरी की अनेक आशा,
हिंदी की लो मिल छेड़ देते तान,
हिंदी अब मेरी एक बनी पहचान।।
हिंदी
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तुम भी बोलो मैं भी बोलूं
भेद दिलों के यूं ही खोलू।
तेरी मेरी भाषा यह हिंदी,
लगती है माथे की बिंदी।।
जरा सुनो ............
बिगड़ता रसोई का बजट
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सादा एवं पौष्टिक भोजन जिसमें पालक, कचरी, चौलाई तथा किचन गार्डन में पैदा की हुई सब्जियां प्रयोग करे ताकि जहरीली एवं महंगी सब्जियां खाने से बच जाए और बजट भी न डगमगाए।
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सभ्यता
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भली सभ्यता देश की, विश्व कमाया नाम।
संस्कृृति एक मिसाल है, करते लोग सलाम।।
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हिंदी *********************
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सरस सलिल दिल छू रही, हिंदी भाषा आज।
सदा दिलों पर राज था, भारत को है नाज।।
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दोहा
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देख सभ्यता आज की, कहां गये वो लोग।
संस्कृति भी खो गई, कैसा है संजोग।।
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दोहा
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सींच रहे हैं पौध को, जरूर देगा फूल।
पेड़ काटने की नहीं, करना कोई भूल।।




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